हथिनी को डायटिंग कराई | विज्ञान | DW | 13.06.2014
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विज्ञान

हथिनी को डायटिंग कराई

अमेरिका के एक चिड़ियाघर में गर्भवती हथिनी से वजन घटवाया जा रहा है. यह एशियाई हथिनी मोटापे की शिकार है और ज्यादा वजन के कारण इंसानों की तरह इसे भी बच्चे के जन्म में परेशानी आ सकती है.

आम तौर पर छरहरी काया पाने के लिए महिलाओं में डायटिंग का शौक लोकप्रिय रहा है. मगर अमेरिका के ह्यूस्टन शहर के एक चिड़ियाघर में टेस नाम की गर्भवती हथिनी को वजन घटाने के लिए डायटिंग और कसरत का सहारा लिया जा रहा है. चिड़ियाघर में जानवरों की देखभाल करने वालों को टेस से कसरत करवाने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. गर्भवती टेस का वजन इस समय करीब 3.5 टन है. यानि टेस फिलहास छह फीसदी ओवरवेट है. हथिनी का भार अभी जितना है उतना एक स्वस्थ गर्भवती हथिनी का बच्चे के जन्म के ठीक पहले होना चाहिए. टेस की एशियाई प्रजाति में हाथियों का औसत वजन पांच टन तक हो सकता है.

चिड़ियाघर के अधिकारियों को फिक्र है कि अगर टेस का वजन इससे बढ़ा तो उसे बच्चे के जन्म के समय बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. यही कारण है कि साल भर के अंदर बच्चे को जन्म देने वाली टेस से करीब 228 किलो वजन कम कराने की कोशिश हो रही है. ह्यूस्टन जू में बड़े स्तनधारियों के क्यूरेटर डेरिल हॉफमैन बताते हैं, "हमारे अभी से ऐसा करने का कारण है कि हम इस मामले में जल्दी करना चाहते हैं. आगे चल कर जैसे जैसे उसके बच्चा पैदा करने का समय पास आता जाएगा, वह हिलना डुलना और भी कम कर देगी और काफी कम सक्रिय रह जाएगी." टेस को कम कैलोरी वाला खाना दिया जा रहा है और साथ में तीन किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक हर रोज काफी तेज तेज टहलाया भी जाता है. इसके अलावा उसे पैरों का व्यायाम भी कराया जाता है जिससे मांसपेशियां मजबूत बनें.

बिल्कुल इंसानों की तरह

टेस के मामले की अगर इंसानों से तुलना करें, तो 90 किलो के एक शख्स को पांच किलो वजन घटाने जितना अनुपात है. अगर कोई महिला मां बनना चाहती है तो उसे भी वजन संतुलित रखने की सलाह दी जाती है. अधिक मोटी महिलाओं को गर्भ ठहरने में भी परेशानी होती है. अगर गर्भ ठहर भी जाए तो आगे चलकर गर्भावस्था के दौरान भी खतरा बना रहता है. अधिक वजन से महिलाओं को अकसर माहवारी में अनियमितता देखने को मिलती हैं.

हाल ही में मोटापे के बारे में बिल और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की प्रायोजित एक रिपोर्ट लांसेट जर्नल में प्रकाशित हुई. इसमें कहा गया कि इस वक्त दुनिया के करीब एक तिहाई लोग मोटे हैं और ऐसा कोई देश नहीं है जो पिछले तीन दशकों में मोटापे की दर को नियंत्रित कर सका हो. मध्य पूर्व देशों और उत्तरी अफ्रीका में मोटापा सबसे तेजी से फैला है. यहां करीब 60 पीसदी पुरुष और 65 फीसदी महिलाएं भारी भरकम हैं. दुनिया की कुल मोटे लोगों का 13 प्रतिशत अमेरिका में रहता है. चीन और भारत में 15 फीसदी.

आरआर/एजेए (रॉयटर्स, एपी)

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