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दुनिया

हासन की फिल्म पर तमाशा

भारत के सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं में गिने जाने वाले कमल हासन की महत्वाकांक्षी फिल्म विश्वरूपम राजनीति की भेंट चढ़ गई. शानदार कैमरा वर्क और लीक से हट कर बनाई गई फिल्म पर अदालती ताला लगा. बॉलीवुड हासन के साथ पर नेता नहीं.

भारत की ओर से सबसे ज्यादा बार ऑस्कर में नामांकित होने वाले 58 साल के सितारा अभिनेता कमल हासन विश्वरूपम को लेकर बहुत उत्साहित थे. लेकिन रिलीज होने से पहले ही कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस पर एतराज जताया, जिसके बाद तमिलनाडु सरकार ने फिल्म पर पाबंदी लगा दी. मामला अदालत में गया और कोर्ट ने सरकार का साथ दिया, हासन सुप्रीम कोर्ट जाना चाहते थे लेकिन फिलहाल रुक गए हैं.

कभी खुद फिल्मों की हीरोइन रह चुकी तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता अपने फैसले पर सफाई देती हैं, "जब आपको पता है कि कुछ हिस्सों में हिंसा हो सकती है, तो यह सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह ऐसा होने से रोके." उनका तर्क है कि राज्य के पास इतनी पुलिस नहीं है कि हर सिनेमाघर के बाहर उन्हें तैनात किया जाए.

जासूस की कहानी पर आधारित विश्वरूपम में अफगानिस्तान और मुस्लिम जगत को दिखाया गया है. इसमें अमेरिका और अफगानिस्तान के रिश्तों को भी फिल्माया गया है. फिल्म करीब 100 करोड़ रुपये के बजट से बनी है और तकनीकी रूप से सराही जा रही है. हासन का कहना है कि तमिल में फिल्म न रिलीज होने के बाद उन्हें 60-70 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है.

कुछ लोगों का विरोध

कुछ मुस्लिम संगठनों का दावा है कि फिल्म में ऐसे दृश्य हैं, जिनसे मुसलमानों की छवि को नुकसान पहुंचता है. हालांकि हासन ने उनके साथ बातचीत करने और कुछ दृश्यों को हटाने तक का प्रस्ताव दिया था लेकिन इन सबके बाद भी फिल्म पर पाबंदी लगा दी गई. जयललिता का कहना है, "अगर कमल हासन और मुस्लिम संगठन आपस में बैठ कर बात करें और एक समझौते पर सहमत हों, तो राज्य सरकार भी सहमत है." तमिलनाडु का मुस्लिम वर्ग आम तौर पर जयललिता के विरोधी डीएमके पार्टी का समर्थन करता है और राजनीतिक पंडितों का कहना है कि लोकसभा चुनाव से पहले जयललिता मुस्लिम वोटरों से सहानुभूति पाना चाहती हैं.

इन घटनाओं के बाद हासन ने बार बार कहा है कि मुस्लिम समुदाय को लेकर उनके दिल में बहुत इज्जत है और वे किसी की भी धार्मिक भावना भड़काना नहीं चाहते हैं. उन्होंने कहा है कि कुरान का जिक्र करने वाले कुछ दृश्य वह हटा सकते हैं.

Kamal Haasan Vishwaroopam

कमल हासन की फिल्म विवादों में

कमाल के कमल

तमिल अदाकार कमल हासन अपनी भूमिकाओं और कलात्मक और तकनीकी पक्ष के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं. हॉलीवुड की गॉडफादर पर बनी उनकी फिल्म नायगन को टाइम पत्रिका ने पिछली सदी की सर्वश्रेष्ठ बनी फिल्मों में जगह दी थी. किरदार के अनुसार छोटे बड़े, मोटे पतले, काले गोरे और कभी गंजे तो कभी लंबे बाल वाले बनते हासन ने हिन्दी फिल्मों में एक दूजे के लिए के साथ कदम रखा था, जो जबरदस्त हिट थी. प्रयोगधर्मी फिल्मकार हासन की 2000 में बनी फिल्म हे राम भी काफी चर्चा में रही थी.

विश्वरूपम के समर्थन में फिल्मी सितारे भी आ गए हैं. सलमान खान का कहना है कि लोगों को भी हासन का साथ देना चाहिए. उन्होंने ट्वीट किया, "लोगों को सिनेमाहॉल के बाहर खड़े हो जाना चाहिए और जिद करनी चाहिए कि उन्हें यह फिल्म देखनी है." शाहरुख खान और महेश भट्ट जैसे सितारे भी हासन का साथ दे चुके हैं.

सेंसर पर सवाल

भारत में कोई भी फिल्म सेंसर बोर्ड से पास होने के बाद ही सिनेमाघरों में लगती है. लेकिन अलग अलग राज्य अपनी सुविधा और राजनीति को देखते हुए कानून व्यवस्था का हवाला देते हैं और फिल्मों पर रोक लगाने का फैसला करते हैं. भारत के केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी का कहना है, "हमें सिनेमाटोग्राफ कानून को लेकर गंभीर होने की जरूरत है. अगर ऐसा नहीं हुआ तो हर राज्य का अपना सेंसर बोर्ड बनने लगेगा."

हासन ने इन सबके बीच एक बार तो जज्बाती होकर कह दिया कि वह भारत छोड़ कर ऐसी जगह जा बसना चाहते हैं, जो वाकई धर्मनिरपेक्ष हो. लेकिन समझदारी दिखाते हुए वह फौरन मुस्लिम संगठनों से बातचीत करने और उनके एतराज वाले दृश्यों को हटाने पर भी राजी हो गए. पहले वह सुप्रीम कोर्ट जाना चाहते थे लेकिन फिलहाल उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार करने का निर्णय किया है और वह अगला फैसला छह फरवरी के बाद लेंगे. उनका कहना है, "मैं दुखी लेकिन शांत हूं." फिल्म हिन्दी में भी आ रही है.

मुस्लिम जगत में अन्याय और सामाजिक कुरीतियों को लेकर फिल्में बनाना कोई नई बात नहीं. पाकिस्तानी फिल्मकार शोएब मंसूर की खुदा के लिए ऐसी ही एक मिसाल है, जो पूरी दुनिया और भारत में जबरदस्त हिट रही है.

रिपोर्टः अनवर जे अशरफ (एएफपी)

संपादनः आभा मोंढे