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दुनिया

हनोवर में उद्योग मेला, भारत पार्टनर

भारत पर सबकी निगाहें हैं, उससे उम्मीदें हैं. रूस, ब्राजील और चीन में आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ चुकी है जबकि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत को रेस शुरू करनी है. तैयारी का खुलासा हनोवर मेले में होगा.

भारत इस साल दुनिया के सबसे बड़े औद्योगिक मेले में पार्टनर देश है. वह यहां पश्चिमी देशों से ज्यादा निवेश के लिए भरोसा पैदा करना चाहता है. प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया परियोजना के लिए साथी जुटाना चाहता है. जर्मनी में भारत के राजदूत विजय गोखले कहते हैं, "हम दिखाना चाहते हैं कि हमारी सरकार के पास सकारात्मक आर्थिक माहौल बनाने की क्षमता है." उन्होंने कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि प्रगति की राह पर हम जर्मनी के साथ चल सकते हैं.

मेले का उद्घाटन मेजबान और मेहमान सरकार प्रमुखों द्वारा संयुक्त रूप से किए जाने की परंपरा है. रविवार शाम को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल इस साल के मेले का उद्घाटन कर रहे हैं. जर्मनी 1.2 अरब की आबादी वाले भारत का यूरोप में सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है. दूसरी ओर जर्मनी के लिए भारत 25वें नंबर पर आता है. एक दशक तक द्विपक्षीय कारोबार में लगातार वृद्धि के बाद 2011 से भारत और जर्मनी का आपसी कारोबार लगातार घट रहा है. अब सारी उम्मीदें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुधारों पर टिकी हैं.

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने महात्वाकांक्षी आर्थिक नीति की घोषणा की. मेक इन इंडिया के तहत वे विदेशी निवेश आकर्षित करना चाहते हैं और देश के करोड़ों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना चाहते हैं. जर्मनी से एक मिसाल डाइम्लर की है जिसने पिछले सालों में चेन्नई के ट्रक कारखाने में 75 करोड़ यूरो का निवेश किया है. भारत में डाइम्लर ट्रक के प्रमुख एरिष नेसेलहाउफ कहते हैं, "व्यावहारिक रूप से ट्रक के सभी पुर्जे, मोटर भी भारतीय एसेशरी कंपनियों से आते हैं. इसमें कोई समस्या नहीं यदि आप पहले ही प्रोसेस और सप्लायर्स में निवेश करें." भारत में दिलचस्पी की एक वजह उसका बड़ा बाजार भी है. डाइम्लर के डाइरेक्टर वोल्फगांग बैर्नहार्ड कहते हैं, "हम समझते हैं कि भारत की आबादी और अर्थव्यवस्था और बढ़ेगी."

हनोवर मेले को दुनिया का सबसे अहम औद्योगिक मेला माना जाता है. इस बार का नारा है, इंटिग्रेटेड इंडस्ट्री, ज्वाइन द नेटवर्क. मेले में भविष्य का कारखाना दिखाया जा रहा है जिसमें मशीने एक दूसरे के साथ जुड़ी होंगी. स्मार्ट संयंत्रों और इंटेलिजेंट मशीनों को भाप इंजन, मास प्रोडक्शन और ऑटोमेशन के बाद चौथी औद्योगिक क्रांति इंडस्ट्री 4.0 कहा जा रहा है. 13 से 17 अप्रैल तक चलने वाले मेले में इस बार 70 देशों के 6,500 प्रदर्शक भाग ले रहे हैं. 2013 में 2लाख 17 हजार दर्शकों ने हनोवर औद्योगिक मेले के उत्पाद देखे थे. मेले के आयोजक इस बार भी इतने ही लोगों के आने की उम्मीद कर रहे हैं. भारतीय उद्यमों के पास इतने लोगों को अपनी संभावनाएं दिखाने का मौका होगा.

एमजे/ओएसजे (डीपीए)

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