′हासन, रुश्दी का विरोध चिंताजनक′ | दुनिया | DW | 01.02.2013
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दुनिया

'हासन, रुश्दी का विरोध चिंताजनक'

अभिनेता राहुल बोस मानते हैं कि सलमान रुश्दी की मिडनाइट्स चिल्ड्रन और कमल हासन की फिल्म विश्वरूपम का विरोध चिंताजनक और देश में बढ़ती धार्मिक असहिष्णुता का प्रतीक है.

कोलकाता पुस्तक मेले के तहत आयोजित साहित्य सम्मेलन में आए बोस कहते हैं कि इसके पीछे कुछ निहित स्वार्थ वाली ताकतें काम कर रही हैं. वह सरकार को भी इसके लिए जिम्मेवार ठहराते हैं. ध्यान रहे कि बोस ने मिडनाइट्स चिल्ड्रनपर बनी दीपा मेहता की फिल्म के अलावा विश्वरूपम में भी काम किया है.

बोस कहते हैं कि सलमान के कोलकाता दौरे से उपजे ताजे विवाद से वह बेहद परेशान हैं. रुश्दी को अपने उपन्यास पर बनी फिल्म के प्रमोशन के लिए यहां आना था. लेकिन कुछ अल्पसंख्यक संगठनों के विरोध प्रदर्शन की वजह से आखिरी मौके पर उनका दौरा रद्द हो गया. क्या इस विवाद से आप निराश हैं. इस सवाल पर राहुल कहते हैं, “मुझे नहीं लगता कि कोलकाता के तमाम लोग रुश्दी के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल थे. मैं नहीं जानता कि ऐसे निहित स्वार्थी तत्व कौन हैं. लेकिन इस विवाद के पीछे ऐसी ताकतों का ही हाथ है.“ दीपा मेहता की फिल्म में जनरल जुल्फिकार का 11 मिनट का किरदार निभाने वाले इस अभिनेता को लगता है कि दो दशक पुराने विवाद को लगातार बनाए रखने का कोई तुक नहीं है. लेकिन आखिर रुश्दी ने कोलकाता दौरा रद्द क्यों किया? इस पर बोस कहते हैं, “इस मामले में कई बातें कहीं जा रही हैं. लेकिन किस पर विश्वास करूं और किस पर नहीं, यह समझना मुश्किल है.“

Rahul Bose, In My Name

राहुल बोस के साथ डॉयचे वेले की बातचीत

राहुल कमल हासन की बहुचर्चित और विवादित फिल्म विश्वरूपम पर लगी पाबंदी से भी आहत हैं. वह कहते हैं, “मुझे नहीं लगता है कि फिल्म में ऐसा कुछ आपत्तिजनक है जिसकी वजह से उस पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए.“ राहुल कहते हैं कि सरकार को हर विवादास्पद फिल्म देखनी चाहिए. अगर उसे यह असंवैधानिक लगता है तो दोषियों को सजा देनी चाहिए. अगर नहीं तो फिर सरकार को फिल्म और उसके निर्माताओं का बचाव करना चाहिए.विश्वरूपम में विलेन का किरदार निभाने वाले यह अभिनेता उन दावों को निराधार बताते हैं कि फिल्म में अल्पसंख्यकों की खराब छवि का चित्रण किया गया है.वह कहते हैं कि सरकार और पुलिस अगर चाहे तो विरोध के नाम पर होने वाले ऐसे सांस्कृतिक उग्रवाद पर अंकुश लगा सकती है. बोस कहते हैं, ‘आखिर सेंसर बोर्ड ने उस फिल्म को पास कर दिया है. पुलिस का कहना है कि वह इस फिल्म को दिखाने का पूरा प्रयास कर रही है. लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है. कानून वव्यवस्था के नाम पर फिल्म का प्रदर्शन रोक दिया गया है.'

विश्वरूपम में कुरान के अपमान संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए राहुल कहते हैं कि इससे बड़ी मूर्खतापूर्ण दलील नहीं हो सकती. वह सवाल करते हैं, “क्या मैं ऐसी किसी फिल्म में काम करूंगा जो जानबूझ कर धार्मिक हिंसा को उकसाती हो? “

मिडनाइट्स चिल्ड्रन में अपनी भूमिका का जिक्र करते हुए बोस कहते हैं, “यह भूमिका छोटी लेकिन बेहद चुनौतीपूर्ण थी. जनरल जुल्फिकार के बहुआयामी व्यक्तित्व को साकार करने में काफी मेहनत करनी पड़ी.“ राहुल को उम्मीद है कि दर्शक इस भूमिका में उनको पसंद करेंगे. विश्वरूपम में भी उन्होंने विलेन का किरदार निभाया है. वह कहते हैं, “लीक से हट कर होने वाले किरदारों को निभाने में उनको मजा आता है. करीब एक दशक बाद राहुल अब एक नई फिल्म के निर्देशन में भी हाथ आजमाने जा रहे हैं. दूसरी फिल्म के निर्देशन में एक दशक से भी लंबा समय क्यों लगा ? इस पर वह कहते हैं, ‘कोशिश तो कई साल से कर रहा था. लेकिन कभी मुझे पटकथा पसंद नहीं आई तो कभी निर्माताओं ने दिलचस्पी नहीं ली.“ अब मोहसिन हमीद के इसी नाम के उपन्यास पर आधारित मॉथ स्मोक जल्दी ही शुरूहोगी. राहुल ने इसके लिए अनुराग कश्यप से बात की है.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः आभा मोंढे

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