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दुनिया

स्नोडेन को शरण नहीं देगा जर्मनी

जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल की सरकार ने एडवर्ड स्नोडेन को शरण देने से एक बार फिर इनकार कर दिया है. यह ऐसे समय हुआ है जब जर्मनी स्नोडेन से पूछताछ की संभावनाएं तलाश रहा है.

चांसलर अंगेला मैर्केल ने बड़ी परेशानी के साथ यह कहा कि वह एनएसए की जासूसी और उनके फोन की टैंपिंग के आरोपों के बावजूद अमेरिका के साथ जर्मनी के रिश्तों को तोड़ना नहीं चाहतीं. मैर्केल के प्रवक्ता श्टेफान जाइबेर्ट ने कहा, “ट्रांस अटलांटिक गठबंधन हमारे, जर्मनी के लिए खास महत्व का है.“ उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका से जर्मनी को किसी भी और देश की तुलना में काफी फायदा हुआ है. और यह सरकार के किसी भी फैसले में अहम भूमिका रखता है.

जाइबर्ट ने स्नोडेन को बर्लिन में शरण दिए जाने की संभावना से भी इनकार किया. सरकार के मुताबिक स्नोडेन का मामला शरण दिए जाने की श्रेणी में नहीं आता. सत्ताधारी सीडीयू पार्टी के महासचिव हैरमन ग्रोएहे ने भी यही कहा है और कि अमेरिका और जर्मनी के बीच प्रत्यर्पण संधि वैध है.

जर्मनी रूस बैठक

इधर समाजवादी लोकतांत्रिक पार्टी एसपीडी ने जर्मन अधिकारियों से अपील की है कि स्नोडेन से मॉस्को में ही पूछताछ कर ली जाए. मैर्केल की सीडीयू पार्टी के संसदीय सचिव मिषाएल ग्रोसे ब्रोएमर ने कहा कि मौजूदा कानूनी स्थिति में वह स्नोडेन को शरण देने की बजाए उनसे रूस में गवाही लेंगे. ब्रोएमर के मुताबिक, "उनका राजनीतिक कारणों से पीछा नहीं किया जा रहा, बल्कि उन्हें अपराधी माना जा रहा है. जर्मन संविधान में ऐसी कोई धारा नहीं है जिसके मुताबिक उन्हें इस तरह का दावा करने की इजाजत हो. इसलिए बेहतर यही है कि उनसे मॉस्को में पूछताछ की जाए."

शनिवार को रूसी सरकार ने घोषणा की कि स्नोडेन रूस में किसी से भी मिलने के लिए आजाद हैं. इसमें न्यायिक मदद के लिए जर्मनी के संघीय महाअभियोक्ता की पूछताछ भी शामिल हैं. रूस की अनुमति अभी मिलनी है. जर्मनी के गृह मंत्री ने तो यहां तक कहा कि वीडियो लिंक के जरिए भी पूछताछ की जा सकती है.

स्नोडन ने पहले ही साफ कर दिया है कि एनएसए जासूसी विवाद के बारे में गवाही देने को तैयार हैं. वह इस बारे में जर्मनी की संसदीय जांच कमेटी के सभी सवालों का जवाब देंगे. ग्रीन पार्टी के सांसद क्रिस्टियान श्ट्रोएबले के मुताबिक स्नोडेन ने यह लिखित में भी दिया है. श्ट्रोएबले स्नोडन से मिलने मॉस्को गए थे.

जर्मनी की कुछ पार्टियां स्नोडन को पूछताछ के लिए जर्मनी बुलाना चाहती थीं. हालांकि ऐसा करना संभव नहीं था क्योंकि अगर उन्हें गवाही के लिए जर्मनी बुलाया जाता तो रूस में उनका शरणार्थी स्टेटस खत्म हो जाता. ऐसे में जर्मनी के पास दो संभावनाएं थीं, या तो वह स्नोडन को जर्मनी में शरणार्थी बनाए या फिर उन्हें अस्थाई निवास की अनुमति दे. दोनों में ही सीधे सीधे अमेरिका से रिश्ते खराब होने की संभावना थी.

रिपोर्टः चार्ल्स डी पेनफोल्ड/आभा मोंढे (डीपीए, रॉयटर्स)

संपादनः निखिल रंजन

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