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फीडबैक

हिंदी कार्यक्रमों पर श्रोताओं की प्रतिक्रियाएं

इंसानी छेड़छाड़ से लहूलुहान होती धरती, नक्सली शिविरों में यौन शोषण और जर्मनी द्वारा सड़कों पर इलैक्ट्रिक कार लाने की योजना जैसे विषयों पर हाल ही में प्रसारित खोज, वेस्टवॉच तथा अंतरा कार्यक्रमों पर श्रोताओं की राय.

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डॉयचे वेले की हिंदी सेवा केवल एक रेडियो प्रसारण नहीं है, बल्कि भारत और जर्मनी के बीच दोस्ती की पहचान और सेतु भी है. मैंने जर्मनी के बारे में जो कुछ भी जाना है, वह केवल डॉयचे वेले के माध्यम से ही जाना. जर्मन लोग भारत के बारे में क्या सोच रहे हैं, जर्मन हम भारतीयों से कितना प्यार करते हैं, यह सब कुछ डॉयचे वेले हिंदी सेवा के कार्यक्रमों से जानने को मिला है. हम जर्मनी को अपना सब से निकटतम दोस्त और भाई समझते हैं.

ईमेल: रवि शंकर तिवारी

खोज:

डॉयचे वेले के प्रोग्राम मुझे बहुत अच्छे लगते हैं. मैं नियमित रूप से आपके कार्यक्रम शॉर्ट वेव पर सुनता हूं. आपका "खोज" कार्यक्रम मुझे बहुत अच्छा लगता है. मैं 12वी कक्षा का साइंस का छात्र हूं और इसलिए मुझे इसका लाभ पहुंचता है. ऐसे ही कार्यक्रम प्रसारित कीजिए, हमें आपसे काफी उम्मीदें हैं.

शांताराम उतावले, जिला अहमदनगर

खोज के ताज़ातरीन अंक में इंसान की छेड़छाड़ से लहूलुहान होती धरती सुना. लेख ने मन को झकझोर कर रख दिया. बहुत अच्छा हो यदि आप पर्यावरण जागरुकता पर स्थाई स्तम्भ के जरिए प्रकाश डालें. इससे सबको फायदा होगा. आपकी जानकारियां बड़ी सटीक और मन को छू जाने वाली होती हैं.
प्रमोद माहेश्वरी, शेखावाटी लिस्नर्स क्लब, फतेहपुर, शेखावटी

वेस्ट वॉच:

अगले 10 साल में 10 लाख बिजली चालित कारें सड़कों पर लाने की जर्मनी की महत्वकांक्षी योजना के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त हुई. पेट्रोल की बर्बादी को रोकने तथा प्रदूषण नियंत्रण के दृष्टिकोण से जर्मनी का यह कदम अत्यंत सराहनीय एवं स्वागत योग्य है. इस योजना से जर्मनी ही नहीं, समूचे विश्व के औटोमोबाइल उद्योग में एक नई क्रांति पैदा होगी. योजना के सफल होने पर पूरा विश्व जर्मनी का अनुसरण करेगा. वे दिन दूर नहीं जब सर्वोत्तम गाड़ियां बनाने वाले जर्मनी को सर्वोतम बिजली चालित गाड़ियों के निर्माण के लिए भी जाना जाएगा. इस योजना में ध्यान देने वाली सिर्फ एक बात है कि बिजली चालित कारों के निर्माण में मानव के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़

Deutschland Autoindustrie Stellen Autohändler in Bremen

नहीं होना चाहिए और पर्यावरण की सुरक्षा को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.

अतुल कुमार, राजबाग रेडियो लिस्नर्स क्लब, सीतामढ़ी, बिहार

2020 तक 10 लाख इलेक्ट्रिक कारें सड़कों पर लाने की जर्मनी की महत्वाकांक्षी योजना के बारे में काफी महत्वपूर्ण जानकारी आपके कार्यक्रम में सुनने को मिली. पेट्रोल का अच्छा विकल्प, गंध नहीं, आवाज नहीं, यह सब बातें सुनकर तो ऐसा लग रहा है कि पर्यावरण हानि रुकवाने के लिए जल्द से जल्द ऐसी कारें, बसें, और ट्रक आदि जितनी भी मोटर गाड़ियां हों, सभी को इलेक्ट्रिक रूप में लाना जरुरी है. स्वच्छ पर्यावरण के लिए यह बहुत ही अच्छा क़दम साबित होगा.
संदीप जवाले, मार्कोनी डी एक्स क्लब, पारली वैजनाथ, महाराष्ट्र

