1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

स्थाई सदस्यता के लिए एकजुट हुए जी-4 देश

सुरक्षा परिषद में स्थाई सीट की मांग कर रहे भारत, जापान ब्राजील और जर्मनी ने एक दूसरे की दावेदारी को समर्थन देने का वादा किया. सभी देश मानते हैं कि सुरक्षा परिषद के विस्तार के लिए उन्हें हरसंभव प्रयास करने होंगे.

default

भारत, जापान, ब्राजील और जर्मनी ने अपने समूह को जी-4 को नाम दिया है और सुरक्षा परिषद में सुधार लागू करने के लिए मिलकर प्रयास तेज करने का फैसला किया है. चारों देशों का कहना है कि बदलती दुनिया की तस्वीर को सही ढंग से पेश करने के लिए इन सुधारों को लागू किया जाना जरूरी है.

विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया, "विदेश मंत्रियों ने सुरक्षा परिषद में जल्द सुधार लागू कराने की जरूरत दोहराई है. इन सुधारों के मुताबिक सुरक्षा परिषद में स्थाई और अस्थाई सीटों में इजाफा किया जाएगा."

संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि सुरक्षा परिषद में विस्तार के लिए कोशिशें जल्द शुरू कर दी जाएंगी. पुरी के मुताबिक सुधार प्रक्रिया तो अगले 12 महीनों में भी शुरू हो सकती है. इस बैठक में भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा भी मौजूद थे जिन्होंने इस संबंध में जल्द कदम उठाने पर जोर दिया है.

"हर कोई सुनिश्चित करना चाहता है कि सुधार जल्द से जल्द लागू हो जाएं. सभी देश इस बात से संतुष्ट हैं कि सुरक्षा परिषद में स्थाई और अस्थाई सीटों को बढ़ाने के लिए भारी समर्थन मिलेगा. यह समर्थन विकासशील देशों के साथ साथ विकसित देशों से भी मिलने की उम्मीद है."

वहीं हरदीप सिंह पुरी मानते हैं कि विदेश मंत्रियों के बीच बैठक होने से अब साफ है कि सुधार एजेंडे पर अब बातचीत इन देशों के कूटनीतिकों में नहीं बल्कि सरकारों के बीच में होगी, यानी गाड़ी आगे बढ़ रही है. "एक दूसरे की दावेदारी को समर्थन देने की बात दोहराने के अलावा उन्होंने स्थाई सदस्यता के लिए अफ्रीकी देश की अहमियत की भी पुष्टि कर दी."

लेकिन हरदीप सिंह पुरी स्वीकार करते हैं कि सभी देशों के बीच एकराय नहीं है कि सुरक्षा परिषद में सुधार किस तरह से लागू होने चाहिए. 19 सालों के बाद भारत एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य बनने जा रहा है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: एन रंजन

DW.COM

WWW-Links

संबंधित सामग्री