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विज्ञान

स्मोकिंग से हुए नुकसान की भरपाई

स्मोकिंग से दिमाग की बाहरी परत को नुकसान पहुंचता है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इसकी भरपाई हो सकती है, लेकिन इसमें कई साल लग सकते हैं.

दिमाग के ग्रे मैटर की बाहरी परत या कॉर्टेक्स के पतले होने और धूम्रपाना के बीच कितना संबंध है, यह पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक शोध किया. उन्होंने स्कॉटलैंड के 500 ऐसे लोग लिए जिनकी उम्र 70 और 80 के बीच थी. उन्होंने जो एक खास बात देखी वह यह कि स्मोकिंग छोड़ देने पर यह झिल्ली दोबारा ठीक होने लगती है.

साइंस की नेचर पत्रिका में रिसर्चरों ने लिखा है, "स्मोकिंग ना करने की स्थिति में हर साल झिल्ली बेहतर होती पाई गई." इस रिसर्च में कई देशों के वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया. उन्होंने चेतावनी दी, "हालांकि थोड़ी बहुत भरपाई मुमकिन है, लेकिन इसमें कई साल लग जाते हैं."

इससे पहले भी कई रिसर्चों के आधार पर कहा जा चुका है कि स्मोकिंग से याददाश्त की कमी जैसी बीमारियां देखने को मिलती हैं. कुछ मामलों में दिमाग को भारी नुकसान होता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, "इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि स्मोकिंग करने वालों की अन्य लोगों के मुकाबले बढ़ती उम्र में ज्ञानात्मक क्षमता औसतन कम होती है."

इससे पहले यह कभी नहीं कहा गया है कि इसकी भरपाई हो सकती है या नहीं. शोध में शामिल लोगों में से जो लोग धूम्रपाना करते हैं उनके ब्रेन स्कैन में कॉर्टेक्स झिल्ली उन लोगों से पतली पाई गई जिन्होंने कभी स्मोकिंग नहीं की.

एसएफ/आईबी (एएफपी)

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