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दुनिया

सोशल मीडिया पर परवान चढ़ता प्यार

सख्त सामाजिक नियमों से हताश नौजवान और पढ़े लिखे अफगान तेजी के साथ सीख रहे हैं कि कैसे मोबाइल फोन के एक बटन से वर्जनाओं को किनारे किया जा सकता है.

घोर रूढ़िवादी, मुसलमान देश अफगानिस्तान में सोशल मीडिया नए रास्ते खोल रहा है, जिसके जरिए पुरुष और महिलाएं निजी संवाद कर पा रहे हैं. ऐसे देश में कुछ लोगों को प्यार भी नसीब हो रहा है जहां ज्यादातर शादियां परिवार की मर्जी से होती हैं और यहां तक की नियम इतने सख्त हैं कि मर्द और औरतों का उदार हलकों में भी बातचीत करना जोखिम भरा हो सकता है. हाल के समय में इंटरनेट के इस्तेमाल में तेजी के कारण नई संभावनाएं खुल गई हैं और कई लोग इंस्टैंट मैसेजिंग के जरिए एक दूसरे तक पहुंच रहे हैं और मुलाकात के लिए तारीख तय कर रहे हैं.

काबुल विश्वविद्यालय में सूचना प्रौद्योगिकी संसथान के एक सदस्य के मुताबिक, "शुरुआत में सोशल मीडिया का इस्तेमाल संवाद बिठाने में और शादी ठीक करने में होता है." यह सदस्य भी ऑनलाइन डेटिंग इस्तेमाल कर चुके हैं. इस रिपोर्ट के लिए जितने भी अफगानों का इंटरव्यू लिया गया सबने नाम न छापने की गुजारिश की. उनका कहना है कि सोशल मीडिया वेबसाइट जैसे फेसबुक शादी से पहले जोड़ों को एक दूसरे के बारे में जानने का दुलर्भ अवसर देता है. लोग फेसबुक या फिर जीमेल पर चैट करना पसंद करते हैं क्योंकि समाज उनके बीच सीधी बातचीत को आसान नहीं बनाता.

राष्ट्रीय सूचना संचार प्रौद्योगिकी अलायंस अफगानिस्तान के आंकड़ों के मुताबिक करीब पांच लाख अफगान फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं और 2012 से 3जी नेटवर्क आने के बाद यह संख्या तेजी से बढ़ रही है. इस अलायंस के प्रमुख उमर मंसूर अंसारी के मुताबिक, "सोशल मीडिया उन्हें ऐसा मंच दे सकता है जहां वह अपने विचार साझा कर सकें और अपनी पसंद के मुताबिक अपने जीवन साथी का चुनाव कर सकें. यह एक और फायदा है जो सोशल मीडिया लोगों को मुहैया करा रहा है."

खराब टिप्पणी, फ्रेंड रिक्वेस्ट

लेकिन कुछ समस्याएं भी हैं. युवा महिलाओं के प्रभावशाली अधिकारियों द्वारा शोषण का शिकार होने का जोखिम रहता है. कुछ अधिकारियों का कहना है कि उनके पास सोशल मीडिया में नौकरी या फिर सिर्फ रोमांस के लिए प्रस्ताव आते हैं. एक सरकारी अधिकारी का कहना है कि अक्सर महिलाएं उनके पास आने के लिए ऑनलाइन सहारा लेती हैं, ज्यादातर काम के लिए लेकिन कुछेक बार प्यार के प्रस्ताव भी आते हैं, "ज्यादातर समय महिलाएं नौकरी तलाशती हैं. कुछ महिलाएं पास आने की कोशिश करती हैं, प्यार भरे संदेश भेजती हैं लेकिन मैं उन्हें नकार देता हूं क्योंकि मैं एक पेशेवर हूं."

वहीं औरतों का कहना है कि उन्हें ऑनलाइन सतर्क रहना पड़ता है. लेकिन अफगानिस्तान में कहीं और सामान्य माने जाने वाला पोस्ट भी समस्या पैदा कर सकता है. एक 18 वर्षीय कानून की छात्रा का कहना है कि फेसबुक पर अपनी तस्वीर पोस्ट करने के बाद उसे परेशान किया गया, तब भी जब उस लड़की के उदारवादी परिवार ने इस फैसले का समर्थन किया, आखिरकार उस लड़की ने अपनी तस्वीर को हटा दिया. उसका कहना है कि, "हमारी संस्कृति में, अगर मैं अपने प्रोफाइल में तस्वीर लगाती हूं तो सही नहीं माना जाता है. मुझे कई बुरी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा और मर्दों ने मुझे फ्रेंड रिकवेस्ट भेजा."

कुछ महिलाओं का कहना है कि वे रिवाजों को चुनौती देने और उत्पीड़न से निपटने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने पाया कि जरूरी नहीं कि ऑनलाइन मेलमिलाप से दुनिया की असली बाधाएं खत्म हो जाएं.

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