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दुनिया

हटेगा मुस्लिम विरोधी वीडियो

अमेरिका की एक अदालत ने इंटरनेट कंपनी गूगल को आदेश दिया है कि वह तुरंत अपने यूट्यूब चैनल से मुस्लिम विरोधी बताए जा रहे वीडियो को हटाए. इस वीडियो का दुनिया के कई हिस्सों में मुसलमान विरोध कर रहे हैं.

'इनोसेंस ऑफ मुस्लिम्स' नाम की इस फिल्म के वीडियो में जिस अभिनेत्री को दिखाया गया है, उसी ने गूगल के खिलाफ मुकदमा दायर किया था. अभिनेत्री सिंडी ली गार्सिया ने दावा किया कि इस फिल्म के जिन हिस्सों में उसे दिखाया गया है, वह असल में किसी और फिल्म के लिए शूट किए गए थे. फिल्म के निर्माताओं ने जब गार्सिया के विरोध के बावजूद यह वीडियो यूट्यूब से नहीं हटाया तो उन्होंने यूट्यूब के मालिक, गूगल पर मुकदमा कर दिया.

अमेरिका की सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने गार्सिया को मिल रही जान से मारने की धमकियों के चलते गूगल को आदेश दिया है कि वह इस वीडियो को हटाए. दूसरी ओर गूगल ने दलील दी कि अगर वह वीडियो को हटाते हैं तो यह कंपनी के फ्री-स्पीच अधिकारों के खिलाफ होगा. गार्सिया के वकील क्रिस आर्मेंटा ने अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए कहा, "प्रचार करने वाली यह फिल्म उस फिल्म से बहुत ज्यादा अलग है जिसमें गार्सिया काम करने को तैयार हुई थीं. निर्देशक ने उन्हें बताया था कि वह उसे एक सीधी सादी रोमांचक फिल्म में ले रहा है."

इस विवादित फिल्म के ट्रेलर में पैगम्बर मुहम्मद को एक मूर्ख और यौन विकृतियों वाले व्यक्ति के रूप में दिखाया गया है. 2012 में पहली बार इस वीडियो के सामने आते ही मिस्र, लीबिया और कई अन्य देशों के मुसलमानों ने अमेरिका के खिलाफ विरोध किया. उसी दौरान बेनगाजी के अमेरिकी उच्चायोग पर हमले में चार अमेरिकी नागरिकों की हत्या कर दी गई थी. मरने वालों में लीबिया में कार्यरत अमेरिकी राजदूत भी शामिल थे. कई मुसलमान पैगम्बर को किसी भी रूप में दिखाए जाने को धर्म के खिलाफ या ईशनिंदा मानते हैं.

वहीं पाकिस्तान में इंटरनेट की आजादी के लिए काम करने वाले कुछ संगठनों का मानना है कि विवादित वीडियो के हटने के बाद तो सरकार को देश में यूट्यूब पर लगी रोक को हटा लेनी चाहिए. पाकिस्तान में यूट्यूब पर 2012 में इस वीडियो के आने के बाद से ही बैन लगा हुआ है. एक टेक्नोलॉजी थिंकटैंक, 'बाइट्स फॉर ऑल' के शहजाद अहमद कहते हैं, "हमें लगता है कि अब पाकिस्तानी सरकार के पास यूट्यूब पर रोक लगाए रखने का कोई बहाना नहीं बचा है." अहमद आगे कहते हैं, "यूट्यूब पर लगी रोक के पीछे सरकार की यह मंशा है कि सभी चीजें छन छनकर आएं, सेंसरशिप रहे और नैतिक मामलों पर पूरा नियंत्रण रहे. हम संवैधानिक याचिका के जरिए कोर्ट में इसके खिलाफ लड़ रहे हैं."

पाकिस्तान में भी धर्म एक बहुत संवेदनशील मुद्दा है, जहां की करीब 97 फीसदी आबादी मुस्लिम है. वहां इस फिल्म के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों में 20 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. इससे पहले 2010 में भी सोशल नेटवर्किंग साइट, फेसबुक को भी ईशनिंदा के चलते दो हफ्ते के लिए बंद किया गया था. पाकिस्तान में अभी भी सैकड़ों वेबसाइटों पर रोक लगी हुई है.

आरआर/ओएसजे (डीपीए,एएफपी)

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