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दुनिया

हमले से अफगानिस्तान अस्थिर

अफगानिस्तान के एक सैन्य शिविर में एक व्यक्ति ने विदेशी सैनिक अधिकारियों पर गोलियां चलाईं. घटना में नाटो का एक सैनिक अधिकारी मारा गया और 15 घायल हो गए जिनमें एक जर्मन ब्रिगेडियर भी शामिल है.

जर्मन सेना ने एक बयान में इस बात की पुष्टि की और कहा कि हमला काबुल के पश्चिम में कैंप करघा में हुआ. यहां अफगानिस्तान की सेना के लिए अफसरों को प्रशिक्षित किया जाता है. जर्मन सेना के बयान में कहा गया है कि ब्रिगेडियर जनरल का इलाज हो रहा था और उनकी जान को खतरा नहीं है. अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता जनरल जहीर आजमी ने ट्विटर पर लिखा कि अफगान सेना की वर्दी पहने एक आदमी ने सैन्य शिविर पर हमला किया लेकिन अफगानिस्तान सरकार की तरफ से अब तक कोई बयान नहीं आया है. करघा सैन्य शिविर में ब्रिटेन के अफसर सैन्य स्कूल और ट्रेनिंग प्रोग्राम की देखरेख करते हैं. ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय भी अब मामले की जांच कर रहा है.

हमले में एक अमेरिकी जनरल की मौत हो गई है. जर्मन सेना के अनुसार हमला तब हुआ जब मंगलवार सुबह आइसैफ के उच्च अधिकारी बैठक के लिए राजधानी काबुल के पश्चिम में स्थित करघा के ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे. एक अफगान सैनिक ने उन पर गोलियां चलाईं. अफगान रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार यह साफ नहीं है कि हमला किसी अफगान सैनिक ने किया या कोई बाहरी आदमी सेना की वर्दी में सेंटर में घुस आया था.

इस हमले से अफगानिस्तान की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ गए हैं. 2013 में अंदरूनी हमलों में कमी आई थी. यानि उन हमलों में, जिनमें आतंकी या तो खुद सैनिक थे या सैनिक की वर्दी पहनकर हमला कर रहे थे. 2013 में ऐसे 10 हमले हुए और 16 लोग मारे गए. 2012 में 38 ऐसे हमले हुए जिनमें 53 नाटो सैनिकों की मौत हुई. अकसर तालिबान ऐसे हमलों की जिम्मेदारी लेता है और अंतरराष्ट्रीय सैनिकों पर इस तर्क से दबाव डालने की कोशिश करता है कि उसके लोग सरकारी ढांचे के अंदर तक घुस चुके हैं.

लेकिन माना जाता है कि कई हमले बदले के तौर पर भी किए जाते हैं. अफगानिस्तान में अतंरराष्ट्रीय कर्मचारी और ठेकेदारों को लेकर गुस्सा बढ़ रहा है. इस साल के अंत तक अंतरराष्ट्रीय सैनिक भी अफगानिस्तान से निकलने वाले हैं और ऐसे में सुरक्षा कायम करना और भी मुश्किल हो रहा है और अफगान अधिकारी दबाव में आ रहे हैं. इसी दिन नाटो के एक हेलिकॉप्टर ने देश के पश्चिम पर मिसाइल हमला किया जिसमें चार आम लोग मारे गए.

आम लोगों की ऐसे हमलों में मौत भी एक विवादित मुद्दा बन गया है, खास तौर से इसलिए कि आम लोग आतंकियों और सेना, दोनों की कार्रवाई में सबसे ज्यादा खतरे में रहते हैं और मारे जाते हैं. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इस साल जनवरी से लेकर जून तक 1,564 आम लोगों की मौत हुई है. पिछले साल पहले छह मीनों में 1,342 लोग मारे गए थे.

एमजी/एजेए (एपी, रॉयटर्स)

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