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विज्ञान

हंसिए और स्वस्थ रहिए

हंसने, हास्य योग के क्या फायदे हैं. इसका कहां कहां उपयोग किया जा सकता है. इस बात की जांच करने के लिए मनीला की जेल में एक प्रयोग किया जा रहा है. यहां कैदियों के लिए हास्य योग की कक्षाएं शुरू की गई हैं.

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जेल की काली कोठरियां. जहां कैदियों से न कोई मिलने आता है न उनके जीवन में घर की कोई ऊब रहती है. इन कैदियों के जीवन में थोड़ा रस घोलने के लिए, उन्हें खुश बनाने के लिए उनकी उदासीनता दूर करने के लिए ये प्रयोग किया जा रहा है. उन्हें हास्य योग सिखाने वाले पाओलो मार्टिन कहते हैं कि हास्य योग का अर्थ ही है कि हम बिना किसी मतलब के हंसे क्योंकि ये स्वास्थ्य के लिए अच्छा है.

12 05 2006 projekt zukunft lachen

हंसने के हैं कई फायदे

एक कैदी बताते हैं, "मेरे परिवार का कोई व्यक्ति मुझसे मिलने नहीं आता. लेकिन जब हम ये हंसने की क्लास में आते हैं तो बहुत अच्छा लगता है. हम भूल जाते हैं कि हमें यहां कोई मिलने नहीं आता." हालांकि हम सचमुच हंस रहे हैं या हंसने का नाटक कर रहे हैं, या फिर हंसने की एक्सरसाइज कर रहे हैं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हंसने पर दिमाग बिलकुल एक तरह की प्रतिक्रिया देता है.

मुंबई में काफी साल से किशोर कुवावाला लाफ्टर क्लब चला रहे हैं. उन्होंने मंत्र दिया है लाफ मुंबई. किशोर जी कहते हैं कि हंसने से शरीर और मन एकरूप हो जाते हैं. "शरीर और मन जब एकरूप हो जाते हैं तो हमारे विचार तुरंत बंद हो जाते हैं. इससे चिंता, व्यग्रता, उदासीनता, अवसाद सब खत्म हो जाता है. क्योंकि ये सब विचारों से जुड़ा हुआ है."

किशोर जी हंसने के फायदे बताते हुए कहते हैं कि हंसने से, या कहें हंसने की क्रिया करने से शरीर में बायोकेमिकल प्रतिक्रिया होती है. "इसके कारण दो हार्मोन निकलते हैं इंडोकिन और इम्युनोग्लोबिन. एंडोकिन हार्मोन दर्द, सूजन को कम करता है वहीं इम्युनोग्लोबिन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है. इस कारण संक्रामक रोग नहीं होते."

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बस एक खिलखिलाहट

हंसने के फायदे बताते हुए किशोर जी यहीं नहीं रुकते. वो कहते हैं कि शरीर और मन एक होने से एकाग्रता बढ़ जाती है, "इससे काम अच्छे से होते हैं, काम अच्छे से होते हैं तो मन खुश रहता है. सकारात्मक नजरिया बनता है. ऑफिस में, घर में, समाज में आपसी संबंध अच्छे हो जाते हैं, विश्वास बढ़ता है."

किशोर जी ने मुंबई के कई तबकों के लिए हास्य योग की कक्षाएं की हैं, प्रोजेक्ट्स किए हैं. डब्बावाला, कुली, रेल्वे पुलिस, जेल, यौन कर्मियों, ड्रग की लत में पड़े लोगों के लिए उन्होंने कार्यक्रम किए. उनका एक ही लक्ष्य है लोका समस्ता सुखिनो भवन्तु.

और मुस्कुराहट, हंसी तो वैसे ही संक्रामक है. इसे फैलाएं जितना फैला सकते हैं.

रिपोर्टः आभा एम

संपादनः एस गौड़

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