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दुनिया

सोनिया गांधी का मोदी को समर्थन का आश्वासन

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से लोकसभा में अपने बहुमत का लाभ लेते हुए महिला आरक्षण विधेयक पारित करवाने की अपील की है. महिलाओं को संसद में 33 फीसदी आरक्षण का विधेयक लंबे समय से अधर में लटका हुआ है.

साल 2010 में कांग्रेसनीत यूपीए सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को राज्यसभा में पारित करा लिया था, लेकिन उस समय यह लोकसभा में पारित नहीं हो सका था. पिछले सात साल से सरकारें लगातार इस विधेयक को पारित करवाने का आश्वासन देती रहीं हैं. फिर भी ठोस रूप से अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है. प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में सोनिया गांधी ने कहा, "मैं आपको अनुरोध करते हुए लिख रही हूं कि लोकसभा में आपको बहुमत का लाभ उठाते हुए महिला आरक्षण विधेयक पारित करवाना चाहिए."

सोनिया ने यह चिट्ठी 20 सितंबर को लिखी है. उन्होंने अपने पत्र में आश्वासन देते हुए कहा है, "यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अहम कदम है इसलिए मैं आपको भरोसा दिलाती हूं कि कांग्रेस, महिला आरक्षण विधेयक पर सरकार का समर्थन करेगी."

भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास लोकसभा की 543 सीटों में से 335 सीटें हैं, वहीं कांग्रेस के पास महज 45 सीटें हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक अब तो इसके पारित न होने का कोई कारण ही नहीं है. सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक रंजना कुमारी कहती हैं, "इस विधेयक का विरोध करने वाले पुरुष सांसदों की सीटें फिलहाल संसद में कम हैं इसलिए बहुत प्रभावी विरोध की संभावना नहीं है. इसलिए हम विधेयक जल्द पारित होने की उम्मीद कर रहे हैं." स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षित सीटों का प्रावधान है लेकिन संसद के लिए ऐसा कोई प्रावधान नहीं है.

राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर इंटर-पार्लियामेंटरी यूनियन (आईपीयू) ने कुल 193 देशों की एक सूची जारी की थी जिसमें भारत को 147 पायदान पर रखा गया. भारत से बेहतर रैकिंग पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी पड़ोसी मुल्कों को दी गयी है.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोनिया गांधी की चिट्ठी के जवाब देते हुए भाजपा ने कहा है कि उनकी सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है. भाजपा का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष चिट्ठी लिखकर विधेयक को लेकर चल रही भाजपा की कोशिशों का श्रेय लेना चाहती हैं.

एए/आरपी (थॉमसन रॉयटर्स फांउडेशन)

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