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दुनिया

हार के बाद ब्राजील में हिंसा

सेमीफाइनल में जर्मनी से इतनी शर्मनाक हार के लिए ब्राजील के फैन्स तैयार नहीं थे. हार से हताश भीड़ सड़कों पर हिंसात्मक रूप में उतर आई. स्थानीय मीडिया के मुताबिक साओ पाउलो में भड़के फैन्स ने 23 बसों को आग लगा दी.

ब्राजील के फुटबॉल प्रेमी भले इस भावना के साथ स्टेडियम आए हों कि मैच में हार जीत तो लगी रहती है, लेकिन वह हार इतनी शर्मिंदगी भरी होगी ये किसी ने नहीं सोचा था. सेमीफाइनल मुकाबले में जर्मनी ने ब्राजील को 7-1 से हरा दिया. न्यूज पोर्टल यूओएल के मुताबिक जिन 23 बसों को आग लगाई गई, उनमें से 20 परिवहन विभाग के एक डिपो पर मरम्मत के लिए खड़ी थीं. इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है.

हार से झल्लाई भीड़ ने दो कारों को भी आग लगा दी और एक इलेक्ट्रिक दुकान में तोड़फोड़ हुई. दंगे भड़काने के लिए कुल छह लोगों को हिरासत में लिया गया, इनमें से चार नाबालिग हैं.

हार को झाड़ दो

सेमीफइनल में जर्मनी से मिली मात ने टीम के साथ साथ फैन्स को भी हिला कर रख दिया. पूरे स्टेडियम में मैच के दौरान ही एक अजीब सा अवसाद भरा माहौल था. लोग पहले हाफ से ही सीटें छोड़ छोड़ कर जाने लगे, तब तक जर्मनी पांच गोल कर चुका था.

ब्राजील की राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ ने ट्वीट किया, "सभी ब्राजीलियाई इस हार से बहुत ज्यादा दुखी हैं. मुझे हम सभी के लिए, फैन्स के लिए और खिलाड़ियों के लिए भी बेहद अफसोस है." उन्होंने टीम और फैन्स का हौसला बढ़ाते हुए लिखा, "हम इससे टूटेंगे नहीं. ब्राजील हार को झाड़ कर खड़े हो जाओ."

शर्म का मुकाम

स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी इसे ब्राजील की ऐतिहासिक हार के रूप में लिखा गया है. साओ पाउलो के दैनिक डी साओ पाओलो ने लिखा कि यह ऐतिहासिक शर्मिंदगी की घड़ी है जब जर्मनी फुटबॉल के देश ब्राजील को सबक सिखा कर जाता है. जर्मनी की जीत को अखबार ने प्रभावशाली प्रबंधन, अनुशासन और सबसे ज्यादा दृढ़ निश्चय का फल बताया है.

खेल के अखबार लांस ने लिखा कि यह ब्राजील के फुटबॉल इतिहास में अब तक का सबसे शर्मनाक पल है. साथ ही अखबार लिखता है कि राष्ट्रीय टीम के फैन्स के लिए यह बहुत बड़ी प्रताड़ना है. मीडिया ने इसकी तुलना 1950 के उरुग्वे से हुए मुकाबले से भी किया है. ओ डिया ऑनलाइन ने लिखा है, "1950 का दर्द 2014 में दोहरा गया. अभी जख्म खुला है और इसे भरने में वक्त लगेगा."

एसएफ/एजेए (डीपीए)

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