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दुनिया

हिरोशिमा में एटम बम गिरने के 65 साल

जापान के हिरोशिमा में सुबह ठीक सवा आठ बजे एक भयावह घटना के 65 साल पूरे हुए. 6 अगस्त 1945 के दिन हिरोशिमा पर परमाणु बम डाला गया था. यह पहली बार है जब इस दिन अमेरिका भी श्रद्धांजली में मौजूद रहा.

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ग्राउंड जीरो के पीस मेमोरियल पार्क में इस मौके पर एक समारोह हुआ जहां मृतकों की याद में एक मिनट का मौन रखा गया. इस कार्यक्रम में 70 देशों के प्रतिनिधियों के साथ ही संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून और जापान के लिए अमेरिकी दूत जॉन रोस भी उपस्थित थे.

हिरोशिमा में परमाणु हथियारों के उन्मूलन के लिए बनी संस्था (एचएएनजबल्यूए) के प्रतिनिधि हारुको मोरिताकी का कहना था कि अमेरिका बहुत देर बाद यहां उपस्थित हुआ है."अमेरिका पूरी दुनिया में इकलौता देश है जिसने एटम बम से हमला किया. उनके पास अब भी परमाणु हथियार हैं."

Gedenken Hiroshima 64. Jahrestag Bombenabwurf

जापानी मीडिया ने एटम बम गिरने के दिन पर जापान के लोगों को दूसरे विश्व युद्ध में पीड़ितों के तौर पर दर्शाया, उनकी आक्रामकता के बारे में कुछ नहीं कहा. क्योटो में दोशिशा यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता के प्रोफेसर केनिची असानो का कहना है कि इस कार्यक्रम का "कवरेज लगातार खराब हो रहा है. ये जापानी पत्रकारों की छवि दिखाता है जिनमें ऐतिहासिक तथ्यों के लिए सही समझ की कमी है."

6 अगस्त 1945 का दिन मानव इतिहास के सबसे काले दिनों में एक था. दूसरे विश्वयुद्ध के आखिरी समय में अमेरिका के बी-29 बॉम्बर विमान ने जापान के हिरोशिमा पर परमाणु बम डाला. कुछ ही पलों में वहां विनाश का ऐसा तांडव फैला कि जिसकी कोई तुलना नहीं. हजारों लोग एक क्षण में मारे गए और इतने ही लोग अब भी उस परमाणु बम की विभीषिका को झेल रहे हैं.

कई बच्चे 65 साल भी विकलांग ही पैदा होते हैं. परमाणु बम का ये पहला इस्तेमाल था. इसके कारण 1945 के आखिर तक एक लाख चालीस हज़ार लोग मारे गए. 65 साल में पहली बार है कि बम गिराने वाला देश अमेरिका भी इस मौके पर श्रद्धांजली के लिए हिरोशिमा में मौजूद था.

इस साल उन 5 हज़ार 501 लोगों के नाम भी मृतकों की सूची में जोड़े गए जिनकी परमाणु बम के विकीरणों के कारण पिछले साल मौत हो गई. अब मृतकों की संख्या दो लाख 69 हज़ार 446 है.

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा एम

संपादनः एस गौड़

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