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दुनिया

स्मार्टफोन में छिपा है बच्चों का पसीना

जिन स्मार्टफोन, टैबलेट और लैपटॉप के बिना आज हम जीने की कल्पना भी नहीं कर सकते, उनमें नन्हें बच्चों का खून पसीना छिपा है. कांगो में सात साल तक के बच्चे खदानों में काम करने पर मजबूर हैं.

लैपटॉप और स्मार्टफोन की बैट्री के लिए जिस कोबाल्ट का इस्तेमाल होता है, वह अधिकतर कांगो की खदानों से आता है. मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि इन खदानों में गैरकानूनी रूप से बाल मजदूरों से काम लिया जाता है.

एमनेस्टी ने एप्पल, सैमसंग और सोनी जैसी नामी कंपनियों का जिक्र करते हुए उन पर लापरवाही का आरोप लगाया है. इस रिपोर्ट के लिए एमनेस्टी ने स्थानीय संगठन अफ्रीकन रिसोर्स वॉच की मदद ली गयी है. अफ्रीवॉच के कार्यकारी निदेशक इमानुएल उम्पुला ने इस बारे में कहा, "यह डिजिटल युग का विरोधाभास है कि दुनिया की कुछ सबसे धनवान, सबसे प्रगतिशील कंपनियां बाजार में ऐसे तकनीकी उपकरण ला रही हैं जिनके लिए उन्हें यह बताना भी नहीं पड़ता कि कच्चा माल आखिर आया कहां से."

दुनिया भर में बैट्री में इस्तेमाल होने वाले कोबाल्ट का आधा हिस्सा कांगो से ही आता है. एमनेस्टी ने पाया है कि देश में सात साल के बच्चे भी अवैध रूप से खदानों में काम कर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की 2014 की रिपोर्ट के अनुसार कांगो में 40,000 बच्चे अलग अलग खदानों में काम कर रहे हैं.

एमनेस्टी के अनुसार बच्चे हों या बड़े, खदानों में काम करने वाले अपनी जान जोखिम में डाल कर काम कर रहे हैं. चौदह साल के एक बच्चे ने बात करने पर बताया, "मुझे कई बार 24 घंटे अंदर सुरंग में ही बिताने पड़ते हैं. पेशाब करने के लिए भी मैं बाहर नहीं आ सकता." सितंबर 2014 से दिसंबर 2015 के बीच इन खदानों में 80 लोगों के मारे जाने की भी खबर है. एमनेस्टी के रिसर्चर मार्क डुमेट ने इस बारे में कहा, "एक तरफ ग्लैमर से भरी दुकानें हैं, आधुनिकतम तकनीक की मार्केटिंग है और दूसरी तरफ पत्थर ढोते बच्चे हैं जो पतली सुरंगों में अपने फेफड़ों को खराब होने दे रहे हैं."

एमनेस्टी की रिपोर्ट के जवाब में एप्पल ने बयान जारी कर कहा है कि वह मामले की जांच करेगा ताकि पता चल सके कि ढिलाई किस स्तर पर बरती गयी. एप्पल का कहना है कि जहां तक बाल मजदूरी की बात है, तो कंपनी की नीति में उसके लिए "जीरो टॉलरेंस" है. इसके विपरीत सैमसंग का कहना है कि वह सभी खदानों की जांच कराता रहा है और उसके पास लिखित में इस बात के प्रमाण हैं कि खदानों में मानवधिकारों का हनन या फिर स्वास्थ्य और पर्यावरण से संबंधित कानूनों का उल्लंघन नहीं हुआ है. वहीं सोनी ने इस पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

आईबी/एमजे (रॉयटर्स, डीपीए)

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