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विज्ञान

हर क्षण मौजूद है बिजली की धुंध

हवा की तरह वह भी अदृश्य है. महसूस भी नहीं होती. तब भी हर क्षण, हर जगह हम उससे घिरे रहते हैं. विद्युतचुंबकीय धुंध (इलेक्ट्रोस्मॉग) से बचना संभव नहीं. स्वास्थ्य के लिए उसके हानिकारक प्रभाव बहस का विषय ज़रूर हैं.

आप एक ऐसे रेलवे स्टेशन पर खड़े हैं, जहां बिजली से चलने वाली गाड़ियां आती-जाती हैं. आपके कान लाउडस्पीकर पर हो रही घोषणा पर लगे हैं.

एक क्षण के लिए भी आप नहीं सोचते कि आप लोगों की भीड़-भाड़ ही नहीं, 15000 वोल्ट और 1400 एम्पियर बिजली-प्रवाह वाले ओवरहेड केबल की धुंध में खड़े हैं. गाड़ी में घंटों इस केबल के ठीक नीचे बैठे होते हैं. ट्रेनें, ट्रामें और उनके स्टेशन हमारे दैनिक जीवन की ऐसी जगहें हैं, जहां हम विद्युतचुंबकीय क्षेत्र से सबसे अधिक घिरे होते हैं, जर्मनी में हनोवर के इकोलॉग इंस्टीट्यूट के डॉ. होर्स्ट-पेटर नाइत्स्के कहते हैं, "ट्रेन में ओवरहेड केबल और पटरियों के बीच विद्युतचुंबकीय क्षेत्र काफ़ी ज़बर्दस्त होता है."

हर जगह इलेक्ट्रोस्मॉग

रेलवे के ओवरहेड केबल से भी तीन गुना तेज़, यानी 50 हेर्त्स फ्रीक्वेंसी, और चार लाख वोल्ट एसी करंट वाले वे केबल और अधिक शक्तिशाली विद्युतचुंबकीय क्षेत्र पैदा करते हैं, जो पारेषण, यानी ऊंचे-ऊंचे खंबो वाली ट्रांसमिशन लाइनों का काम करते हैं. यही बिजली ट्रांसफ़ॉर्मरों से होकर 230 वोल्ट और 50 हेर्त्स फ्रीक्वेंसी वाले करंट के रूप में हमारे घरों में पहुँचती है. घरों में क्या होता है? नाइत्सके बताते हैं, "घरों में हम वॉशिंग मशीन जैसे उपकरण चलाते हैं. वे भी किसी हद तक शक्तिशाली विद्युतचुंबकीय क्षेत्र पैदा करते हैं, पर उनकी पहुंच बहुत कम होती है और आम तौर पर हम उनके एकदम पास बैठे नहीं रहते. लेकिन, दाढ़ी बनाने की मशीन या बाल सुखाने वाले हेयर ड्रायर भी काफ़ी तगड़े क्षेत्र पैदा करते हैं और उन्हें हम अपने शरीर के एकदम पास भी रखते हैं. अच्छी बात इतनी ही है कि हम उन्हें बहुत देर तक नहीं चलाते."

कृत्रिम शब्द

जर्मनी के संघीय विकिरण सुरक्षा कार्यालय का काम है विद्युतचुंबकीय या रेडियोधर्मी विकरण पैदा करने वाली चीज़ों पर नज़र रखना, उनके लिए अहानिकर सीमाएं निर्धारित करना और स्वास्थ्य पर उनके प्रभावों का अध्ययन करना.

Handy Symbolbild Technik Handy und Elektrosmog

मोबाइल, हेयर ड्रायर सबसे पैदा होती है बिजली की धुंध

इस कार्यलय की अने डेहाउस कहती हैं, "इलेक्ट्रोस्मॉग एक बनावटी शब्द है. हमारे आस-पास के वातावरण में जो विद्युतचुंबकीय क्षेत्र होतें हैं, उन्हें स्मॉग कहा जाने लगा है, क्योंकि वे हर जगह होते हैं, पर दिखायी नहीं पड़ते. वह अंग्रेज़ी स्मॉक और फ़ॉग शब्दों के मेल से बना है. विद्युतचुंबकीय क्षेत्र के चरित्र के साथ उसका मेल तो नहीं बैठता, पर अब यह शब्द चल पड़ा है और उसी का इस्तेमाल होने लगा है."

