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जर्मन चुनाव

हत्यारों के लिए मन में कटुता नहीं: ग्लैडीज स्टेंस

ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेंस की पत्नी ग्लैडीज स्टेंस का कहना है कि उनके मन में उन लोगों के लिए कोई कटुता नहीं हैं जिन्होंने दस साल पहले उनके पति और दो बेटों को उड़ीसा में जिंदा जला दिया था.

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स्टेंस की हत्या हिंदू उग्रता का नतीजा

59 वर्षीय ग्लैडीज ने समाचार एजेंसी पीटीआई को भेजे एक ईमेल में कहा, "मेरे मन में उन लोगों के लिए कोई कड़वाहट नहीं है जिन्होंने मेरे परिवार की हत्या की. मैंने उन्हें क्षमा कर दिया है." हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दोषी करार दिए गए दारा सिंह और महेंद्र हेम्ब्राम को मौत की सजा न देते हुए उन्हें दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा. सुप्रीम कोर्ट इसे दुर्लभतम मामला नहीं मानता.

ग्लैडीज ने अपने ईमेल में आगे लिखा है, "हिंसा और नफरत को रोकने के लिए क्षमा बहुत जरूरी है. ईश्वर भी माफ कर देता है लेकिन उस पाप के सांसारिक परिणाम जारी रहते हैं. क्षणा गलतियों के परिणामों को नहीं बदल सकती है. इन दोनों का आपस में घालमेल नहीं करना चाहिए. क्षमा का यह मतलब नहीं है कि भारत की सामान्य न्याय प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाना चाहिए."

2005 में पद्मश्री से सम्मानित की जाने वाली ग्लैडीज फिलहाल अपनी बेटी और पिता के साथ ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं. उनका कहना है कि वह जरूरतमंदों की मदद करती रहेंगी जो ग्राहम की भी इच्छा थी. 22 जनवरी 1999 में ग्राहम स्टेंस और उनके बेटों 10 वर्षीय फिलीप और 6 वर्षीय टिमोथी को उड़ीसा के क्योंझर जिले में दंगाई की भीड़ ने जिंदा जला दिया था.

उधर मामले में दोषी करार दिए गए दारा सिंह उर्फ रवींद्र पाल सिंह ने खुद को निर्दोष बताया है. क्योंझर जेल में बंद दारा सिंह ने कहा, "अगर यह (उम्र कैद) फैसला सुप्रीम कोर्ट का है तो मैं इसे स्वीकार करता हूं. मेरा जमीर कहता है कि मैं निर्दोष हूं. लेकिन मैं अदालत के आदेश का पालन करूंगा." जेल अधिकारियों ने दारा सिंह के हवाले से यह जानकारी दी.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एस गौड़

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