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दुनिया

हाई वोल्टेज हाईवे बनाएगा जर्मनी

भारत बिजली की कमी से जूझ रहा है तो जर्मन सरकार की चुनौती लोगों को ग्रीन और किफायती बिजली मुहैया कराना है. जर्मन सरकार ने बिजली सप्लाई के लिए तीन हाई वोल्टेज लाइनें बनाने का फैसला लिया है.

कैबिनेट ने हाइ वोल्टेज लाइनें बनाने के लिए सरकारी प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है. परंपरागत रूप से बिजली वहां बनाई जाती थी, जहां उसकी जरूरत थी. लेकिन पवन ऊर्जा समुद्रतटीय इलाकों में पैदा हो रही है और सौर ऊर्जा सारे देश में बन रही है. पर्यावरण सम्मत ऊर्जा को जमा रखना या जरूरत वाले इलाकों में पहुंचाना हाई वोल्टेज लाइनों के बिना संभव नहीं है. नए इलेक्ट्रिक हाईवे देश के उत्तरी हिस्से में तैयार ऊर्जा को पश्चिम और दक्षिणी हिस्से तक ले जाएंगे.

जर्मनी में प्राकृतिक संपदा की कमी है, लेकिन वह अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए बिजली और ईंधन का आयात करता है. नवीन ऊर्जा को बढ़ावा देकर वह ऊर्जा सुरक्षा हासिल कर रहा है. जापान में परमाणु बिजली घर में हुए हादसे के बाद जर्मन सरकार ने परमाणु बिजली घरों को बंद करने का फैसला लिया है. उसके बाद बिजली को सस्ता रखने के लिए नवीन ऊर्जा को बढ़ावा देना और बिजली का किफायती इस्तेमाल जरूरी हो गया है.

जर्मनी में जाड़ों में घरों को गर्म रखने और पानी गर्म करने में बहुत बिजली की खपत होती है. पिछले साल जर्मनी में 31 फीसदी ऊर्जा घरों को गर्म-ठंडा रखने तथा गर्म पानी पर खर्च हुई. घरों के बेहतर आइसोलेशन के जरिए यहां भारी बचत की जा सकती है. देश के 65 फीसदी घर पुराने हैं, जो बाहर से आने वाली ठंड या गर्मी को ठीक से रोकने की हालत में नहीं हैं. 60 फीसदी खिड़कियां ठीक से आइसोलेटेड नहीं हैं कि वे ठंड को रोक सकें. पर्यावरण विशेषज्ञ पौने दो करोड़ घरों में कुछ किए जाने की जरूरत बता रहे हैं.

इस समय एक प्रतिशत घरों को ऊर्जा की खपत बचाने लायक बनाया जा रहा है. इसे बढ़ाकर दो प्रतिशत करने और घरों के आइसोलेशन को बेहतर किए जाने पर सरकार ने अगले आठ सालों में 2.4 अरब यूरो की सबसिडी देना तय किया है. इसके अलावा सरकारी केएफडब्ल्यू बैंक पहले से ही घरों को सुधारने के लिए सस्ती दर पर हर साल डेढ़ अरब यूरो का कर्ज दे रहा है. अगले साल से दरवाजों और खिलड़ियों को बदलने, घरों की बाहरी दीवारों को आइसोलेट करने और हीटिंग तकनीक बदलने के लिए 1.8 अरब यूरो की राशि बाजार में आएगी.

इससे पर्यावरण की हालत तो सुधरती ही है, इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है. हर यूरो सरकारी सब्सिडी का मतलब 12 यूरो का निवेश होता है, जिसका लाभ घरों की मरम्मत करने वाली कंपनियों के अलावा आधुनिक हीटिंग और कूलिंग तकनीक लगाने वाले कारीगरों को भी मिलता है. घरों को आधुनिक तकनीकी स्तर पर लाने के लिए 2006 से चल रहे कार्यक्रम के कारण हर साल 60 लाख टन कार्बन डाय ऑक्साइड की बचत हो रही है.

एमजे/ओएसजे (एएफपी, डीपीए)

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