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दुनिया

स्नोडेन को वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार

अमेरिकी खुफिया एजेंसी एनएसए के पूर्व एजेंट एडवर्ड स्नोडेन को जासूसी का पर्दाफाश करने के लिए इस वर्ष का वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार मिला. मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाली पाकिस्तानी वकील असमां जहांगीर को भी सम्मानित किया गया.

स्नोडेन कितने विवादास्पद हैं इसका पता इस बात से चलता है कि पुरस्कार की घोषणा के बाद से विवाद छिड़ गया है. 1995 से हर साल वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार की घोषणा स्वीडेन के विदेश मंत्रालय के एक कमरे में की जाती है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार देने वाले संगठन का कहना है कि पुरस्कार विजेताओं की जानकारी देने के बाद अंतिम समय में विदेश मंत्रालय ने मना कर दिया. विजेताओं में एक नाम एडवर्ड स्नोडेन का भी था.

स्वीडिश टेलिविजन का कहना है कि विदेश मंत्री कार्ल बिल्ट ने स्नोडेन को पुरस्कार दिए जाने पर व्यक्तिगत रूप से सख्त प्रतिक्रिया दिखाई. इसेक विपरीत बिल्ट के एक प्रवक्ता ने कहा कि मना किए जाने की वजह नए सुरक्षा नियम हैं जिनके तहत पहली सितंबर से पुरस्कारों की घोषणा मंत्रालय के प्रेस सेंटर में नहीं की जा सकती.

राइट लाइवलीहुड अवार्ड फाउंडेशन के ओले फॉन उइक्सक्यूल ने जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए से कहा, "हमने विदेश मंत्रालय को पिछले गुरुवार को बता दिया था कि विजेता कौन हैं और उन्होंने हमें कल सूचित किया कि घोषणा के लिए प्रेस सेंटर उपलब्ध नहीं होगा." उन्होंने कहा कि यह दिलचस्प है कि फैसले को विवादास्पद माना जा रहा है क्योंकि स्नोडेन ने जो किया है वह दूसरे विजेताओं से अलग नहीं है, उन्होंने अपने देशों की अवैध कार्रवाईयों का पर्दाफाश किया है.

स्नोडेन के देश अमेरिका में उन्हें 2013 में ब्रिटिश अखबार गार्डियन को अमेरिका की जासूसी के बारे में बताने के बाद से देशद्रोही माना जाता है. उइक्सक्यूल का कहना है कि रूस में निर्वासन में रहने वाले स्नोडेन पुरस्कार लेने के लिए स्वीडेन आते, लेकिन अब फाउंडेशन कानून मदद से इसे संभव बनाने की कोशिश करेगा. फाउंडेशन ने अमेरिका में उनके खिलाफ मुकदमा चलाए जाने की स्थिति में उन्हें कानूनी मदद देने की पेशकश की है.

एडवर्ड स्नोडेन के अलावा इस बार 55,000 यूरो की राशि वाला वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार पाकिस्तानी वकील असमां जहांगीर और एशियाई मानवाधिकार आयोग के बासिल फर्नांडो के अलावा अमेरिकी पर्यावरण कार्यकर्ता बिल मैककिबेन को दिया गया है. इससे पहले भारत की वंदना शिवा को वैकल्पिक नोबेल पुरस्कार मिल चुका है.

एमजे/आईबी (डीपीए)

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