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दुनिया

हत्यारों की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी की हत्या में शामिल सात मुजरिमों को रिहा करने के तमिलनाडु सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इन मुजरिमों की रिहाई का विरोध किया है.

सर्वोच्च न्यायलय ने अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने को कहा है. इस मामले में अदालत 6 मार्च को अगली सुनवाई करेगी. इसका मतलब है कि तमिलनाडु सरकार 6 मार्च तक इन मुजरिमों को रिहा नहीं कर सकती.

जयललिता के फैसले पर राहुल गांधी ने दुख जताया था जिसके बाद मनमोहन सिंह ने 1991 में हुई राजीव गांधी की हत्या को देश की "आत्मा पर हमला" बताया. मनमोहन सरकार ने तमिलनाडु सरकार के फैसले को कानूनी चुनौती दी. प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, "हमारे पूर्व प्रधानमंत्री और मासूम भारतवासियों के नेता के सात हत्यारों की रिहाई न्याय के सभी मूल्यों के खिलाफ होगी. किसी भी सरकार या पार्टी को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में नरमी नहीं दिखानी चाहिए."

बुधवार को तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने कहा था कि वह भारत सरकार से सलाह मशविरा करने के बाद हत्याकांड में शामिल सात कैदियों को रिहा करेंगी. लेकिन कांग्रेस पार्टी ने अब सुप्रीम कोर्ट में इस रिहाई को रोकने के लिए याचिका दी है. भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत इस याचिका की सुनवाई करने का फैसला किया और गुरुवार को इस मामले पर पर फैसला दिया.

केंद्रीय कानून मंत्री कपिल सिब्बल और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने भी तमिलनाडु सरकार के इस फैसले की निंदा की थी. सुप्रीम कोर्ट ने इसी हफ्ते मंगलवार को राजीव गांधी की हत्या के मामले में तीन मुजरिमों को दी गई फांसी की सजा को आजीवन कारावास में तब्दील किया था. अदालत ने दया याचिका की सुनवाई में हुई देरी की दलील देते हुए तीनों दोषियों को ये राहत दी थी. इस फैसले के एक दिन बाद ही तमिलनाडु में जयललिता ने एक आपात बैठक में तय किया कि वह राजीव गांधी की हत्या के सात दोषियों की रिहाई के लिए केंद्र सरकार से सिफारिश करेंगी.

एएम/एमजी(एएफपी, डीपीए)

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