चुंबकीय धुंध बढ़ रही है

बिजली से चलने वाली हर चीज़-- चाहे वह रेडियो हो, टेलीविज़न हो, टेलीफ़ोन हो, बत्ती का बल्ब हो या कुछ भी हो-- कुछ-न-कुछ विद्युतचुंबकीय क्षेत्र अवश्य पैदा करती है. अधिकतर उपकरणों में 50 हेर्त्स तक की फ्रीक्वेंसी वाली विद्युत तरंगों का उपयोग होता है. इस फ्रीक्वेंसी के बाद शुरू होती हैं वे रेडियो फ्रीक्वेंसियां, जो लांग, मिडल, शार्ट और अल्ट्राशॉर्ट वेव के नामों से जानी जाती हैं. उनके ट्रांसमिटर तेज़ी से बढ़ रहे हैं. वे मेगाहेर्त्स बैंड की विद्युतचुंबकीय तरंगें पैदा करते हैं. एक मेगाहेर्त्स का अर्थ है तरंगों में प्रतिसेकंड 10 लाख आरोह-अवरोह.

मोबाइल दूरसंचार चिंता का कारण

अल्ट्रा शॉर्टवेव के बाद 900 मेगाहेर्त्स के साथ मोबाइल टेलीफ़ोन की फ्रीक्वेंसियां शुरू होती हैं. हज़ारों इमारतों की छतों पर लगे मोबाइल फ़ोन वाले न केवल ट्रांसमिटर ही, बल्कि हमारे हाथ का मोबाइल फ़ोन भी इसी उच्च फ्रेक्वेंसी वाली तरंगें पैदा करता है. जर्मनी में ब्राउनश्वाइग तकनीकी विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंस्टीट्यूट के प्रो. आख़िम एंडर्स इसे किंचित चिंता के साथ देखते हैं. "यूटीएमएस के लिए दो गीगाहेर्त्स का उपयोग होने लगा है. वायरलैस का भी एक ऐसा बैंड है, जिसके बिल्कुल पास 2.45 गीगाहेर्त्स पर खाना गरम करने की घरेलू माइक्रोवेव ओवन भी काम करती है .वायरलैस के लिए इस बीच एक दूसरा बैंड भी बन गया है, जिसके लिए अब तक की अपेक्षा दुगुनी, यानी पांच गीगाहेर्स से कुछ अधिक की फ्रीक्वेंसी का उपयोग होता है. यह सब अब घर-घर में हो रहा है."

यूटीएमएस का अर्थ है यूनिवर्सल मोबाइल टेलीकम्यूनिकेशन्स सिस्टम और वायरलैस का अर्थ है कंप्यूटर इत्यादि के लिए वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क. हवाई अड्डों के राडार यंत्र और यातायात पुलिस के राडार कैमरे जिस फ्रीक्वेंसी का उपयोग करते हैं, वे भी घरेलू माइक्रोवेव जैसे विद्युतचुंबकीय क्षेत्र पैदा करती हैं. यानी, इलेक्ट्रोस्मॉग से कहीं छुटकारा नहीं है. एन्डर्स कहते हैं, "यहां तक कि सूर्य का प्रकाश भी विद्युतचुंबकीय तरंगों का ही एक रूप है और और आग से आने वाली आंच भी. ये ऐसी शाश्वत चीज़ें हैं, जो मनुष्य के अस्तित्व का आधार हैं."

दुष्प्रभावों के बारे में अनिश्चय

प्रश्न यह है कि क्या इस सबसे हमारे स्वास्थ्य को कोई नुकसान भी पहुंच रहा है? जर्मन विकिरण सुरक्षा कार्यालय की अने डेहाउस कहती हैं, "हमने जर्मन मोबाइल फ़ोन शोध कार्यक्रम के अधीन कई तरह के प्रभावों की जांच करवाई. तबीयत नरम रहने, सिरदर्द और नींद न आने से लेकर कैंसर तक की शिकायतों की तह में गये. अब तक संसार भर में हुए दूसरे अध्ययनों में भी शारीरिक स्वास्थ्य के लिए कोई दुष्प्रभाव प्रमाणित नहीं हो सके हैं. लेकिन, इलेक्ट्रोस्मॉग के दीर्घकालिक प्रभावों और बच्चों पर उसके प्रभावों के बारे में अभी पर्याप्त जानकारी नहीं है."

रिपोर्टः राम यादव

संपादनः आभा मोंढे

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