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जर्मन चुनाव

हत्या के आरोपियों के कोर्ट मार्शल की तैयारी

श्रीनगर में भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने आम सुरक्षा बल अदालत बनाने का फैसला किया है ताकि इसी साल बिना वजह गोलीबारी में एक किशोर की हत्या के आरोपी अधिकारी और कॉन्स्टेबल पर मुकदमा चलाया जा सके.

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बीएसएफ के सूत्रों ने बताया कि इस अदालत का गठन मंगलवार या बुधवार को हो सकता है जिसमें कमांडेंट आरके बिरधी और कॉन्स्टेबल लखविंदर कुमार के कोर्ट मार्शल की कार्यवाही शुरू होगी. हालांकि यह मामला सिविल अदालत ने 25 नवंबर को ही सुरक्षा बल अदालत को सौंप दिया, लेकिन दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने से पहले कुछ औपचारिकताएं बाकी हैं.

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श्रीगनर के चीफ ज्यूडिशल मैजिस्ट्रेट यशपाल बर्नी ने बीएसएफ की इस याचिका को सही बताया कि इस साल फरवरी में जब श्रीनगर के निशात इलाके में 16 वर्षीय जाहिद फारूक की बिना वजह गोलीबारी में मौत हुई तो आरोपी कमांडेंट और कॉन्स्टेबल सक्रिय ड्यूटी पर थे. बर्नी ने अपना फैसला देते हुए कहा कि जम्मू कश्मीर समेत देश में अशांत इलाकों के बारे में केंद्र सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक इन सभी इलाकों में तैनात सुरक्षा बलों को सक्रिय ड्यूटी पर माना जाता है. जज ने कहा, "यह अधिसूचना तीन साल के लिए है और यह घटना इसी अवधि में हुई है. इस अदालत के पास मामले को आम सरक्षा बल अदालत को सौंपने के सिवा कोई रास्ता नहीं है."

फारूक की मौत 5 फरवरी को बीएसएफ की 68वीं बटालियन के सैनिकों की गोलीबारी में हुई, जिसके बाद घाटी में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और पांच दिन तक सब कुछ ठप रहा. हालांकि शुरू में इस लड़के की मौत को लेकर रहस्य बना रहा, लेकिन पुलिस और बीएसएफ की आंतरिक जांच में बिरधी और कुमार आरोपी के तौर पर सामने आए. कुमार को फरवरी में पुलिस को सौपा गया जबकि बिरदी ने मार्च में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया.

अप्रैल में बीएसएफ ने बीएसएफ अधिनियम के सेक्शन 80 के तहत यह कहते हुए मामले को आम सुरक्षा बल अदालत को सौंपने के लिए आवेदन किया कि जब यह घटना हुई तो आरोपी सक्रिय ड्यूटी पर थे. विशेष सरकारी वकील ने मामला ट्रांसफर किए जाने का यह कहते हुए विरोध किया कि बिना वजह गोलीबारी में किसी की मौत को सक्रिय ड्यूटी नहीं समझा जा सकता. बिरधी और कुमार को अदालत के आदेश के बाद पहले ही बीएसएफ की हिरासत में दिया जा चुका है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एन रंजन

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