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दुनिया

स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश

भारत के टेलिकॉम सेक्टर की निगहबानी करने वाली संस्था ट्राई ने स्पेक्ट्रम घोटाले के बाद ऑपरेटरों के लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की है. ट्राई ने 2जी और रेडियो बैंडविथ के 38 परमिट रद्द करने को कहा है.

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अगर ट्राई की ये सिफारिशें मान ली गईं तो प्रभावित होने वाली कंपनियों में नॉर्वे की टेलिनॉर और एमिरेट्स टेलिकम्युनिकेशन कॉर्प भी होंगी. ट्राई ने इनके साथ ही 31 दूसरे लाइसेंस भी रद्द करने की सिफारिश की है जिनमें रूस की सिस्टेमा इन्वेस्टमेंट का संयुक्त उपक्रम भी शामिल है. हालांकि ट्राई ने कानूनी पहलुओं की पड़ताल करने के बाद ही इन सिफारिशों पर आगे बढऩे की बात कही है.

A. Raja Indien Kommunikation Information Technik Minister

पूर्व टेलकॉम मंत्री ए राजा

टेलिकम्युनिकेशन विभाग के राज्य मंत्री सचिन पायलट ने कहा, "सरकार सारे आंकड़ों और कानूनी नोटिस की पड़ताल करने के बाद जरूरी कदम उठाएगी." घोटाले सामने आने के बाद विपक्ष के आक्रामक रुख ने सरकार पर दबाव बना दिया है. ट्राई की सिफारिशें टेलिकॉम मंत्रालय पर बाध्यकारी नहीं हैं हालांकि लाइसेंस रद्द करने का अधिकार उसी के पास है.

नॉर्वे की कंपनी टेलिनॉर की तरफ से जारी बयान में इस बात से साफ इंकार किया गया है कि उसके भारतीय उपक्रम यूनीनॉर को मोबाइल लाइसेंस मिलने में किसी तरह की कोई अनियमितता हुई है. बाकी कंपनियों की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

भारत सरकार की तरफ से 2008 में 157 कंपनियों को लाइसेंस दिए गए थे और इनमें हुए घपलों के कारण सरकार को करीब 175 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ. कई कंपनियों के लाइसेंस आवेदन जरूरी शर्तें पूरी न होने के कारण रद्द कर दिए गए. यह बात पिछले महीने सीएजी की रिपोर्ट में सामने आई. कई कंपनियों ने लाइसेंस हासिल करने के लिए गलत जानकारियां दीं और फर्जी दस्तावेज लगाए. घोटाले का आरोप लगने के बाद टेलिकॉम मंत्री ए राजा को इस्तीफा देना पड़ा. विकास के रास्ते पर बढ़ता भारत टेलिकॉम सेक्टर के लिए एक बड़ा बाजार है यहां मोबाइल फोन के 70 करोड़ ग्राहक हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः वी कुमार

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