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दुनिया

स्कॉटलैंड की मुद्रा क्या होगी

18 सितंबर को स्कॉटलैंड के वोटर तय करेंगे कि उनका देश आजाद होगा या आगे भी ब्रिटेन का हिस्सा ही बना रहेगा. अभी भी वह आजाद होने पर इस्तेमाल होने वाली मुद्रा के फैसला नहीं ले सके हैं.

स्कॉटलैंड की आजादी के समर्थक भी तय नहीं कर पाए हैं कि उनकी मुद्रा क्या होगी. पक्ष और विपक्ष के बीच बहस का यह अहम मुद्दा है. संपत्ति का प्रबंधन करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी ब्लैक रॉक के एवेन कैमेरॉन वॉट का कहना है, "अधिकतर दलीलें बेसिरपैर की हैं." शुरुआत में निवेशक भी आजाद स्कॉटलैंड के बारे में उदासीन थे क्योंकि उन्हें लग रहा था कि ऐसा नहीं होगा. लेकिन पिछली टीवी बहस में सामने आया कि इसके लिए हां करने वाले लोगों की संख्या करीब 47 फीसदी थी." वॉट का कहना है, "यस वोट के कारण मुद्रा की कीमत गिरेगी. जबकि बैंक ऑफ इंग्लैंड ने वोट के बावजूद आर्थिक स्थिति सुनिश्चित करने का वादा किया है." मॉर्गन स्टेनले के विश्लेषकों के मुताबिक स्कॉटलैंड के आजाद होने पर पाउंड की कीमत सात से दस फीसदी गिर सकती है और निवेशक भी दूर हो सकते हैं. ओईसीडी के मुताबिक सीधे विदेशी निवेश (एफडीआई) के इनफ्लो के मामले में ब्रिटेन यूरोप में दूसरा है.

अधिकतर व्यावसायियों और निवेशकों को चिंता है कि यस वोट की स्थिति में वेस्टमिन्स्टर और होलीरूड के बीच आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर लंबी बातचीत होगी. लोगों का मानना है कि 307 साल से जो यूनियन चला आ रहा है उसे 18 महीने में पूरी तरह अलग करना मुश्किल है. अगले साल मई में ब्रिटेन में चुनाव हैं.

कर्ज की समस्या

एक बड़ा मुद्दा ब्रिटेन का कर्ज है. बंटवारे में कर्ज भी बंटेगा. ब्रिटेन की राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक शोध के मोनीक इबेल कहती हैं, "चूंकि तकनीकी रूप से यह संभव नहीं होगा कि कर्ज स्कॉटलैंड को बांट दिया जाए, ब्रिटेन ही इस कर्ज को चुकाने का जिम्मेदार होगा और उम्मीद करेगा कि स्कॉटलैंड आने वाले 10-20 साल में उसे चुका दे." एबेल चेक गणराज्य और स्लोवाकिया के बीच के मुद्रा संघ का उदाहरण देती हैं, जब 1990 में दोनों देश अलग हो गए थे और स्लोवाकिया से चेक गणराज्य को पूंजी आनी रुक गई थी. इससे चेक गणराज्य में संकट पैदा हो गया था. निवशकों की नजरों से भी स्टर्लिंग यूनियन कम अच्छा फैसला होगा.

भले ही आजादी के विरोधी स्कॉटलैंड के अलग होने की स्थिति में वहां पाउंड के इस्तेमाल का विरोध करते हों लेकिन अनधिकृत तौर पर वहां यह मुद्रा चल ही सकती है. दूसरा विकल्प यूरो से जुड़ना है. लेकिन आजादी के समर्थक यूरोपीय संघ से जुड़ने के प्रति उतने उत्साहित नहीं हैं. क्योंकि वैसे भी स्कॉटलैंड के लिए सबसे बड़ा बाजार इंग्लैंड ही होगा.

अगर स्कॉटलैंड खुद के स्टर्लिंग नोट छापना शुरू कर देता है तो कई विश्लेषक इसे सबसे अच्छे विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. जनमत संग्रह गुरुवार को होना है और उससे पहले हुए सर्वेक्षणों में सामने आया है कि समर्थकों और विरोधकों के बीच कांटे का मुकाबला होगा. स्कॉटलैंड के अलग होने पर निश्चित ही ब्रिटेन को कई स्तर पर संतुलन पैदा करना होगा.

रिपोर्टः निकोल गोएबल/आभा मोंढे

संपादनः ईशा भाटिया

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