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दुनिया

हक के लिए पूरे साल लड़ती रहीं महिलाएं

नया साल दस्तक दे रहा है. ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि 2010 में कौन सी महिलाएं सुर्खियों में रहीं. कौन सी महिलाओं ने दुनिया को प्रभावित किया.

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सू-ची की रिहाईः

सबसे पहले बात दुनिया की सबसे साहसी महिलाओं में से एक. बीसियों साल से घर में नजरबंद रहीं म्यांमार की आंग सांग सू-ची को 13 नवंबर को आखिरकार रिहा कर दिया गया. उनके प्रशंसकों में रिहाई के बाद खुशी की लहर छा गई.

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित 65 साल की आंग सान सू-ची सैनिक सरकार के खिलाफ अपने अहिंसक विरोध के लिए दुनिया भर में हिम्मत और धीरज का प्रतीक बन गईं हैं और हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी. अपनी मीठी बोली के लिए जाने वाली सू-ची अपने पति और दो बेटों से दशकों तक जुदा रहने के बाद भी इस पर अफसोस नहीं करतीं हैं. सूची ने इसके बाद डॉयचे वेले के साथ खास इंटरव्यू किया.

NO FLASH Myanmar Aung San Suu Kyi

"मुझे डर नहीं लगता. मुझे फिर गिरफ्तार किया जा सकता है. लेकिन इस डर से मैं अपने काम में बदलाव नहीं करूंगी. जोखिम है और मैं गिरफ्तार भी नहीं होना चाहती क्योंकि उससे मेरे संघर्ष में अड़चनें आएंगी." -आंग सांग सू-ची

भारत की महिलाओं के लिए 9 मार्च 2010 एक विशेष दिन रहा. उस दिन राज्यसभा ने सालों बाद महिला आरक्षण बिल को पास किया जिसके तहत संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएंगे. डॉयचे वेले ने भारत में महिला अधिकार पर विस्तार से रिपोर्टिंग की.

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