स्तन हटवाने वाली महिलाएं ′आधी औरत′ हैं? | दुनिया | DW | 03.01.2018
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दुनिया

स्तन हटवाने वाली महिलाएं 'आधी औरत' हैं?

कैंसर के खिलाफ तो लिंडा ने जंग जीत ली लेकिन अपने पति के तानों से जीत पाना मुश्किल था. ब्रेस्ट कैंसर के चलते स्तन हटवाने वाले लिंडा को उनके पति ने "आधी औरत" कहा.

Algerien - Brustkrebs (Getty Images/AFP/R. Kramdi)

लिंडा के लिए कैंसर से लड़ाई बहुत मुश्किल रही

अल्जीरिया की लिंडा की उम्र 50 साल है और उनके तीन बच्चे हैं. वह कहती हैं, "कैंसर? शादी के 18 साल बाद ठुकराए जाने से भला इसकी क्या तुलना हो सकती है." पेशे से मेडिकल असिस्टेंट लिंडा कहती हैं कि बरसों बाद भी उन्हें यह बात सालती है.

एक चैरिटी संस्था का कहना है कि लिंडा उन सैकड़ों अल्जीरियाई महिलाओं में से एक हैं जिन्हें स्तन कैंसर हो जाने के बाद उनके पति या प्रेमियों ने छोड़ दिया. उत्तर अफ्रीकी देश अल्जीरिया में हर साल हजारों महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले सामने आते हैं. इनमें से बहुत सी महिलाओं के पास स्तन हटवाने के सिवाय कोई चारा नहीं होता. लेकिन बहुत से लोगों के लिए स्तन ही महिला की पहचान हैं.

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पूरी औरत

हयात बताती हैं कि जब उन्होंने अपने प्रेमी को बताया कि कैंसर की वजह से उन्हें एक इमरजेंसी ऑपरेशन के दौरान अपने स्तन हटवाने पड़े तो उसने उन्हें छोड़ दिया. रोते हुए 30 वर्षीय छात्रा हयात बताती हैं, "उसने मुझसे कहा, मुझे पूरी औरत चाहिए न कि तीन चौथाई औरत."

कैंसर के जुड़े मामलों पर काम करने वाली एक चैरिटी संस्था की प्रमुख सामिया गास्मी कहती हैं कि कैंसर का पता चलने पर बहुत सी महिलाओं के पार्टनर उन्हें छोड़ देते हैं. ऐसे में, अपने इलाज का सारा बोझ कैंसर पीड़ित महिलाओं पर आ जाता है. ऐसी कई महिलाओं के सिर पर तो छत भी नहीं होती है. गास्मी कहती हैं, "कुछ महिलाएं अवसाद में चली जाती हैं. कुछ शेल्टर्स में चली जाती हैं क्योंकि पति द्वारा छोड़े जाने पर उनके पास कोई चारा नहीं होता."

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अल्जीरिया में स्तन कैंसर को एक निजी मामले के तौर पर देखा जाता है. ऐसे में, इससे पीड़ित महिलाएं अक्सर इसके बारे में बात भी नहीं कर पाती हैं. कई बार तो वे अपने परिवार से भी इस बीमारी को छुपाती हैं.

Algerien - Brustkrebs (Getty Images/AFP/R. Kramdi)

गास्मी ने बहुत सी कैंसर पीड़ितों की मदद की है

गास्मी कहती हैं, "ये महिलाएं अपनी बीमारी को शर्म के तौर पर देखती हैं." वह बताती हैं कि ऐसी एक महिला ने इस बारे में अपनी बहन को बताने से भी इनकार कर दिया था जबकि अन्य एक महिला ने अपनी कीमोथेरेपी से पहले ही सिर पर स्कार्फ पहनना शुरू कर दिया था ताकि उसके पति के परिवार को पता न चल पाए कि उसके बाल क्यों गिर रहे हैं. एक अन्य मरीज ने इलाज से बेहतर कैंसर से मरना पसंद किया.

गैर इस्लामी

इस सिलसिले में जिन कैंसर पीड़ित महिलाओं से समाचार एजेंसी एएफपी ने बात करने की कोशिश की, उन सभी ने कैमरे के सामने आने से मना कर दिया. साथ ही उन्होंने अपना आखिरी नाम बताने से भी इनकार कर दिया.

