हकीकत और है अफ्रीकी विकास की | दुनिया | DW | 21.05.2013
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दुनिया

हकीकत और है अफ्रीकी विकास की

अफ्रीका अपनी राजनीतिक एकता की 50वीं सालगिरह मना रहा है, तो दूसरी ओर उसकी अर्थव्यवस्था लहलहा रही है. ऊंची विकास दर और विदेशों से भारी पूंजी निवेश हो रहा है, लेकिन इसका फायदा सबको नहीं मिल रहा है.

तीन में से दो अफ्रीकियों के पास मोबाइल या स्मार्टफोन है. लोगों की क्रय शक्ति बढ़ रही है. बाजार फैल रहा है. अफ्रीका में अरबपतियों की तादाद बढ़ रही है. उद्योग जगत में कहा जाने लगा है कि एशिया के टाइगर देशों के बाद अब अफ्रीका के शेर छलांग लगाने को तैयार हैं. अफ्रीका की कहानी सफलता की कहानी है, जिसे वहां के राजनेता, अर्थशास्त्री और मीडिया शौक से सुनाते हैं.

केन्याई मूल के आर्थिक पत्रकार अनवर वारसी कहते हैं, "यह कहने की अच्छी वजहें हैं कि अफ्रीका अगले 50 वर्षों में सबसे अहम विकास वाला बाजार होगा. क्योंकि उसके पास कच्चा माल है, और उसके साथ बहुत ज्यादा कामगार भी." वारसी लंदन से प्रकाशित होने वाली पत्रिका अफ्रीकी बिजनेस मैगजीन के प्रकाशक हैं. वह कहते हैं, "अफ्रीका इस समय निवेश के लिए अत्यंत आकर्षक जगह है. चीनियों ने इसे दस-पंद्रह साल पहले समझ लिया था. अब जर्मन उद्यमों और यूरोपीयों को भी जगना चाहिए और मौके को पहचानना चाहिए."

रिकॉर्ड विकास

आंकड़े प्रभावी हैं. वर्ल्ड बैंक का कहना है कि सब सहारा अफ्रीका की अर्थव्यवस्था 2013 से 2015 के बीच औसत 5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. इसी अवधि में विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर सिर्फ 3 प्रतिशत रहेगी. सहारा मरूस्थल के दक्षिण में कई देशों में इस समय तेज आर्थिक विकास हो रहा है. इनमें सियरा लियोन में 11 प्रतिशत और गांबिया में 10 प्रतिशत की दर से विकास हो रहा है. मोजांबिक और कांगो की विकास दर करीब 8 प्रतिशत है.

लेकिन हैम्बर्ग के गीगा इंस्टीट्यूट के अफ्रीका विशेषज्ञ रोबर्ट कापेल कहते हैं कि ऊंची विकास दर अपने आप में उत्साह का कारण नहीं हो सकता. कापेल ने सहारा के दक्षिण में 42 देशों के विकास की संभावनाओं पर सर्वे किया है. उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तुलना में इनमें से अधिकांश देशों के नतीजे खराब रहे हैं, ऊंची विकास दर वाले देशों की भी. "विकास मुख्य रूप से इसलिए हो रहा है कि कच्चे माल और कृषि उत्पादों की मांग पिछले सालों में काफी बढ़ी है और उसकी वजह से कीमतें भी चढ़ रही हैं." विकास का मोटर मुख्य रूप से निर्यात है.

निर्यात पर निर्भरता

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और वर्ल्ड बैंक ने भी चेतावनी दी है कि अफ्रीका विदेशी व्यापार पर निर्भर है. संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान ने औद्योगिक देशों को अफ्रीका के साथ कच्चे मालों के कारोबार में सख्त नियम बनाने को कहा है. अन्नान का कहना है कि भ्रष्टाचार और करचोरी के कारण अफ्रीका की समृद्धि समाप्त हो रही है. अफ्रीका के देश आपस में बहुत कम व्यापार करते हैं. महाद्वीप का औद्योगीकरण बहुत धीमा है, कृषि क्षेत्र अपनी आबादी की जरूरतें ही पूरी नहीं कर सकता. रोजगार बाजार की भी हालत खराब है. उभरती अर्थव्यवस्था वाले देश दक्षिण अफ्रीका में 25 प्रतिशत लोग बेरोजगार हैं.

