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विज्ञान

स्मार्टफोन से संभव हुई एड्स की जांच

अमेरिकी रिसर्चरों ने किसी भी साधारण स्मार्टफोन से ही एड्स और सिफिलिस जैसी खतरनाक बीमारियों की कहीं भी जांच कर पाने में सफलता पाई है. अफ्रीकी देश रवांडा में इसका सफल प्रदर्शन हुआ है.

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों की टीम ने स्मार्टफोन में एक अटैचमेंट लगा कर उससे एड्स जैसी बीमारी की जांच की. एचआईवी की जांच के लिए प्रचलित करीब 18,000 डॉलर की कीमत वाले डायग्नोस्टिक टेस्ट उपकरण के मुकाबले ये अटैचमेंट मात्र 34 डॉलर में बनाया गया. इसमें मरीज के रक्त की कुछ बूंदों में बीमारी के एंटीबॉडी की पहचान की जाती है. अटैचमेंट की एक और खास बात ये है कि आमतौर पर घंटों में पता चलने वाले नतीजों के बजाए ये कुछ ही मिनट बाद ब्लड टेस्ट के परिणाम दिखा देता है.

इसे स्मार्टफोन के ऑडियो जैक में लगाना होता है. वैज्ञानिकों ने बताया कि यह अटैचमेंट प्रचलित एलाइजा टेस्ट की ही नकल करता है. एलाइजा यानि इंजाइम लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट एस्से, एड्स की स्थिति का पता लगाने में काम आता है. रिसर्चरों ने पाया कि एचआईवी के टेस्ट में ये अटैचमेंट "लगभग एलाइजा जितना ही बढ़िया" साबित हुआ.

इसे रवांडा की 96 महिलाओं पर आजमाया गया और टेस्ट के नतीजे 'साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन' जर्नल में छपे. विशेषज्ञ उम्मीद जता रहे हैं कि यह "लैब-ऑन-ए-चिप" उपकरण काफी मददगार औजार साबित होगा. खासतौर पर दूर दराज के इलाकों में जहां केवल फील्ड क्लिनिक हैं और लोगों के पास अधिक स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंची हैं.

बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के एसोसिएट प्रोफेसर सैमुएल सिया ने इस स्टडी का नेतृत्व किया. वे क्लिनिकल ट्रायल और बड़े पैमाने पर करवाना चाहते हैं. सिया ने बताया, "ये इतना तो दिखाता ही है कि एक स्मार्टफोन एक्सेसरी पर लैब जैसी गुणवत्ता वाले इम्यूनो-एस्से किए जा सकते हैं." सिया ने आगे कहा कि माइक्रोफ्लूइड्स को कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स में हुई नवीनतम प्रगति के साथ जोड़ दें, तो कई लैब आधारित जांचों को ऐसी किसी भी आबादी तक पहुंचाया जा सकता है जिनके पास स्मार्टफोन हैं.

सिया का मानना है कि इससे पूरे विश्व में मुहैया कराई जा रही स्वास्थ्य सेवाओं का कायाकल्प हो सकता है. इस स्टडी को आर्थिक सहायता देने वाले 'सेविंग लाइव्स ऐट बर्थ ट्रांजिशन' ग्रांट को अमेरिकी एजेंसी यूएसएड, गेट्स फाउंडेशन, नॉर्वे सरकार, ग्रैंड चैलेंजेज कनाडा, विश्व बैंक और दि वैलेस एच कुल्टर फाउंडेशन का समर्थन प्राप्त है.

आरआर/एमजे (एएफपी)

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