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दुनिया

सैनिकों की वापसी पर भारत-चीन सहमत

भारत सरकार ने कहा है कि भारत और चीन लद्दाख में आमने सामने डटे सैनिकों को वापस बुलाने के लिए सहमत हो गए हैं. दोनों देशों के बीच विवादित सीमा पर यह साल का सबसे बड़ा गतिरोध था.

दोनों देशों ने इस महीने लद्दाख में करीब एक एक हजार सैनिकों की तैनाती की थी. भारत और चीन एक दूसरे पर आरोप लगाते आए हैं कि वे शांति समझौते का उल्लंघन कर सैन्य ढांचों का निर्माण कर रहे हैं. पिछले 52 साल से दोनों देशों के बीच सीमा विवाद है. भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि उनकी मुलाकात चीनी विदेश मंत्री वांग यी से न्यूयॉर्क में हुई और दोनों अपने अपने सैनिकों की वापसी इस महीने के अंत तक करने के लिए सहमत हो गए हैं. स्वराज के हवाले से ऑल इंडिया रेडियो ने कहा, "बुरा दौर गुजर चुका है."

1962 में भारत और चीन के बीच संक्षिप्त युद्ध हुआ था और 17 बार बातचीत के बावजूद भी दोनों देशों के बीच सीमा विवाद नहीं सुलझ पाया. 1962 में लड़ाई के बाद दोनों देशों की सेना के बीच अब तक लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) को लेकर भी सहमति नहीं बनी है जिस कारण रह रह कर दोनों के बीच गतिरोध पैदा हो जाता है.

Grenzkonflikt Indien China Ladakh

लद्दाख में घुसपैठ का आरोप

सालों पुराना सीमा विवाद

ताजा गतिरोध उस समय बढ़ गया जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत दौरे पर थे. उस वक्त दोनों तरफ से फौज की तैनाती बढ़ गई. भारत ने कहा था कि सैकड़ों चीनी सैनिक लद्दाख के चुमार सेक्टर में घुस आए हैं और उनके पास सड़क बनाने का सामान है. इससे पहले भारत द्वारा निगरानी पोस्ट को स्थापित करने को लेकर चीन विरोध जता चुका है. इसके अलावा चीन डेमचोक इलाके में सिंचाई के लिए बनाई जा रही नहर का विरोध भी करता आया है. गुरुवार को दोनों पक्षों की सेना के बीच फ्लैग मीटिंग भी हुई. इससे पहले दो फ्लैग मीटिंग सीमा पर बने तनाव को कम करने में नाकाम साबित हुई थी. पिछले साल भी डेपसांग में चीनी सैनिकों द्वारा कैंप लगाए जाने के बाद गतिरोध कायम हो गया था जो कि 21 दिनों तक चला था. लेकिन इस बार का गतिरोध कुछ ज्यादा ही गंभीर था.

चीनी विदेश मंत्रालय ने दोनों मंत्रियों के बीच हुई बातचीत पर जारी बयान में सीमा पर तनाव का जिक्र नहीं किया. बयान में सिर्फ इतना कहा गया है कि दोनों देशों को शी जिनपिंग की सफल यात्रा पर आगे बढ़ना चाहिए.

एए/एजेए (रॉयटर्स)

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