सैलानी आएंगे पर क्या बाघ बचेंगे | मनोरंजन | DW | 30.08.2013
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मनोरंजन

सैलानी आएंगे पर क्या बाघ बचेंगे

पश्चिम बंगाल सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सुंदरबन इलाके में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने की पहल की है लेकिन पर्यावरणविद् और वन्यजीव विशेषज्ञ इसके खिलाफ आवाज उठाने लगे हैं.

पर्यावरण और वन्य जीवों को बचाने में जुटे लोगों की दलील है कि इसकी वजह से भारतीय सीमा में रहने वाले रॉयल बंगाल टाइगर सीमा पार बांग्लादेश में चले जाएंगे. इन लोगों ने बाघों के संरक्षण के लिए निजी-सरकारी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है.

सरकारी योजना

पश्चिम बंगाल सरकार ने सुंदरबन में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. पर्यटन मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी कहते हैं, "सुंदरबन वर्ल्ड हेरिटेज साइट है और वहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं. हेलीकॉप्टर सेवा के जरिए सुंदरबन को अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का पसंदीदा ठिकाना बनाया जा सकता है." पर्यटन मंत्री के मुताबिक सुंदरबन के भीतर गोसाबा से 30 से 50 मिनट अवधि की इस उड़ान सेवा से बाघों के नजर आने की संभावना 80 फीसदी बढ़ जाएगी. यह सेवा पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण साबित होगी. उनकी दलील है कि सिक्किम सरकार ऐसी ही सेवा से काफी राजस्व कमा रही है. ऐसे में सुंदरबन जैसा पर्यटन स्थल होते हुए पश्चिम बंगाल ऐसा क्यों नहीं कर सकता. राज्य सरकार के सुंदरबन मामलों के सचिव ए.के. बल ने बताया, "हमने सुदंरबन में हेली-टूरिज्म शुरू करने के लिए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय से संपर्क किया है. इसके अध्ययन के लिए मंत्रालय और पवनहंस के अधिकारियों को भी न्योता भेजा गया है. सरकार ने हेलीपैड बनाने के लिए चार जगहों को चुना है."

Flash-Galerie Tiger (Indien)

प्रस्ताव का विरोध

सरकार के इस प्रस्ताव का भारी विरोध हो रहा है. एक कार्यक्रम के सिलसिले में कोलकाता आईं वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ता बेलिंडा राइट ने चेताया है कि ऐसा कोई भी कदम रॉयल बंगाल टाइगरों को सीमा पार कर सुंदरबन के बांग्लादेश वाले हिस्से में जाने पर मजबूर कर सकता है. वह कहती हैं, "बड़े पैमाने पर प्रस्तावित लक्जरी टूरिज्म सुंदरबन के लिए पूरी तरह घातक साबित होगा. यह सोने के अंडे देने वाली मुर्गी को मारने की तरह होगा. इससे इधर के तमाम बाघा सीमा पार चले जाएंगे." दिल्ली की वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी आफ इंडिया की प्रमुख राइट कहती हैं कि सुंदरबन अपने किस्म का अनूठा जंगल है. वहां सीमित पैमाने पर ही पर्यटन ठीक है. उनके मुताबिक, सुंदरबन समेत देश के ऐसे दूसरे इलाकों में पर्यटकों की बढ़ती तादाद को नियंत्रित करना जरूरी है. उन्होंने बाघों की रक्षा के लिए निजी-सरकारी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अपनाने का सुझाव दिया है.

राज्य के जाने-माने पर्यावरणविद् सुभाष दत्त कहते हैं, "सरकार के फैसले से फायदा कम नुकसान ज्यादा होगा. सुंदरबन के जंगल इतने घने हैं कि पर्यटक ऊपर से बाघ तो क्या कोई भी जानवर नहीं देख सकेंगे. इसके अतिरिक्त शोरगुल व प्रदूषण से बाघों के सीमा पार पलायन का खतरा बढ़ जाएगा." जूलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के पूर्व महानिदेशक व पर्यावरणविद् आशीष घोष कहते हैं, ‘हेलीकॉप्टर सेवा से मैंग्रोव जंगलों का पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाएगा. इसके नतीजे घातक हो सकते हैं. इससे सुंदरबन का चेहरा ही बदल जाएगा. हेलीकाप्टर के शोरगुल से जानवरों के चैन में खलल पड़ेगा."

लेकिन सरकार इन आलोचनाओं से चिंतित नहीं है. सुंदरबन मामलों के सचिव बल कहते हैं, "हम यह सेवा शुरू करने से पहले पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों से विचार-विमर्श करेंगे. मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद ही योजना आगे बढ़ेगी. राज्य सरकार संबंधित पक्षों के साथ जल्दी ही इस मुद्दे पर बैठक करेगी."

सुंदरबन इलाका

तीन बड़ी नदियों-गंगा, ब्रह्मपुत्र और मेघना के मिलने से बना सुंदरबन डेल्टा 38 हजार 500 वर्ग किलोमीटर में फैला है. इसका ज्यादतार हिस्सा बांग्लादेश में है. भारतीय इलाके में सुंदरबन नेशनल पार्क है जिसे वर्ष 1987 में यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज साइट घोषित किया था. इस इलाके में छोटे-बड़े 54 द्वीप हैं जो नहरों व नदियों के जरिए आपस में जुड़े हैं. 2,585 वर्ग किलोमीटर में फैला सुंदरबन पार्क दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा मैंग्रोव जंगल है. इलाके में मौजूद टाइगर रिजर्व के अलावा मगरमच्छ अभयारण्य और पक्षी अभयारण्य भी देशी-विदेशी पर्यटकों में काफी लोकप्रिय हैं.

सरकार ने पर्यटन और इसके जरिए राजस्व बढ़ाने के लिए हेलाकॉप्टर सेवा शुरू करने की दिशा में पहल तो कर दी है, लेकिन इसका जिस स्तर पर विरोध हो रहा है उससे इस योजना के भविष्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

रिपोर्टः प्रभाकर, कोलकाता

संपादनः एन रंजन

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