समाजशास्त्री यामीनी राहोऊ का कहना है कि शर्म की यह भावना शरीर के उस अंग के खो जाने के दर्द से आती है जिसे महिलाओं की पहचान माना जाता है. ओरान में सोशल एंड कल्चरल एंथ्रोपोलोजी सेंटर के एक रिसर्चर का कहना है कि जिन महिलाओं को अपने स्तन हटवाने पड़े, वे महसूस करती हैं कि अब वे एक औरत के तौर पर सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के काबिल नहीं रहीं.

वहीं एक धार्मिक विद्वान कामेल चेकात कहते हैं कि स्तन हटवाने के बाद पति अगर अपनी पत्नियों को ठुकराते हैं तो यह गैर इस्लामी है. वह कहते हैं, "इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है. यह शिक्षा की बात है." वह कहते हैं कि "इस्लाम इस बात की हिमायत करता है कि जीवनसाथी एक दूसरे का साथ दें " और एक सम्मानित पुरुष को अपनी पत्नी का ख्याल रखना चाहिए. लेकिन सभी पुरुष इसका ख्याल नहीं रखते.

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सैदा की उम्र 55 साल है और वह एक डॉक्टर हैं. उनकी मुलाकात अपने पति से यूनिवर्सिटी में हुई. वह बताती हैं, "हमने लव मैरिज की. उसने महिला अधिकारों के लिए होने वाले प्रदर्शनों में हिस्सा भी लिया." लेकिन जब सैदा ने अपने पति को बताया कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर है, तो सैदा को अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले ही उनका पति तलाक और अपने बेटे के कस्टडी चाहता था. सैदा बताती है कि इतना ही नहीं, उसने उनका बैंक अकाउंट भी साफ कर दिया. इससे सैदा टूट गई. वह कहती हैं, "मेरे अंदर हर चीज के लिए लड़ने की ताकत नहीं बची थी."

बढ़ते मामले

अल्जीरियर्स यूनिवर्सिटी में कैंसर जेनेटिक्स के प्रोफेसर फरीद चेरबल कहते हैं कि देश में हर साल नौ से दस हजार ब्रेस्ट कैंसर के मामले सामने आते हैं. बीस साल में अल्जीरिया में ब्रेस्ट कैंसर के मामलों में पांच गुनी वृद्धि हुई है.

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विशेषज्ञों का कहना है कि इस वृद्धि का कारण कैंसर का पता लगाने की तकनीक में बेहतरी के साथ साथ लाइफस्टाइल में आ रहे बदलाव भी हैं जहां शारीरिक कसरत कम हो रही है. इसके अलावा अनहेल्दी डाइट और धूम्रपान से भी कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं.

चेरबल कहते हैं कि अल्जीरिया में हर साल लगभग साढ़े तीन हजार महिलाएं कैंसर से मर रही हैं. ब्रेस्ट कैंसर का पता काफी बाद में चलता है, जिसके चलते इलाज में देरी होती है. कैंसर के सफल इलाज के बाद कई महिलाएं फिर से अपने लिए जीवनसाथी चाहती हैं. लेकिन कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के कारण एक साल में 10 किलो वजन घटाने वाली साफिया कहती हैं, "मेरे जैसी महिला को कौन चाहेगा."

लेकिन कई महिलाओं की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं. मसलन सैदा को अपने बेटे की कस्टडी मिल गई है. वहीं ऑपरेशन के पांच साल बाद हयात ठीक हो रही हैं. विदेश में ब्रेस्ट रिकंस्ट्रक्शन के बाद उन्हें परिवार और दोस्तों का साथ मिल रहा है.

और पति द्वारा "आधी महिला" कह कर छोड़ी गईं लिंडा भी अपने बच्चों की मदद से अपनी जिंदगी बेहतर तरीके से गुजार रही हैं. बल्कि वह तो कहती हैं कि कैंसर ने एक ऐसे पति से उनका पिंड छुड़ा दिया जो उन्हें मारता था और उनकी सारी तन्ख्वाह चुरा लेता था.

एके/आईबी (एएफपी)

 

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