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दुनिया

'हिटलर सेल्फी' लेना पड़ा भारी

जर्मनी में इस्लाम विरोधी अभियान चला रहे पेगिडा संगठन के मुखिया ने अचानक इस्तीफा दे दिया. बुधवार को कुछ अखबारों ने हिटलर जैसी दिखने वाली उनकी तस्वीर छापी थी जो फेसबुक पर डाली गई थी.

जर्मनी के नाजी तानाशाह अडोल्फ हिटलर की तरह फोटो खिंचवाना पेगिडा प्रमुख लुत्स बाखमन को भारी पड़ा. बीते कुछ महीनों से कई जर्मन शहरों में इस्लाम विरोधी रैलियां निकाली जा रही हैं, जिनका नेतृत्व पेगिडा कर रहा था. प्रशासन ने बताया कि बुधवार को लाइपजिग में हुई रैली में करीब 15,000 लोगों ने हिस्सा लिया. इसके विरोध में उनसे भी ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे. अनुमान है कि दक्षिणपंथी गुटों के विरोध में करीब 20,000 लोगों ने मार्च किया.

फेसबुक पर डाली अपनी विवादास्पद सेल्फी में बाखमन हिटलर के जैसी 'टूथब्रश' मूंछ और खास तरह के बालों वाले अंदाज में दिख रहे हैं. बाद में इसे फेसबुक से हटाना पड़ा लेकिन उसके पहले ही बाखमन ने आप्रवासियों के विरुद्ध कई तरह की अपमानजनक टिप्पणियां भी की थी. सितंबर को जारी किए एक पोस्ट में बाखमन ने आप्रवासियों को "लाइवस्टॉक" यानि पशुधन जैसा बताया था, जिसकी कई लोगों ने सोशल मीडिया साइट पर काफी निंदा भी की थी.

मामले पर विवाद बढ़ने पर बाखमन ने पूरे अभियान को नुकसान पहुंचाने के लिए माफी मांगी. अक्टूबर 2014 से ही पेगिडा की गतिविधियां और उसका असर बढ़ता गया है. संगठन की प्रवक्ता और सहसंस्थापक काथरीन ओएर्टेल ने बाखमन की टिप्पणियों का कड़ा विरोध किया. इस विवादित सेल्फी को लेकर लाइपजिग की रैलियों में इतना रोष था कि करीब 4,000 पुलिसकर्मियों को वहां शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात करना पड़ा. पुलिस का कहना है कि जर्मन एकीकरण के बाद ये अब तक की सबसे बड़ी तैनाती थी. एकीकरण के पहले लाइपजिग शहर नागरिक विद्रोह का एक बड़ा गढ़ था जिसके परिणामस्वरूप 1989 में पूर्वी जर्मनी के कम्युनिस्ट शासन का खात्मा हुआ था.

बाखमान को इस्लामिक गुटों से मिली जान की धमकी के कारण ही हर सोमवार को ड्रेसडेन में होने वाली पेगिडा रैली इस बार रद्द कर दी गई थी. बाखमान को पुलिस संरक्षणदिया जा रहा है. खुद को लेगिडा कहने वाली पेगिडा की लाइपजिग शाखा ने रैली पर लगाए गए कुछ प्रतिबंधों के विरूद्ध शिकायत दर्ज कराई थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया. जर्मनी के राष्ट्रपति योआखिम गाउक ने हाल ही में समाज में बढ़ रहे विभाजन पर चिंता जताई थी. पेरिस में जनवरी के आतंकी हमलों के बाद स्थिति और खराब हुई है. बर्लिन में दिए अपने संदेश में गाउक ने कहा, "समाज का ध्रुवीकरण करने के ये प्रयास, हमारे देश को स्थायित्व, स्पष्ट रवैया और लोगों में आपसी भरोसा बनाए रखने की तमाम कोशिशों के आड़े आ रहे हैं."

आरआर/एमजे(डीपीए)