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जर्मन चुनाव

सौ नामी लोगों ने की जर्मन पत्रकारों की रिहाई की मांग

ईरान में बंदी बनाए गए दो जर्मन पत्रकारों की रिहाई की नए साल में भी कोई उम्मीद दिखाई नहीं दे रही है. उधर बिल्ड अम सोनटाग नाम के जर्मन अखबार में सौ लोगों ने ईरान से इन पत्रकारों को रिहा करने की अपील की है.

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राजनीति, अर्थजगत, कला और खेल जगत के सौ लोगों मशहूर लोगों ने ईरान से अपील की है कि वह दोनों जर्मन पत्रकारों को रिहा कर दे. जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने फिर जोर दिया, "हमारा इकलौता लक्ष्य है कि दोनों जर्मन नागरिकों को जल्द से जल्द जर्मनी बुलाया जाए. इसके लिए हम और गहन कोशिश करेंगे." इन जर्मन पत्रकारों को 10 अक्तूबर के दिन तबरिस में पकड़ा गया था क्योंकि वे पर्यटक वीजा पर पत्थर मार कर मौत की सजा पाने वाली महिला सकीने मोहम्मदी अश्तियानी के बेटे से इंटरव्यू करने की कोशिश कर रहे थे. ईरान का कहना है कि ये दोनों पत्रकार अवैध रूप से वहां पहुंचे. इनके पास पत्रकार वीजा नहीं बल्कि पर्यटन वीजा था.

मामले में नाटकीय मोड़ तब आया जब शनिवार को मोहम्मद अश्तियानी थोड़ी देर के लिए विदेशी पत्रकारों के सामने आईं और कहा कि वह उन सभी पर मुकदमा करना चाहती हैं जिन्होंने उनका और उनके देश का नाम खराब किया है. इसमें न केवल दोनों जर्मन पत्रकार बल्कि उनके पूर्व वकील मोहम्मद मोस्ताफी, और जर्मनी में रहने वाली और पत्थर मार कर मौत की सजा का विरोध करने वाली मीना अहदी भी हैं. अश्तियानी ने इस संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जेल में उन पर किसी तरह का अत्याचार नहीं किया गया है और वह इस प्रेस कांफ्रेंस में अपनी मर्जी से आई हैं किसी ने उन्हें जबरदस्ती नहीं भेजा है. हालांकि जर्मनी का मानना है कि इस संवाददाता सम्मेलन के लिए अश्तियानी से जोर जबरदस्ती की गई हो सकती है.

सकीने मोहम्मद अश्तियानी को पहले विवाहेत्तर संबंधों के लिए पत्थर मार कर मौत की सजा दी गई और अब पति की हत्या में मदद करने के लिए उन्हें फांसी की सजा भी दी जा सकती है. हालांकि इस मामले का फैसला अब तेहरान के सर्वोच्च न्यायालय के हाथ में है. इस न्यायालय तक वही मामले पहुंचते हैं जो राजनीतिक तौर पर अहम होते हैं.

जर्मनी के विदेश मंत्री गिडो वेस्टरवेले ने कहा, "उन दोनों को जल्द से जल्द रिहा किया जाना चाहिए और जर्मनी लौटना चाहिए. इसके लिए हम पूरी ताकत के साथ काम करेंगे."

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा एम

संपादनः ए कुमार

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