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दुनिया

हिंसा में डूबा नवाज का पहला महीना

पाकिस्तान में नई सरकार बनने के एक महीने के भीतर संदिग्ध इस्लामी उग्रवादियों ने कम से कम 160 लोगों की हत्या कर दी है. हिंसक चरमपंथ पर काबू पाने के लिए कारगर रणनीति की कमी आशंकाएं उठा रही है.

मई चुनावों में शानदार जीत के साथ सत्ता में आई पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन ने बीते सालों में हजारों लोगों की जान लेने वाले तालिबान चरमपंथियों के साथ शांतिवार्ता को ही आधार बनाया था. मई के आखिर में अमेरिकी ड्रोन हमले में एक बड़े तालिबानी नेता की मौत के बाद तालिबान ने बातचीत का प्रस्ताव वापस ले लिया और सरकार की योजना ध्वस्त हो गई. सरकार अभी वैकल्पिक रणनीति की तलाश में है और इस बीच हमले जारी हैं.

पाकिस्तान में उग्रवाद के बढ़ने पर किताब लिखने वाले जाहिद हुसैन कहते हैं, "आतंकवाद की समस्या के बारे में सरकार पूरी तरह से उलझन में है. सरकार की दुविधा और अनिर्णय ने उग्रवादियों का हौसला बढ़ा दिया है." हुसैन और दूसरे जानकार मान रहे हैं कि सरकार पिछले महीने हुए हमलों का पर्याप्त रूप से आक्रामक जवाब देने में नाकाम रही है. सरकार की तरफ से इन हमलों पर बस प्रेस विज्ञप्तियां जारी होती रहीं जिनमें हिंसा की आलोचना और मरने वालों के लिए दुख जताया गया. इन विज्ञप्तियों में न तो हमला करने वालों का जिक्र था और न ही इस बात का कि सरकार उन्हें कैसे जवाब देगी.

मंगलवार को प्रधानमंत्री नवाज शरीफ दक्षिणी बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा गए. इलाके के अल्पसंख्यक शिया मुस्लिमों को कट्टरपंथी सुन्नी चरमपंथी लगातार निशाना बनाते रहते हैं. उनके साथ वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी और खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख भी थे. पत्रकारों से नवाज शरीफ ने कहा, "हम अपना पूरा ध्यान इलाके में कानून की अवमानना खत्म करने पर लगाएंगे, अब यह चाहे क्वेटा और बलूचिस्तान हो या देश के दूसरे हिस्से."

पिछले महीने एक हमले में 24 लोगों की जान जाने के बाद गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान भी क्वेटा गए थे. खान ने उग्रवादियों के साथ बातचीत पर देश के समर्थन की बात दोहराई हालांकि उन्होंने हिंसा छोड़ने से इनकार करने वालों के साथ "दूसरे तरीकों से" निपटने की भी बात कही. नवाज शरीफ ने राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ 12 जुलाई को एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है जिसमें उग्रवाद पर लगाम कसने के लिेए रणनीति पर चर्चा की जाएगी. विश्लेषकों का कहना है कि शरीफ का क्वेटा जाना तो एक अच्छा कदम था लेकिन उन्होंने सरकार की सहमति बनाने की कोशिशों पर चेतावनी दी है.

पाकिस्तानी सेना के पूर्व जनरल तलत मसूद का कहना है कि इस्लामी पार्टियां उग्रवाद के लिए सीआईए के ड्रोन हमलों और पड़ोसी अफगानिस्तान में अमेरिकी युद्ध पर आरोप लगाएंगी. ऐसे में कोई कार्रवाई नहीं हो सकेगी. तलत मसूद ने कहा, "लोगों ने वोट दिया है, यह अच्छा है कि आप ज्यादा से ज्यादा राजनीतिक दलों को साथ ले कर चलना चाहते हैं लेकिन प्रमुख रूप से यह जिम्मेदारी आपकी है."

खुद को सही दिखाने की कोशिश में सरकार ने उग्रवाद से जरूरी मुद्दों को हल करने में अपनी मसरूफियत दिखाई है. बिजली की कमी का मुद्दा सरकार को जीत दिलाने वाले मुद्दों में शायद उग्रवाद से भी ऊपर है. बिजली जल्दी नही आई तो सरकार की आयु छोटी भी हो सकती है. सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ एक बेलआउट पैकेज पर समझौता किया है और संसद में नया बजट भी पेश कर दिया है.

हालांकि आलोचकों का कहना है कि उग्रवाद की समस्या को एक पल के लिए भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. कुछ आलोचक तालिबान के साथ बातचीत की कोशिशों से भी खुश नहीं हैं और उनका कहना है कि इतिहास में जब भी ऐसी कोशिश हुई तालिबान को खुद को मजबूत करने का मौका मिला. आलोचक सीधे सवाल उठाते हैं कि क्या सरकार को ऐसे उग्रवादियों के गुट से बात करना चाहिए जो पाकिस्तानी सरकार को हटा कर कट्टरपंथी इस्लामी कानून लागू करना चाहते हैं.

विश्लेषकों की राय है कि शरीफ सरकार उग्रवाद के खिलाप बड़ी कार्रवाई करने से इसलिए डर रही है कि कहीं उसके गढ़ जाने वाले पंजाब प्रांत में हमले न शुरू हो जाएं. फिलहाल वहां दूसरे इलाकों से कम हमले हुए हैं. नवाज शरीफ और उनकी सरकार के लिए कदम कदम पर चुनौतियां हैं और इनसे हल के तरीके बेहद सीमित.

एनआर/एमजी(एपी)

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