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दुनिया

सैकड़ों जानें जाती हैं यूरोप के दर पर

यूरोप की बाहरी सीमा पर हर साल 1500 लोगों की जान जाती है. यूरोपीय आयोग के भावी अध्यक्ष के लिए इसे नजरअंदाज करना मुश्किल होगा. यूरोपीय चुनावों में यह मुद्दा अहम होता जा रहा है.

इस हफ्ते यूरोपीय संसद के चुनाव हो रहे हैं, जिसके बाद आयोग का नया प्रमुख चुना जाएगा. मौजूदा आयोग प्रमुख जोसे मानुएल बारोसो ने अपने दस साल के कार्यकाल में शायद ही कभी शरणार्थी नीति पर कुछ कहा है. यह मुद्दा वे अपने गृहनैतिक कमिश्नर के लिए छोड़ते रहे हैं. हालांकि इटली के द्वीप लांपेडूजा के पास शरणार्थियों को ला रही नाव दुर्घटना में पिछले साल 400 से ज्यादा लोग मारे गए थे. ये अकेली त्रासदपूर्ण घटना नहीं थी. पत्रकारों की एक टीम के अनुसार साल 2000 के बाद से यूरोप की बाहरी सीमा पर 23,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं या लापता हैं.

और बढ़ेगा दबाव

यह सच है कि ब्रसेल्स यूरोपीय संघ की शरणार्थी नीति के लिए अकेले जिम्मेवार नहीं है. संघ के 28 सदस्य देशों की सरकारों का भी इसमें वजनदार प्रभाव है. इसके बावजूद साफ होता जा रहा है कि आयोग के भावी प्रमुख के लिए इस मुद्दे पर होने वाली बहस से बाहर रहना आसान नहीं होगा. यूरोपीय सीमा सुरक्षा एजेंसी फ्रॉन्टेक्स जैसी संस्थाओं का मानना है कि यूरोप की सीमा पर दबाव भविष्य में और बढ़ेगा. बहुत से शरणार्थी गरीब इलाकों से आते हैं, लेकिन बहुत से लोग सीरिया, अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे युद्ध और विवादग्रस्त इलाकों से आ रहे हैं.

इस समय चल रहे चुनाव प्रचार में यह मुद्दा पहले अजेंडा पर नहीं था लेकिन अब इस पर बहस हो रही है. शरणार्थी संगठन सीसीएमई के टॉर्स्टेन मोरित्स कहते हैं, "ध्यान देने वाली बात है कि सभी अखिल यूरोपीय पार्टियों के मुख्य उम्मीदवार वैध आप्रवासन की वकालत कर रहे हैं." कंजरवेटिव पार्टी के मुख्य उम्मीदवार जां क्लोद युंकर एक ओर इस पर जोर दे रहे हैं कि उन देशों में जहां से शरणार्थी आ रहे हैं या जहां से होकर वे आ रहे हैं, स्थिति में सुधार होना चाहिए तथा सीमा को और सुरक्षित किया जाना चाहिए. दूसरी ओर वे इसकी भी वकालत कर रहे हैं कि ज्यादा लोग वैध तरीके से यूरोप आ सकें और यहां काम कर सकें. "मैं चाहता हूं कि यूरोप आप्रवासियों के लिए कम से कम ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका जैसा आकर्षक बने."

व्यापक आप्रवासन

काम के लिए आप्रवासन की ऐसी नीति का लक्ष्य पढ़े लिखे विदेशी हैं जो यूरोप में कामगारों की बढ़ती उम्र से निबटने में भी मददगार होंगे. इस तरह के कार्यक्रम में बहुत कम जरूरतमंद लोगों को यूरोप आने में सफलता मिलेगी. सोशल डेमोक्रैटों के मुख्य उम्मीदवार शुल्त्स अपने भाषणों में व्यापक आप्रवासन की बात कर रहे हैं. वे अधिक वैध आप्रवासन के अलावा राजनीति दमन के शिकार लोगों के लिए अधिक सुरक्षा और गृहयुद्ध से प्रभावित लोगों के लिए अंतरिम सुरक्षा चाहते हैं. लांपेडूजा की त्रासदी के बाद शुल्त्स ने ,जो यूरोपीय संसद के अध्यक्ष भी हैं, शरणार्थियों को लेने में अधिक उदारता की मांग की थी.

लेकिन चुनाव प्रचार में इसके लिए उन्हें विरोध का सामना करना पड़ रहा है. जर्मनी की कंजरवेटिव सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी के यूरोपीय सांसद मार्कुस फैर्बर ने उनपर आरोप लगाया, "अफ्रीका के मानव तस्करों के गिरोह को नया मैनेजिंग डाइरेक्टर मिल गया है." इस हमले ने शुल्त्स को इतना आहत किया कि उन्होंने मई के मध्य में प्रमुख उम्मीदवारों की टीवी बहस में इसका उल्लेख किया. लोगों के सामने उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी और युकंर की नीति बहुत अलग नहीं है. उन्होंने सीएसयू और युंकर की नीति में अंतर जरूर देखा.

अब चुनावों के बाद कामगारों का ज्यादा कानूनी आप्रवासन होना सदस्य देशों की सरकारों पर निर्भर करेगा. इस मुद्दे को वे संदेह की निगाहों से देखती हैं. लेकिन एक दूसरे इलाके में बेहतरी की उम्मीद दिख रही है. समुद्र से आने वाले शरणार्थियों की मदद के मामले में सुधार की गुंजाइश है. एक व्यापक अभियान के तहत इटली के सुरक्षाकर्मी समुद्र में फंसे लोगों को निकाल कर जमीन पर ला रहे हैं. शरणार्थियों के लिए काम करने वाले मोरित्स कहते हैं कि अच्छा होगा यदि यूरोपीय संघ इसके लिए वित्तीय मदद मुहैया कराए. उनका कहना है कि सभी लोगों को यूरोप में शरण लेने का न्यायोचित मौका मिलना चाहिए. जरूरी है कि नया यूरोपीय आयोग शरणार्थियों के लिए पूरे यूरोप में एक जैसा स्तर लागू करवाए.

एमजे/आईबी (ईपीडी)

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