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वर्ल्ड कप

स्पेन के साथ एक युग का अंत

स्पेन के वर्ल्ड कप से बाहर होने के साथ ही फुटबॉल में टिकी टाका अध्याय का अंत हो गया है. 2010 का वर्ल्ड कप और दो यूरो चैंपियनशिप जीतने वाली टीम का ब्राजील में वही हश्र हुआ जो आत्ममुग्धता में डूबी टीमों का होता है.

पूरे मैच में गेंद को ज्यादा से ज्यादा समय अपने पास रखे रहो. आगे बढ़ाओ, पीछे लौटाओ और टिकी टाका करते रहो. बीच बीच में गेंद को विपक्षी टीम को पेनल्टी एरिया तक ले कर जाओ और वहां भी टिकी टाका करते रहो.

किसी न किसी मौके पर दूसरी टीम गलती करेगी और स्पेन एक गोल करके जीत जाएगा. 2010 के वर्ल्ड कप में स्पेन की यह रणनीति खासी सफल रही. स्पेनिश क्लब बार्सिलोना की पदचिह्नों पर चलते हुए स्पेन वर्ल्ड चैंपियन बन गया. अगले एक दो साल और टिकी टाका स्टाइल चला. लेकिन अब धीरे धीरे बाकी टीमें इसे समझने लगी थीं. यूरो 2012 के फाइनल में पुर्तगाल ने स्पेन को रुला कर रख दिया. नतीजा पेनल्टी और भाग्य ने तय किया. पुर्तगाल का एक शॉट गोलपोस्ट से टकराकर बाहर चला गया और स्पेन का ऐसा ही शॉट गोल में बदल गया. स्पेन के लिए यह पहली चेतावनी थी, जिसे अनदेखा किया गया.

इसी दौरान 2012 और 2013 में यूरोपीय क्लबों के सबसे बड़े मुकाबले चैंपियंस लीग में स्पेन का कोई क्लब फाइनल में नहीं पहुंचा. खास तौर से टिकी टाका फुटबॉल खेलने वाले बार्सिलोना का फाइनल तक न पहुंचना स्पेन के लिए दूसरी बड़ी चेतावनी थी. स्पेन की राष्ट्रीय टीम में सबसे ज्यादा खिलाड़ी बार्सिलोना से ही आते हैं. राष्ट्रीय टीम के दिग्गज कोच विसेंट डेल बॉस्क ने इस चेतावनी को अनदेखा किया. बार्सिलोना 2014 में भी चैंपियंस लीग के फाइनल तक नहीं पहुंचा. संकेत साफ थे कि अर्जेंटीना के मेसी और ब्राजील के नेमार जैसे बड़े खिलाड़ियों के कंधों पर सवार होने के बावजूद क्लब डिफेंस नहीं कर पा रहा था. मिडफील्ड और अटैक पूरी तरह मेसी और नेमार के भरोसे थे. एकाध स्पेनिश खिलाड़ियों को छोड़ दें तो बाकी सब पिट रहे थे.

WM 2014 Gruppe B 2. Spieltag Spanien Chile

दो मैचों से ही बाहर स्पेन

गेराथ बेल और डी मारिया जैसे खिलाड़ियों के सहारे रियाल मैड्रिड ने अपने आप को बदला और 2014 की चैंपियंस लीग जीतकर साबित कर दिया कि बदलाव कितने जरूरी होते हैं. लेकिन इसके बावजूद ब्राजील जाने वाली स्पेन की टीम में फिर बार्सिलोना के खिलाड़ियों की भरमार हो गई. कोच बॉस्क की नजर स्पेनिश लीग की छोटी टीमों में खेलने वाले दूसरे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों पर गई ही नहीं. वो बार्सिलोना स्टाइल फुटबॉल के मोहजाल में फंसे रह गए.

2008, 2010 और 2012 में बड़े खिताब जिताने वाले डिफेंडर कार्लोस पुयोल 2014 आते आते रिटायर हो चुके थे. दक्षिण अफ्रीका में स्टार स्ट्राइकर बने डेविड विया को भी इस बार मौका नहीं मिला. अटैक की जिम्मेदारी एटलेटिको मैड्रिड के डियेगो कोस्टा को दी गई, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद औसत स्ट्राइकर माना जाता है. बेहद अटैकिंग फुटबॉल खेलने वाले कोस्टा राष्ट्रीय टीम में बार्सिलोना के टिकी टाका खिलाड़ियों के साथ फिट नहीं बैठ पाए.

WM 2014 Gruppe B 2. Spieltag Spanien Chile

निराश खड़े रामोस

यही हाल रियाल मैड्रिड के रामोस का भी हुआ. शानदार हेडर मारने वाले रामोस टीम में अकेले ऐसे खिलाड़ी थे जिन पर कॉर्नर को गोल में बदलने की जिम्मेदारी थी. नीदरलैंड्स और चिली ने ब्राजील में रामोस को घेर कर रख दिया. नतीजा ये हुआ कि गोल करना भूल चुकी टीम के बाकी खिलाड़ियों से गोल ही नहीं हुए. दूसरी तरफ स्पेन के मिडफील्ड और डिफेंस को भी तेज फुटबॉल खेलने वाले नीदरलैंड्स और चिली ने बार बार भेदा. उस पर गोल बरसाये.

बीते छह साल में अपने खेल से आत्ममुग्ध हुई टीम खुद को बेहतर बनाना भूल गई. तमाम चेतावनियों के बीच उसे लगता रहा कि फुटबॉल का खेल वो तय करेगी. ये रुख आत्मघाती साबित हुआ. छह साल तक जबरदस्त फुटबॉल खेलने वाली टीम पांच दिन के भीतर वर्ल्ड कप से विदा हो गई.

ब्लॉग: ओंकार सिंह जनौटी

संपादन: मानसी गोपालकृष्णन

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