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दुनिया

हजारों की भीड़, गजेंद्र को रोकने वाला कोई नहीं

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की रैली के दौरान किसान गजेंद्र सिंह की खुदकुशी पर राजनीति जारी है. गजेंद्र की मौत पर संसद से सड़क तक बवाल मचा हुआ है. सभी पार्टियां एक दूसरे पर हमले कर रही हैं और उन्हें असंवेदनशील बता रही हैं.

हजारों लोगों के सामने हुई आत्महत्या के दौरान रैली चलती रही और लोग भाषण देते रहे. दिल्ली में शासन कर रही आप पार्टी के नेता पुलिस पर आरोप लगा रहे हैं जो केंद्र सरकार के अधीन है, तो सत्ताधारी बीजेपी के नेता आप पर आरोप लगा रहे हैं. गजेंद्र सिंह की मौत पर संसद में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि मानव जीवन से महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है.

तो कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आत्महत्या की न्यायिक जांच कराने की मांग की है. आत्महत्या की तस्वीरें आई हैं, लेकिन हजारों की भीड़ में कोई नहीं था जो गजेंद्र सिंह को रोकता.

जब पूरे भारत में इतने किसान आत्महत्या कर रहे हैं तो इसके पीछे सिर्फ तत्कालिक कारण नहीं हो सकते. औदि्योगिक विकास हर सरकार की प्राथमिकता होती है लेकिन करोड़ों किसानों की तेजी से बदलती जिंदगी और गांवों से होते पलायन पर कोई विचार नहीं कर रहा.

गजेंद्र सिंह की मौत की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है और गृहमंत्री राजनाथ सिंह मामले का राजनीतिकरण न करने की अपील करते हुए न्यायिक जांच की मांगे भी उठ रहे हैं.

राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोपों प्रत्यारोपों में लगे हैं तो इन दलों के समर्थक राजनीतिक नेताओं को आड़े हाथ ले रहे हैं. जबकि किसानों की आत्महत्या के कारणों और विकास के असल मुद्दों पर राजनीतिक बहस होती नहीं दिख रही है.

दूसरी ओर सोशल मीडिया पर ऐसे लोग भी हैं जो इस घटना के बाद चाहते हैं कि गजेंद्र सिंह की शहादत नाकाम नहीं रहेगी और किसानों के मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा.

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