1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

विज्ञान

स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर का रिस्क

जेब में स्मार्टफोन, हाथ में स्मार्टवॉच और चेहरे पर स्मार्ट ग्लास, इंसान का भविष्य इसी दिशा में बढ़ रहा है. लेकिन क्या आप इनको इस्तेमाल कर अपनी डाटा सुरक्षा से समझौता करने को तैयार हैं?

वेयरेबल डिवाइस यानि पहनने वाली मशीन. गूगल ग्लासेस, स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर इनमें शामिल हैं. ये मशीनें हमारी सेहत और हमारी दिलचस्पियों पर नजर रखने लगी हैं. यही वजह है कि ये बाजार एक अरब डॉलर का होने जा रहा है. गूगल ग्लास पिछले कुछ वक्त से खूब चर्चा में है. दो साल पहले जब यह चश्मा बना तो करीब 1500 डॉलर में चुनिंदा डेवलपरों को इसे खरीदने का मौका मिला. लेकिन अब तक यह आम लोगों के लिए बाजार में नहीं आया है.

कानून का उल्लंघन करता गूगल ग्लास

डॉयचे वेले के लिए गूगल ग्लास को टेस्ट करने वाली बर्लिन की यूलियाने त्सीलोंका बताती हैं कि इसे पहनना मजेदार क्यों है, "इसका विजन फील्ड बहुत ही सीमित है. शुरू में परेशानी होती है. लेकिन दूसरी तरफ ये मजेदार है क्योंकि मैं जो भी कुछ खुद देख रही हूं, वो सब रिकॉर्ड भी हो रहा है. मतलब, मैं अपनी जिंदगी का वीडियो बना सकती हूं, कम से कम तब तक, जब तक बैटरी साथ दे." गूगल ग्लास की बैटरी लाइफ एक बड़ी समस्या है. और दूसरी दिक्कत है प्राइवसी की. इससे पहनने वाला अपने सामने हर शख्स की फोटो ले सकता और उसका वीडियो बना सकता है. इसी वजह से अमेरिका में इस चश्मे के इस्तेमाल के नियम बनाए गए हैं. रेस्तरां, सिनेमा और सार्वजनिक जगहों पर इसे नहीं पहना जा सकता.

जर्मनी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जानकार और वकील इवोन होफश्टेटर गूगल ग्लास के लिए अच्छा भविष्य नहीं देखतीं. जर्मन कानून के बारे में वे बताती हैं, "अगर कोई भी मेरी मर्जी के बिना मेरा एक शब्द भी रिकॉर्ड करता है, मेरी तस्वीर लेता है, बगैर मुझसे पूछे, और अगर कहीं वो उसे इंटरनेट पर डाल देता है, तो उसे धारा 201 और 201-ए के तहत सजा हो सकती है. और इससे कॉपीराइट के कानून का भी उल्लंघन होगा. ऐसे बहुत से कानून हैं, जिनका यह डिवाइस पालन नहीं करती है."

जाल में फंसाती हैं कंपनियां

पहनने वाली डिवाइसेस में कई तरह के विकल्प हैं. जैसे कि एयर फिल्टर वाला नेकलेस, या फिर ऐसे कपड़े, जो देखने वाले की नज़रों के मुताबिक हिलते हों. स्मार्टवॉच आज हकीकत बन चुकी है और स्मार्टफोन के साथ सिंक्रोनाइज होकर काम कर रही है. इसमें कई फीचर्स हैं. यही वजह है कि सभी बड़ी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां स्मार्टवॉच प्रोग्राम के साथ आगे बढ़ना चाहती हैं. इसी तरह फिटनेस ट्रैकर आपको अपनी सेहत पर नजर रखने और खुद को बेहतर बनाने का मौका देता है.

पर साथ ही यह आपका डाटा जमा कर इन्हें बनाने वाली कंपनियों तक पहुंचाते हैं. इवोन होफश्टेटर इस बारे में बताती हैं, "लोग खुद पर ध्यान देना पसंद करते हैं. ये चीजें उनके अहंकार को संतुष्ट करती हैं. और यही इन बड़ी बड़ी इंटरनेट कंपनियों की चाल है. वे हमें ऐसे डिवाइस पहनने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जिनके जरिए उन्हें हमारा डाटा मिल सके. हमारे डाटा में ही उनकी रुचि है."

वियरेबल डिवाइस डाटा जमा करते हैं और कंपनियां इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करती हैं. लेकिन जब अच्छी सेवाएं मिल रही हों, तो अक्सर लोग डाटा प्राइवेसी को तवज्जो देना भूल जाते हैं.

आक्सेल प्रिमावेसी/आईबी

DW.COM

संबंधित सामग्री