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दुनिया

स्त्री हिंसा के खिलाफ एकजुटता

अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा रोकथाम दिवस के मौके पर संयुक्त राष्ट्र ने 16 दिनों के एक कार्यक्रम की शुरुआत की है. संयुक्त राष्ट्र ने इस मौके पर संदेश दिया है कि लोग तरह तरह के अभियानों के जरिए जागरूकता फैलाएं.

अंतरराष्ट्रीय महिला हिंसा रोकथाम दिवस के मौके पर प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय परिसर और न्यूयॉर्क में एम्पायर स्टेट बिल्डिंग नारंगी रंग में नहा चुकी है. इस अभियान को संयुक्त राष्ट्र ने "ऑरेंज योर नेबरहुड" का नाम दिया है.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने इस मौके पर कहा, "साथ मिलकर हमें इस वैश्विक अपमान को समाप्त करना होगा. यह हर किसी की जिम्मेदारी है कि वह अपनी भूमिका निभाएं. महिला अधिकार सिर्फ महिलाओं का मामला नहीं है. आखिरकार मर्द और लड़के इस लड़ाई मेंसहयोगी के तौर पर अपनी जगह ले रहे हैं."

स्त्रियों और लड़कियों के खिलाफ यौन, शारीरिक और मानसिक हिंसा के मामले महामारी की तरह बढ़ते जा रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक 2012 में मारी गईं कुल महिलाओं में आधी महिलाएं अपने पार्टनर या परिवार के सदस्यों के हाथों मारी गईं. अक्सर ऐसे मामलों में अपराधी बच जाते हैं और उन्हें सजा नहीं होती.

बान की मून ने कहा इसी साल 200 से ज्यादा लड़कियों का अपहरण नाइजीरिया में हुआ और हमने देखा कि इराक में संकट के दौरान महिलाओं ने कबूला है कि उनके साथ बलात्कार और यौन गुलामी की घटनाएं हुईं.

महिलाओं के खिलाफ हिंसा के खात्मे के लिए अभियान के तहत दुनिया भर के लोगों से आग्रह किया जा रहा है कि वे नारंगी रंग का प्रदर्शन करें जो कि उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है और जो सभी महिलाओं के लिए एक सुरक्षित भविष्य की उम्मीद करता है. इस अभियान के तहत लोग ऑरेंज रिबन का इस्तेमाल स्थलों पर बांधने के लिए करेंगे और नारंगी कपड़े पहने लोग जागरूकता बढ़ाने और समुदाय में व्यापक समाधान पर चर्चा करेंगे.

2013 में डब्ल्यूएचओ ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर पहली बार विस्तृत रिसर्च करने के बाद समीक्षा रिपोर्ट पेश की थी, इसके मुताबिक दुनिया भर में मारी जाने वाली 40 फीसदी महिलाएं अपने साथी का शिकार होती हैं. डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में कहा गया था कि दुनिया भर में 30 फीसदी महिलाएं उनके जीवन साथी के कारण घरेलू हिंसा से जूझती रहती हैं. रिपोर्ट तैयार करने में 1983 से 2010 तक के आंकडों का सहारा लिया गया था. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक करीब 60 करोड़ महिलाएं ऐसे देशों में रहती हैं जहां घरेलू हिंसा को अपराध नहीं माना जाता.

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