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डीडब्ल्यू अड्डा

हथियारों की बढ़ती होड़ और उसके असर

जर्मन अखबारों में जहां एक तरफ दक्षिण एशिया में बढ़ती हथियारों की होड़ की चर्चा है, वहीं कुछ अखबार अब भी भारत के 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले और उसके संभावित प्रभावों पर लिख रहे हैं. तालिबान की भी चर्चा.

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भारत की ब्रह्मोस मिसाइल

दक्षिणी एशिया में पारंपरिक और परमाणु हथियारों की होड़ चल रही है. इसका असर ईरान और चीन पर भी पड़ रहा है. ज्यूरिख के नोए ज्युरिखर त्साइटुंग का कहना है कि जब अमेरिका और यूरोपीय संघ ईरान को राजनीतिक दबाव और कड़े प्रतिबंधों के साथ परमाणु बम बनाने से रोकना चाहते हैं, तो पाकिस्तान को पश्चिम से इस तरह की प्रतिक्रियाओं से डरने की जरूरत नहीं है.

वैसे इस्लामाबाद अभी से ज्यादा परमाणु हथियार पाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहा है. पाकिस्तान का प्रतिद्वंद्वी भारत भी अपने हथियारों का आधुनिकीकरण कर रहा है. उदाहरण के लिए परमाणु पनडुब्बियों के साथ. भारत और पाकिस्तान, दोनों ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. यदि हम ईरान के साथ, इस्राएल और भारत, इन तीन अनौपचारिक परमाणु शक्तियों को देखते हैं, तब मध्य सागर से लेकर हिमालाय तक हथियारों की होड़ देखने को मिलेगी. स्पष्ट रूप से हम कह सकते हैं कि यह दुनिया का सबसे खतरनाक क्षेत्र हैं, जिस के पूर्वी कोने में भारत और चीन भी एक दूसरे पर नजर रखे हुए हैं.

दागदार होता दामन

म्यूनिख से प्रकाशित जर्मनी के प्रमुख दैनिक ज्युड डॉयचे त्साइटुंग का कहना है कि भारत उफनने लगा है. एक तरफ देश में लगभग 9 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि हो रही है, तो दूसरी तरफ देश के भीतर राजनीतिक विवाद बढ़ रहे हैं. हाल ही में मोबाइल फोन लाइसेंसों को गैर कानूनी तरीके से बांटने के घोटाले की वजह से सरकार पर भी दबाव बढ़ रहा है क्योंकि उसने करीब 30 अरब यूरो यानी करीब 180 अरब रुपए खैरात बांट कर बर्बाद किए हैं.

NO FLASH Indien Pressekonferenz Singh

साफ सुथरी छवि को बचाने की चुनौती

अखबार का कहना है कि पहली बार एक ऐसे क्षेत्र पर आरोप लग रहे है जो आज तक आर्थिक जादू नगरी भारत में आदर्श क्षेत्र माना जा रहा था. आईटी और टेलीकम्यूनिकेशन के क्षेत्र की स्थापना 1990 के दशक में किए गए सुधारों के बाद हुई थी और अब उसी पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं. वैसे सिर्फ राजनीतिज्ञों का इस घोटाले में कसूर नहीं है. जिन कंपनियों ने पैसा दिया और जिन्होंने गैर कानूनी तरीके से लाइसेंस पाने के खेल में भाग लिया, उन्हें भी दोषी मानना जरूरी है. इस पूरे मामले से नुकसान बहुत हुआ है.

एक तरफ टैक्स के हवाले से कई अरब रुपयों का नुकसान हुआ है. दूसरी ओर पूरे देश और एक प्रतिष्ठित क्षेत्र की इज्जत को ठेस पहुंची है. लेकिन भारत को आर्थिक विकास के रास्ते पर लाने वाले एक विशेष व्यक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं जिन पर आज तक कभी भी किसी तरह के आरोप नहीं लगे थे. और वह हैं भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह. बात भारत के भीतर हो भारत से बाहर, हर कोई भारत के लोकतंत्र की प्रशंसा करता था. लोकतंत्र की वजह से ही बहुत सारे आर्थिक विशेषज्ञों की राय में चीन के मुकाबले भारत को लाभ मिलता रहा है है. लेकिन भारत के लोकतंत्र को भी आर्थिक मंदी के दौर में अपनी मजबूती साबित करनी होगी.

लीक से हट कर

भारत की मशहूर लेखिका और कार्यकर्ता अरुंधती रॉय की भारत में सार्वजनिक मंच पर वापसी हो रही है. यह मानना है बर्लिन के दैनिक टागेसत्साइटुंग का. अखबार का कहना है कि वह इसलिए लोकप्रिय है कि उन्होंने इस साल के बडे़ मुद्दों पर अपनी राय दी है और लोगों को उकसाया. इसकी वजह से अब उनके आलोचक भी उनकी इज्जत करने लगे हैं. और इसी की वजह से अब उनके खिलाफ कानूनी कदम भी उठाए जा रहे हैं.

अखबार का कहना है कि रॉय ने कई बार यह लिखा था कि माओवादी आतंकवादी नहीं हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कई माओवादी आदिवासी हैं और उनके पास अपनी संस्कृति की रक्षा करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं हैं. ऐसा कहने के कारण रॉय को अब अचानक कई नरम विचार वाले लोगों का भी समर्थन मिल रहा है. अब सरकार ने माओवादियों के कब्जे वाले इलाकों को सामाजिक और आर्थिक तौर पर सहायता देने का फैसला किया जबकि उसके पास अब तक सिर्फ सैनिक रणनीति थी. इस बदलाव के पीछे रॉय के भाषणों का भी असर हो सकता है क्योंकि वह उन विषायों को उठाती रही हैं जिन पर भारत में बात करने से जनमत हिचकता है.

Indien Kaschmir Demonstranten in Srinagar Flash-Galerie

उबलते कश्मीर में अरुंधती के बयान नई चिंगारी फूंकते हैं

रॉय का दूसरा बड़ा मु्द्दा है कश्मीर. वहां अप्रैल से मध्य पूर्व की तरह इंतिफादा से प्रेरणा लिए युवाओं का अभियान बढ़ रहा है. किसी ने उन बातों को कहने की हिम्मत नहीं की जिन बातों को रॉय ने कहने की हिम्मत की. उन्होंने कहा कि कश्मीर देश का एक ऐसा इलाका है जिसकी राष्ट्रीय सदस्यता विवादित है. उन्होंने यह भी कहा कि कश्मीरी ऐसी आजादी चाहते हैं

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