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दुनिया

हाई हील पर फिलीपींस सरकार का फैसला

फिलीपींस सरकार ने महिलाओं के आराम का ख्याल रखते हुए कंपनियों के उस नियम पर प्रतिबंध लगाया है जिसके तहत काम के दौरान महिलाओं के लिए ऊंची हील के जूते पहनना अनिवार्य था. इस फैसले से देश की 10 लाख महिलाओं को राहत मिलेगी. 

स्वास्थ्य और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए फिलीपींस के श्रम विभाग ने यह फैसला किया है. चार महिलाओं ने श्रम विभाग में इस मसले पर शिकायत दर्ज करायी थी जिसके बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया है. विभाग ने इस मामले पर आदेश इस महीने की शुरूआत में जारी कर दिया था जिसे 29 सितंबर से लागू किया जाएगा. ट्रेड यूनियन से जुड़े एलन तनयुसे के मुताबिक, "यह फैसला महिलाओं को सेक्सिस्ट पॉलिसी और असुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों से मुक्त करता है." उन्होंने कहा कि यह निर्णय महिलाओं को अधिक स्वतंत्रता देगा और वह अधिक बेहतर ढंग से काम कर सकेंगी.

सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक, "कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के बाद फिलीपींस दुनिया का पहला ऐसा देश है जिसने इस मामले में देशव्यापी प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया है." ब्रिटिश कोलंबिया ने ऐसा ही एक आदेश अप्रैल में लागू किया था. इस अभियान को छेड़ने वालों का तर्क था कि महिला कर्मचारियों पर इस तरह के ड्रेस कोड और हाई हील्स जैसे नियम सेक्सिट और भेदभाव की नीति के तहत हैं. कार्यकर्ताओं का कहना है कि हाई हील्स पहनने से शरीर को नुकसान पहुंचता है. फिलीपींस सरकार ने अपने आदेश में कंपनियों से कहा है, "वे महिलाओं को आरामदायक जूते पहनने की इजाजत दें. इसके अतिरिक्त कोई भी कंपनी कर्मचारियों पर 1 इंच से ज्यादा हील पहनने के नियम नहीं बना सकती." 

इस आदेश में कहा गया है कि सेल्स गर्ल और गार्ड की नौकरी जैसे पेशों से जुड़ी महिलाओं को हाई हील्स पहनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और साथ ही स्वास्थ्य कारणों के चलते काम के दौरान उन्हें छोटे-छोटे ब्रेक लेने से नहीं रोका जा सकता." श्रम विभाग ने कहा है कि हील्स के साथ घंटों खड़े रहना ना सिर्फ शरीर में थकान पैदा करता है बल्कि रीढ़ की हड्डी और जोड़ों के दर्द जैसी समस्या भी पैदा करता है.

श्रम संगठन से जुड़े तनसुये कहते हैं कि देश भर में अब तक महिलाओं के लिए कार्यस्थल पर हाई हील्स पहनना अनिवार्य था खासकर, रिटेल, रेस्त्रां, एयरलाइंस और होटल क्षेत्र में. श्रम संगठन के मुताबिक, "इस आदेश से सेल्स असिस्टेंट के रूप में कार्यरत देश की तकरीबन 10 लाख महिलाओं को लाभ मिलेगा."

एए/एके (थॉमस रॉयटर्स फाउंडेशन)

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