आज पहली बार ही वेस्ट वाच को सुना. ये कार्यक्रम इतना अधिक पसंद आया कि मैं बता नहीं सकता. दस वर्ष बाद जर्मनी में दस लाख बिजली चालित कारों के उपयोग की महत्वाकांक्षी योजना के बारे में जानना अच्छा लगा. आज भारत में ऐसी कल्पना करना भी दुरूह है. इस प्रस्तुति में इस बिंदु से जुडी बहुत सारी बातें पता चलीं. चीन इस प्रयोग में भी हाथ आजमा रहा है जानकर सुखद आश्चर्य हुआ. भविष्य के लिए ऐसी ही योजनाओं की जरूरत है ताकि ये धरती बच सके. बहुत बहुत शुभकामनाएं जर्मनी को और ऐसी नीतियां बनाने वालों को. आज दिल को छू गई ये रिपोर्ट.

अजय कुमार झा, नई दिल्ली

अंतरा:

विश्व भर में प्रचलन में आई ऐंटी प्रेग्नेंसी पिल्स के इस्तेमाल पर प्रस्तुत रिपोर्ट सामयिक और सार्थक लगी. सबसे अच्छी बात ये रही कि आपने इस से जुडी भ्रांतियां और इसके दोनों ही पहलुओं पर बिल्कुल विश्लेषित विचार प्रस्तुत किए. हालांकि भारत में अब ये प्रचलन में आ तो गई है किंतु सिर्फ़ महानगरीय समाज में. ग्रामीण समाज अब भी इससे अछूता है. दूसरी बात ये कि भारत में अभी ये औषधियां महंगीं हैं. हाल ही में चर्चित निरुपमा हत्याकांड के कारण ये प्रस्तुति और भी महत्वपूर्ण बन गई.

आपके द्वारा प्रस्तुत विशेष कार्यक्रमों में अंतरा का एक विशिष्ट स्थान रहा है. ऐसा शायद इसलिए भी है क्योंकि किसी भी समकालीन प्रसारण सेवा में नारी को समर्पित इस तरह का कोई कार्यक्रम नहीं है अभी 13 मई को प्रस्तुत अंतरा में नक्सली आंदोलन से जुडी महिलाओं की दशा पर प्रस्तुत रिपोर्ट ने तो चौंका कर रख दिया. अपने ही नक्सली साथियों द्वारा शोषित होते रहने के कारण इनकी स्थिति वहां भी दयनीय होती है. ऐसे खुलासे ने नक्सली आंदोलन के उद्देश्य पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं. प्रस्तुति बहुत ही प्रभावकारी लगी.

अजय कुमार झा, नई दिल्ली

Maoisten in Nepal verkünden Waffenstillstand

भारत के नक्सली आंदोलन में शामिल महिलाओं पर आधारित कार्यक्रम में नक्सली शिविरों में महिलाओं पर होने वाले अत्याचार, यौन शोषण और ज़बरन विवाह जैसे मुद्दों के बारे में सुनने को मिला. इन चीजों से तंग आकर लक्ष्मी, सविता, मुन्दा जैसी नक्सली आंदोलन छोड़ चुकी महिलाओं को और उनके अनुभवों सुनने के बाद नक्सलियों को जानाधार मिलना मुश्किल हो सकता है.

संदीप जावले, मारकोनी डीएक्स क्लब, पारली वैजनाथ, महाराष्ट्र

पुरुष नक्सलियों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलने वाली महिला नक्सलियों की दुखभरी दास्तान संवेदनशील एवं भावोत्पादक लगी. महिला नक्सलियों का शारीरिक शोषण जैसी करगुजरियां दर्शाती हैं कि नक्सलियों की नीति एवं लक्ष्य क्या है? सचमुच यह महिला नक्सलियों की कारुणिक स्थिति को चित्रित करता है. शारीरिक शोषण होने के कारण नक्सली आदर्श से भरोसा उठना तथा मोह भंग होने के कारण महिला नक्सलियों का हथियार डालना वाजिब है जो इस समय चल रहे नक्सली अभियान की पोल खोलता है. पुरुष नक्सली अपनी महिला सहकर्मी का शारीरिक शोषण कर किस उद्देश्य की प्राप्ति करना चाहता है. नक्सल पंथ की आड़ में यह घिनौना कुकृत्य मानवता के नाम पर एक बदनुमा धब्बा है जिसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है.

अतुल कुमार, राजबाग रेडियो लिस्नर्स क्लब, सीतामढ़ी, बिहार