आर्थिक प्रगति सिर्फ लुआंडा, जोहानिसबर्ग और नैरोबी जैसे बड़े शहरों में दिखाई देती है. यहां रियल स्टेट और टेलिकम्युनिकेशन के क्षेत्र में बहुत तेज विकास हो रहा है. और यहां अफ्रीका का नया मध्यवर्ग रहता है, स्ट्राइव मैसीयीवा जैसे उद्यमियों के ग्राहक. अफ्रीकी टेली कंपनी इकोनेट वायरलेस के संस्थापक मैसीयीवा कहते हैं, "अफ्रीका की हालत अच्छी है. हमने काफी प्रगति की है, खासकर पिछले दो दशकों में." इस बीच उनका कारोबार अफ्रीका के 17 देशों के अलावा यूरोप, दक्षिण अमेरिका और एशिया में है.

विकास में हार-जीत

मैसीयीवा इस बीच जिम्बाब्वे के सबसे धनी इंसान हैं. लेकिन वे चेतावनी देते हैं कि समृद्धि का बंटवारा समान नहीं है और बहुत से युवा लोगों के पास रोजगार नहीं है. "हमें सुधारों में तेजी लानी होगी, पारदर्शी होना होगा और नौकरशाही कम करनी होगी." मॉरीशस, सेशल्स, केप वर्डी, बोट्सवाना, घाना और दक्षिण अफ्रीका जैसे तेज विकास वाले अफ्रीकी देश यह सब कर चुके हैं. कापेल का कहना है कि सर्वे में शामिल करीब दो तिहाई देशों में विकास के आसार अच्छे नहीं हैं. खास कर ऐसे देश जो राजनीतिक उथल पुथल और हिंसा का शिकार हैं.

मसलन माली उत्तर में इस्लामी कट्टरपंथियों का सामना कर रहा है. डेमोक्रैटिक रिपब्लिक कांगो में एम23 विद्रोही आगे बढ़ रहे हैं तो केंद्रीय अफ्रीकी रिपब्लिक में हाल में ही तख्तापलट हुआ है. अपार खनिज तेल वाले नाइजीरिया में भी गरीबी बढ़ रही है और भ्रष्टाचार तथा राजनीतिक अस्थिरता के कारण विकास में सफलता नहीं मिल रही है. कापेल का कहना है कि कच्चा माल हमेशा आर्थिक प्रगति का अच्छा साधन नहीं होते. वे कहते हैं कि विकास करने वाले ज्यादातर देशों के पास तेल या दूसरे कच्चे माल नहीं हैं, लेकिन उन्होंने सर्विस सेक्टर पर ध्यान दिया है.

स्थायी विकास के प्रयास

तो फिर अफ्रीका को अपने विकास को स्थिर आधार देने के लिए क्या करना चाहिए? आर्थिक पत्रकार वारसी का कहना है कि इसके लिए ढांचागत संरचना में अधिक निवेश की जरूरत होगी. वह कहते हैं कि कारोबार करना दुनिया में और कहीं इतना महंगा नहीं है, "मसलन केन्या या दक्षिण अफ्रीका में बड़े प्रोडक्शन सेंटर हैं और उनसे जुड़े देश हैं जो इन केंद्रों पर निर्भर हैं. लेकिन रोड और रेल की हालत बहुत खस्ता है, माल का ट्रांसपोर्ट अत्यंत महंगा है."

अफ्रीका का आर्थिक विकास कितना स्थायी होगा, यह बहुत सी बातों पर निर्भर करेगा, यह कहना है आर्थिक विशेषज्ञ रोबर्ट कापेल का. सूची संबी है. आर्थिक सुधार, बाजार का खुलना, निवेश के लिए अच्छे कानून, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार. कापेल कहते हैं, "तब अफ्रीका का विकास जारी रहेगा और वह उम्मीद का महाद्वीप बन जाएगा."

रिपोर्ट: यूलिया हान/एमजे

संपादन: ए जमाल

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