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दुनिया

हर कीमत पर विकास नहीं चाहता चीन

चीन सिर्फ विकास के ऊंचे आंकड़े ही नहीं देखेगा, भविष्य में क्वालिटी पर भी ध्यान देगा. राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि चीन हर कीमत पर विकास नहीं चाहता. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की विकास दर ऊंची है ही.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बार फिर कहा कि वह विकास दर के बदले सुधारों पर ध्यान देना चाहते हैं. इंडोनेशिया की यात्रा के दौरान शी ने कहा, "हम अब गुणवत्ता और विकास की कुशलता पर ध्यान देना चाहते हैं." इसी तरह की घोषणा पहले प्रधानमंत्री ली केकियांग ने भी की थी. उन्होंने कहा था, "हमने फैसला किया है कि विकास को स्थिर किया जाएगा, संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे और बाकी सुधारों को आगे बढ़ाया जाएगा."

चीन की विकास दर फिलहाल दुनिया में सबसे ज्यादा है. इस साल विकास के मामले में चीन थोड़ा धीमा हुआ है लेकिन फिर भी दूसरी तिमाही में उसकी विकास दर साढ़े सात फीसदी और उससे पहले 7.7 प्रतिशत आंकी गई थी. 2013 के लिए चीन की सरकार ने साढ़े सात फीसदी की विकास दर बताई थी. शी ने कहा, "चीन सरकार को विश्वास है कि वह स्थिर और अच्छा आर्थिक विकास करेगी. 2012 में चीन की 7.7 फीसदी की विकास दर धीमी मानी जा रही थी. 1999 के बाद यह सबसे कम रही.

अमेरिका और यूरोप की शून्य के आसपास घूमती विकास दरों के बीच 7.5 और 7.6 प्रतिशत की विकास दर काफी ज्यादा है लेकिन चीन के लिए यह कम है. विश्लेषकों का कहना है कि चीन में जरूरी नौकरियों के विकास की समस्याओं से पार पाने के लिए कम से कम छह या सात फीसदी की विकास दर होनी जरूरी है.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग पहली बार दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों की यात्रा पर हैं. वह दक्षिण सागर से जुड़े विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहते हैं ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और शांति बनी रहे. उन्होंने कहा, "दक्षिण पूर्वी एशिया सामुद्रिक सिल्क रोड के लिए अहम जगह है. चीन आसियान देशों के साथ सामुद्रिक सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है. चीन आसियान में इंडोनेशिया की भूमिका को अहम समझता है और उसके साथ बाकी आसियान देशों के साथ मिल कर भी काम करना चाहता है.

विश्लेषकों का कहना है कि शी का भाषण वैसे तो आपसी रिश्ते सुधारने का पुट लिए था लेकिन उसमें नया कुछ नहीं था. दक्षिण सागर पर वियतनाम सहित कई देशों के साथ कड़वे अनुभवों के बाद इंडोनेशियाई संसद में शी का भाषण रिश्तों की बेहतरी में एक बड़ा कदम है.

इंडोनेशिया ने चीन के साथ कूटनीतिक संबंध 1960 के दौरान तोड़ दिए थे. उसका आरोप था कि तख्तापलट की कोशिश में चीन ने इंडोनेशिया की कम्युनिस्ट पार्टी की मदद की थी. दो दशक तक ठंडे रहे संबंध 1990 में जाकर बेहतर होने शुरू हुए.

चीन के राष्ट्रपति इंडोनेशिया के बाद मलेशिया जाएंगे और फिर एपेक फोरम में शामिल होने इंडोनेशियाई द्वीप बाली पहुंचेंगे.

एएम/एमजे (एएफपी,डीपीए)

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