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दुनिया

स्वात में आजादी का समारोह

कुछ साल पहले आतंकवादियों ने स्वात में पाकिस्तान का राष्ट्रीय झंडा लहराने पर रोक लगा दी थी लेकिन इस बार इस घाटी में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जबरदस्त उत्साह दिखाई दिया. गलियां और बाजार पाकिस्तानी परचमों से सजे हुए हैं.

1969 में स्वात का जब पाकिस्तान में विलय हुआ तो वहां हर साल 14 अगस्त का दिन बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता था. स्कूलों और कॉलेजों में स्वतंत्रता दिवस के दिन प्रोग्राम होते, जिनमें स्वात के लोग पाकिस्तान के साथ अपने प्यार का इजहार करते थे. मिंगोरा शहर में काफी अच्छे से जश्न मनाया जाता था. लेकिन स्वात में तीन साल के तनाव के बाद इस जश्न का करीब करीब अंत ही हो गया.

इस तनाव के दौरान जहां एक ओर लड़कियों की शिक्षा पर रोक लग गई वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रति प्यार जताने पर भी रोक लग गई. और तो और स्वात को पाकिस्तान का हिस्सा न मानने की घोषणा की गई. लोगों को धमकियां दी गई कि वे स्कूलों, कॉलेजों और घरों पर पाकिस्तानी झंडा न लहराएं. इसके बाद तालिबान के डर की वजह से स्कूलों और कॉलेजों से पाकिस्तानी झंडे उतार दिए गए. तब लोग पाकिस्तान का नाम जुबान पर लाने से भी डरते थे.

2009 में सफल कहे जाने वाले सैन्य अभियान के बाद स्वात में जनजीवन बहाल होना शुरू हुआ. इस साल 14 अगस्त का दिन तो पूरे जश्न के साथ मनाया गया ही, तालिबान से आजादी भी पूरे जोश के साथ मनाई गई.

स्वात के वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक शहजाद आलम का कहना है, "तालिबान के दौर में स्वात के लोगों का पाकिस्तान से सभी प्रकार का नाता टूट गया था.'' उस दौरान जो लोग तालिबान के खिलाफ आवाज उठाते, उन्हें मार दिया जाता था. इसके कारण लोग काफी डरे हुए थे. पाकिस्तान की आजादी के दिन यहां कुछ नहीं होता था.

स्वात में शांति के बाद से हर साल पाकिस्तान की स्वतंत्रता का दिन पारंपरिक रूप से काफी गर्मजोशी के साथ मनाया जाता है. स्वात निवासी मोहम्मद अली ने भी इस साल स्टॉल लगाया हुआ है. उन्हें लगता है कि पिछले कुछ सालों की तुलना में इस साल लोग स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए ज्यादा उत्साहित हैं. "बच्चे बूढ़े और जवान स्वतंत्रता दिवस के लिए झंडे और बैज खरीद रहे हैं, जो हमारे लिए फायदेमंद है." प्रोफेसर अताउर्रहमान का कहना है, "इस साल हमें आजादी के जश्न को इस इरादे के साथ मनाना चाहिए कि हम इस इलाके की तरक्की और खुशहाली के लिए हर संभव कोशिश करेंगे. आजादी का शुक्रिया अदा करने का सही तरीका यह है कि हम अपने वतन की साख को बेहतर बनाने के लिए काम करें. इस साल आजादी के मौके पर लोगों में जो जोश है उससे ये पता चलता है कि लोग अपने देश की तरक्की के लिए कुछ करना चाहते हैं."

विश्लेषकों के मुताबिक स्वात में बढ़े आतंकवाद के खिलाफ जिस तरह से लोगों ने बलिदान दिए हैं, इससे एक तरह से पाकिस्तान की आजादी के लिए लड़ी जाने वाली जंग की याद ताजा हो गई और इसी वजह से स्वात की शांतिपूर्ण जनता आजादी के इस दिन को मनाती है. वे एक तरह से प्रतिबद्ध हैं कि बुरे तत्वों को फिर से इस इलाके में कदम नहीं जमाने देंगे.

रिपोर्टः अदनान बाचा/एएम

संपादनः महेश झा

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