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खेल

सोची के बहाने पुतिन पर दबाव

विंटर ओलंपिक की तैयारी में लगे रूस को एक और कूटनीतिक झटका लगा है. जर्मनी के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद ने सोची विंटर ओलंपिक में न जाने का एलान किया है. फ्रांस का कोई भी बड़ा अधिकारी सोची नहीं जाएगा.

राष्ट्रपति ओलांद के सोची न जाने के फैसले की जानकारी देते हुए फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरां फाबियुस ने कहा, "वहां जाने की कोई योजना नहीं है. मैं खेलों की सफलता की कामना करता हूं. लेकिन फ्रांस के शीर्ष अधिकारियों की वहां जाने की कोई योजना नहीं है."

यूरोप वन रेडियो से बातचीत में फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने इस फैसले के पीछे की वजह नहीं बताई. उन्होंने सिर्फ यही कहा कि फ्रांस की तरफ से कोई बड़ा अधिकारी सोची विंटर ओलंपिक में नहीं जा रहा है.

जर्मनी के राष्ट्रपति योआखिम गाउक पहले ही सोची जाने से इनकार कर चुके हैं. गाउक के मुताबिक वह खेलों का बहिष्कार नहीं कर रहे हैं बल्कि उनकी कुछ और योजनाएं हैं. हालांकि जर्मन मीडिया में ऐसी रिपोर्टें हैं कि मानवाधिकार और समलैंगिक अधिकारों को लेकर गाउक रूस को अपनी नाराजगी दिखा रहे हैं. यूरोपीय संघ की न्याय आयुक्त विवियाने रेडिंग भी सोची जाने से इनकार कर चुकी हैं. सोची में सात से 23 फरवरी तक ओलंपिक खेल होने हैं.

आने वाले दिनों में यूरोप के कुछ और नेता ऐसा ही एलान कर सकते हैं. बीते महीने यूक्रेन की सरकार ने आखिरी मौके पर यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित संधि को टाल दिया. माना जा रहा है कि इसके लिए रूस ने यूक्रेन पर दवाब बनाया था. यूक्रेन सरकार के इस फैसले के खिलाफ देश में तीन हफ्ते से प्रदर्शन हो रहे हैं. यूरोपीय संघ यूक्रेन और रूस के इस रुख से निराश है. माना जा रहा है कि सोची के खेल इस निराशा को व्यक्त करने के लिए अच्छा मौका हैं.

ओएसजे/एमजे (एएफपी)

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