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दुनिया

सोमालिया में स्कूली शिक्षा सबसे खराब

दो दशकों से गृह युद्ध की भयानक मार झेल रहे सोमालिया में शिक्षा का बुनियादी ढांचा तबाह हो चुका है. सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में सोमालिया को स्कूली शिक्षा के मामले में सबसे दयनीय बताया गया है.

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सोमाली राजधानी मोगादिशु में इस्लामी चरमपंथी कार्यवाहक सरकार को हटाकर कट्टर शरिया सरकार लाना चाहते हैं. इस गृह युद्ध में सोमाली चरमपंथी बच्चों को जबरदस्ती अपने गिरोह में शामिल कर रहे हैं. न्यूयॉर्क में सहस्राबादी विकास लक्ष्यों पर हो रहे शिखर सम्मेलन के मौके पर जारी ग्लोबल कैम्पेन फॉर एजुकेशन (जीसीई) की रिपोर्ट कहती है, "सोमालिया में जारी संकट, गृह युद्ध और अस्थिरता ने शिक्षा पर विनाशकारी प्रभाव डाला है. ताजा आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ 10 प्रतिशत बच्चों का ही प्राथमिक स्कूलों में दाखिला हुआ है." जीईसी की रिपोर्ट कहती है कि सोमालिया दुनिया के उन चार देशों में शामिल है जहां 70 प्रतिशत आबादी निरक्षर है. सोमालिया दुनिया के 60 सबसे गरीब देशों की सूची में सबसे निचले पायदान पर है. इरीट्रिया, हैती, कोमोरो, इथोपिया, चाड और बुरकीना फासो भी उसी के आसपास हैं.

Somalia in Distress

जंग ने लूट लिया सबकुछ

स्कूली शिक्षा से जुड़ी इस रिपोर्ट में कई और देशों की दयनीय स्थिति पर भी नजर डाली गई है. इसके मुताबिक, "अफ्रीकी देश चाड की 14 प्रतिशत आबादी सिर्फ पांच साल से स्कूल जाने लगी है. वहां बाल मजदूरी के साथ साथ बाल विवाह बहुत आम सी बात है. देश के दो तिहाई युवा पढ़ लिख नहीं सकते हैं." रिपोर्ट कहती है कि नाइजीरिया में अशिक्षित बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है. वहां 82 लाख बच्चों ने स्कूल का मुंह नहीं देखा. रिपोर्ट के मुताबिक, "यह बात हैरान करती है क्योंकि अफ्रीका के स्तर पर देखा जाए तो नाइजीरिया गरीब नहीं है. आंकड़ों के मुताबिक इसे अफ्रीका के सबसे अमीर देशों में शुमार किया जाता है. वह कच्चे का तेल का छठा सबसे बड़ा उत्पादक है."

दुनिया के आधे निरक्षर दक्षिण एशिया और खासकर अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में रहते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, "निरक्षर युवा और उनका परिवार जिंदगी को चलाने के लिए जरूरी योग्य़ता भी नहीं रखते जिसके चलते उन्हें हर चीज के लिए तरसना पड़ता है." अफगानिस्तान में लगभग बीस प्रतिशत महिलाएं ही पढ़ लिख पाती हैं और ग्रामीण इलाकों में तो लड़कियों को पढ़ने की अनुमति नहीं के बराबर है.

शिक्षा के मामले में हैती की स्थिति बदस्तूर चिंताजनक बनी हुई है. वहां सिर्फ आधे बच्चे ही स्कूल जाते हैं. इस साल जनवरी में वहां आए भूकंप से शिक्षा सुविधाओं पर और ज्यादा मार पड़ी है. लगभग 80 फीसदी स्कूल तबाह हो गए हैं.

कई संगठन कहते हैं कि अमीर देश शिक्षा के लिए मदद देने के अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रहे हैं. रिपोर्ट में दुनिया भर में शिक्षा के लिए अपनी क्षमता के मुताबिक सहायता देने वाले देशों को भी नंबर दिए गए हैं. इस मामले में नॉर्वे सबसे ऊपर है तो अमेरिका सबसे नीचे.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एन रंजन

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