1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

हिमालय में बकरियों का सामूहिक विवाह

भारत के पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में अगले महीने धूमधाम से बकरियों का सामूहिक विवाह होगा. इस दौरान संगीत का इंतजाम भी होगा. उम्मीद है कि इस आयोजन से जीन पूल में विविधता आएगी.

मसूरी के पास जनवरी में 30 गांवों की बकरियां लाई जाएंगी. इस दौरान 500 से ज्यादा ग्रामीण भी जुटेंगे. दो दिन चलने वाले उत्सव में बकरियों के प्रजनन पर ध्यान दिया जाएगा. राजस्थान के पुष्कर ऊंट मेले की तर्ज पर किये जा रहे इस आयोजन के जरिये बकरियों के जीन पूल में विविधता लाने की कोशिश की जाएगी.

ग्रीन पीपल संगठन द्वारा आयोजित कराया जा रहा यह मेला कृषि पर्यटन को भी बढ़ावा देगा. मेले में कई पशु चिकित्सक भी हिस्सा लेंगे. वे स्वस्थ बकरियों की गिनती करेंगे और फिर दूसरी बकरियों के साथ उनका मिलन कराया जाएगा ताकि अच्छी नस्ल का विस्तार हो. सबसे सेहतमंद बकरे और बकरी के मालिक को पुरस्कार भी दिया जाएगा. इसे स्वयंवर कहा जा रहा है, क्योंकि मर्जी बकरी की चलेगी.

बकरी के दूध के कई फायदे

बकरी के दूध के कई फायदे

ग्रीन पीपल के संस्थापक रूपेश राय के मुताबिक, "फेस्टिवल वैज्ञानिक और चुनिंदा ब्रीडिंग पर आधारित होगा. स्वस्थ बकरियों का मतलब है स्वस्थ बच्चे, बेहतर दुग्ध उत्पादन और दूध का बेहतर इस्तेमाल." ग्रीन पीपल इलाके में बकरियों के चारा भी बेच रहा है. चारे का नाम "बकरी छाप" है. संगठन को उम्मीद है कि यूरोप की तरह भारत के फाइव स्टार होटलों में भी हिमालयी बकरी के चीज की मांग होगी और किसान चीज बनाने लायक बन पाएंगे.

सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन गोट्स, मथुरा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर अनुपम दीक्षित भी बकरियों के प्रति सोच बदलने की वकालत करते हैं. भारतीय अखबार हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए दीक्षित ने कहा, "भारत में 80 फीसदी बकरियां कटने के लिए बूचड़खानों में पहुंचती हैं. गांव के लोग उनकी ब्रीडिंग पर बहुत कम ध्यान देते हैं, इसीलिए ऐसा होता है. बकरी का दूध और उससे बनने वाले उत्पादों का बाजार में हिस्सा बमुश्किल चार फीसदी है. उत्तराखंड जैसे राज्य के लिए जरूरी है कि वे जीन पूल को बेहतर करने पर ध्यान दे. मीट से तो सिर्फ एकमुश्त आय होती है, दूध और उसके दूसरे उत्पादों बाजारो के विस्तार में मदद करेंगे और दीर्घकालीन फायदे लाएंगे."

उत्तराखंड लाइवस्टॉक डिवेलपमेंट बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 10 लाख से ज्यादा बकरियां हैं. बीते सालों में दिल्ली समेत कई शहरों में डेंगू बुखार के हजारों मामले सामने आ चुके हैं. बकरी का दूध डेंगू के इलाज में रामबाण माना जाता है. बकरी का दूध खून में प्लेटलेट्स की मात्रा बहुत ही तेजी से बढ़ाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक अगर भारत के हिमालयी राज्य इस दिशा में आगे बढ़े तो इससे सबको फायदा होगा.

ओएसजे/वीके

DW.COM