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दुनिया

हमले से कुछ महीने दूर थे आतंकी!

कनाडा में अल कायदा के आतंकी लगातार हमलों से बस कुछ ही महीने दूर थे कि सुरक्षा एजेंसियों की उन पर निगाह पड़ गई. पिछले दो दिनों में तीन आतंकी गिरफ्तार हुए हैं. हमले की साजिश के तार पाकिस्तान, दुबई और ईरान से जुड़े हैं.

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30 वर्षीय हिवा मोहम्मद अलीजादेह, 26 वर्षीय मुसबाहुद्दीन अहमद और 28 वर्षीय खुर्रम सय्यद शेर को कनाडा पुलिस ने हमलों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया है. कहा जा रहा है कि मुसबाहुद्दीन अहमद भारत में जन्मा है. ये तीनों कनाडा में इम्प्रोवाइज डेटोनेटर से धमाके करने की तैयारी करने के साथ ही अफगानिस्तान में आतंकी गतिविधियों के लिए पैसे भी भेज रहे थे.

कनाडा पुलिस के चीफ सुपरिटेंडेंट सर्गे थेरियॉल्ट के मुताबिक करीब एक साल तक चली लंबी जांच के बाद इन तीनों को गिरफ्तार किया गया है. ये लोग ओटावा के अलावा पूरे देश में धमाके की साजिश रच रहे थे. पुलिस ने इन तीनों के पास 50 से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट बोर्ड भी बरामद किए हैं जिनका इस्तेमाल आईईडी के जरिए धमाका करने में होता है. इस तरह के बमों का इस्तेमाल अफगानिस्तान में भी आतंकवादी कर रहे हैं. इन तीनों के साथ काम करने वाले तीन और लोगों जेम्स लारा, रिजगर अलीजादेह और जकारिया ममोस्ता का भी पता चला है. अलीजादेह पर आतंकी मंसूबों के लिए विस्फोटक बनाने वाली चीजों को रखने और आतंकी गतिविधियों के लिए धन देने का आरोप है. मिसबाहुद्दीन अहमद को रहने के लिए किराए पर घर देने वाले एक पूर्व कनाडाई राजनयिक का कहना है कि उसका जन्म भारत में हुआ है. अहमद ओटावा की एक अस्पताल में एक्स रे टेक्निशियन के रूप में काम करता था. एक वेबसाइट पर घर का इश्तिहार देखकर उसने किराए के लिए फोन किया.

Der Blick aus meinem Fenster: Calgary, Canada - 300 - (Foto: Doris Fischer)

पूरे कनाडा में धमाके करना चाहते थे आतंकी

इस बीच अहमद के वकील सीन मे का कहना है कि वह सदमे की हालत में है. सीन ने पत्रकारों से कहा कि पुलिस ने उसके मुवक्किल पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं और वह बहुत चिंता में है. सय्यद शेर ने मैकग्रिल यूनिवर्सिटी से डॉक्टरी की पढ़ाई की है. फिलहाल वह लंदन के थॉमस एल्गिन जनरल हॉस्पिटल से पैथोलॉजी की पढ़ाई कर रहा है.

कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर का कहना है कि पश्चिमी देशों के लिए खतरा बने आतंकी नेटवर्क की पहुंच पूरी दुनिया में है. उन्होने कहा, "वे किसी दूर देश में नहीं रहते, बल्कि इंटरनेट के जरिए पूरी दुनिया से जुड़े हैं और इन लोगों ने हमारे देश में भी अपने लिंक बना लिए हैं."

रिपोर्टः एजेंसियां/ एन रंजन

संपादनः ए कुमार

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