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दुनिया

स्पेनी पीएम पर भ्रष्टाचार का दबाव

स्पेन के प्रधानमंत्री मारियानो राखोय मुश्किल परिस्थितियों में काम करने वाले अनुभवी मैनेजर हैं, लेकिन उनकी सत्ताधारी पार्टी का कथित काला खजाना उनके लिए ऐसी मुसीबत बन गया है जिसका उन्हें कोई अनुभव नहीं है.

आरोप है कि कंजरवेटिव पीपुल्स पार्टी के प्रमुख राजनीतिज्ञ सालों तक काला धन लेते रहे. इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राखोय को अभी तक लोगों को यह भरोसा दिलाने में कामयाबी नहीं मिली है कि उनकी पार्टी में सब कुछ कानूनी तरीके से होता रहा है. स्पेनी मीडिया के अनुसार राखोय की पीपुल्स पार्टी में एक काला खाता था. उद्यमियों से लिए गए पैसे को अवैध रूप से पार्टी नेताओं में बांटा जाता था. इस सिलसिले में राखोय का नाम भी सामने आया है.

अपने एक साल के शासन में राखोय ने बहुत से तूफानों का सामना किया. अर्थव्यवस्था की हालत ठीक नहीं है, बेरोजगारी काफी ऊंची है और लोग अपना गुस्सा सड़कों पर उतार रहे हैं. इस समय प्रधानमंत्री की सबसे बड़ी चुनौती है कि भ्रष्टाचार कांड के बीच ईमानदार शख्सियत की अपनी छवि बनाए रखने की. घर पर इस्तीफे की मांग उठ रही है तो सोमवार को वे बर्लिन में जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल के साथ स्पेनी अर्थव्यवस्था की हालत के अलावा यूरोपीय संघ के भावी बजट पर चर्चा कर रहे हैं.

Merkel und Rajoy Regierungstreffen in Berlin

बर्लिन में स्वागत

पार्टी में भ्रष्टाचार के आरोपों के सामने आने के दो दिन बाद प्रधानमंत्री ने अपनी चुप्पी तोड़ी. वह भी प्रेस के सामने नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में. उन्होंने ब्लैकमनी लेने या देने के आरोपों को ठुकराते हुए कहा, "मैं राजनीति में पैसा कमाने नहीं आया." उन्होंने कहा कि वे रियल इस्टेट दफ्तरों में अपने पेशे में उससे ज्यादा कमाते थे जितना वे राजनीतिज्ञ के रूप में कमा रहे हैं.

धार्मिक पृष्ठभूमि के रोखोय ने वकालत की और युवावस्था में राजनीतिक अनुभव स्पेनी तानाशाह फ्रांको के समर्थकों द्वारा बनाई गई पार्टी पीपुल्स अलायंस में जुटाया. बाद में वे गैलिसिया की विधायिका के सदस्य रहे. कंजरवेटिव प्रधानमंत्री खोजे मारिया अजनार की पहली सरकार में वे 1996 से 2000 तक शिक्षा मंत्री रहे. अजनार के दूसरे कार्यकाल में वे 2004 तक देश के उप प्रधानमंत्री थे.

Spanien Madrid Feinkost

बढ़ती आर्थिक मुश्किलें

सिगार, साइकिल और फुटबॉल क्लब रियाल मैड्रिड के प्रेमी राखोय ओजस्वी वक्ता नहीं हैं, और न ही लोगों को बांध लेने वाले राजनेता. राजनीतिशास्त्री फर्नांडो वालेस्पिन का कहना है कि उनमें नेतृत्व का अभाव है. "वे राजनेता की तरह नहीं पार्टी नेता की तरह पेश आते हैं." यही वजह है कि उनके नेतृत्व में उनकी पार्टी दो-दो बार चुनाव हार गई. वित्तीय संकट के शिखर पर 2011 में उनकी पार्टी ने सोशलिस्ट पार्टी को हराया और नवम्बर 2011 में राखोय प्रधानमंत्री बने.

प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने सरकारी खर्च में भारी कटौती की और कर बढ़ाए. इस क्रम में उन्होंने अपने कई चुनावी वादे भी तोड़े. एक साल के अंदर उनकी लोकप्रियता गिरकर निचले स्तर पर पहुंच गई. उनका कहना है कि सरकारी खजाने को सही हालत में लाने के लिए कर बढ़ाना और खर्च कम करना उनकी मजबूरी है, लेकिन अतिरिक्त बोझ ढो रहे लोगों के लिए यह दलील काम नहीं आ रही है. साथ ही बेरोजगारी दर बढ़कर 26 फीसदी हो गई है.

वित्तीय संकट, बढ़ती बेरोजगारी और लगातार हो रही सरकारी कटौतियों से परेशान लोग गुस्से में सड़कों पर उतर आए हैं. लेकिन राखोय अपनी पार्टी के अंदर समर्थन की उम्मीद कर सकते हैं. उप प्रधानमंत्री सोराया सेंज डे सांतामारिया प्रधानमंत्री का समर्थन करते हुए कहती हैं, "मैं 12 साल से उनके साथ काम कर रही हूं, और इन सालों में मैंने हमेशा आदर्श बर्ताव देखा है." खुद राखोय ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उन्हेंअपने पिता से नियमों का पालन करने की भावना विरासत में मिली है.

एमजे/एजेए (डीपीए,एपी)

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