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विज्ञान

सौ से अधिक उम्र के रिकॉर्ड तोड़ लोग

जापान में 100 से ऊपर की आयु के लोगों का होना बहुत आम बात है. लेकिन क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि इस समय देश में कितने लोग ऐसे होंगे? सरकारी स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक इनकी संख्या 58,820 तक पहुंच गई है.

जहां दुनिया भर में तमाम बीमारियों और जीवनशैली संबंधित दूसरे कारणों से लोगों की औसत आयु घट रही है जापान में लंबी उम्र का होना कोई अनोखी बात नहीं. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इस साल 100 से ज्यादा आयु वाले लोगों की संख्या पिछले साल से 4,400 ज्यादा है. इनमें 87 फीसदी महिलाएं हैं.

पिछले एक दशक में जापान में 100 से ऊपर आयु वाले लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है. 1963 में जब इसकी गणना शुरू की गई थी तब ऐसे मात्र 153 लोग थे. एक अहम सवाल यह उठता है कि आखिर इसका राज क्या है. जानकारों का मानना है कि चिकित्सा के क्षेत्र में प्रगति और जापान में लोगों का सेहतमंद खानपान इसका बहुत बड़ा कारण है. साथ ही देश में जन्म दर कम है.

विकासशील देशों में आम तौर पर पेंशन और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था की भी कमी है. लेकिन कभी काफी ऊंचे रहे जन्म दर का नतीजा यह होगा कि कुछ सालों में वहां बहुत ज्यादा बुजुर्ग लोग होंगे. बुजुर्ग लोगों की जिंदगी को आसान बनाने के लिए नई संरचनाएं बनाने की जरूरत होगी.

जवान रहने का नुस्खा

ओकिनावा की रियूक्यूस यूनिवर्सिटी में कृषि विज्ञान के प्रोफेसर शिंकिचि तवादा का दावा है कि उन्होंने दक्षिण जापान के लोगों की लंबी उम्र का राज ढूंढ निकाला है. तवादा को विश्वास है कि गहरे पीले-भूरे से रंग के दिखने वाले एक खास पौधे "गेटो" का अर्क इंसान की उम्र 20 फीसदी तक बढ़ा सकता है. तवादा कहते हैं, "ओकिनावा में कई दशक से लंबी उम्र तक जीने की दर दुनिया में सबसे ज्यादा रही है और मुझे लगता है कि इसका कारण जरूर यहां के परंपरागत खान पान में ही छुपा है."

काइको उहारा 64 साल की हैं लेकिन अपनी उम्र से कहीं कम की दिखती हैं. इसका राज वह गेटो को बताती हैं. काइको अपनी दुकान में ऐसे सौंदर्य उत्पाद भी बेचती हैं जिनमें गेटो ही मुख्य घटक होता है, "मैं गेटो का काढ़ा पीती हूं, जो मुझे तरो ताजा कर देता है, और मैं इस पौधे के अर्क को पानी में घोल कर लगाती हूं जिससे झुर्रियां भी कम होती हैं."

तवादा पिछले 20 साल से अदरक के परिवार के इस खास पौधे का अध्ययन कर रहे हैं जिसे स्थानीय लोग "गेटो" के नाम से जानते हैं. इसे विज्ञान की भाषा में एल्पिनिया जेरूंबेट, पिंक पोर्सिलेन लिली या शेल जिंजर के नाम से भी जाना जाता है. तवादा को लगता है कि उनके इतने लंबे शोध का फल अब मिल गया है. कुछ समय पहले ही कीड़ों पर किये एक प्रयोग में उन्हें उत्साहजनक नतीजे मिले जब उन्होंने देखा कि जिन कीड़ों को रोज गेटो की खुराक दी जा रही थी, उनकी उम्र अन्य कीड़ों के मुकाबले 22.6 प्रतिशत ज्यादा रही.

एसएफ/एएम (डीपीए/एएफपी)

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