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खेल

सेल्फी के जमाने में सेल्फ गोल

वर्ल्ड कप फुटबॉल अजीबोगरीब शुरुआत के लिए मशहूर है. लेकिन पहले ही मैच में एक खुदकुश गोल और वह भी ब्राजीली खिलाड़ी के बूट से. इसकी तो किसी ने कल्पना भी नहीं की थी.

मार्सेलो के इस सेल्फ गोल ने 20 साल पुराने वर्ल्ड कप के मैच की याद ताजा कर दी. तब कोलंबियाई डिफेंडर आंद्रेस एस्कोबार ने गलती से अपने ही खाते में गोल कर दिया था. उस मुकाबले में भी मेजबान टीम शामिल थी. इस सेल्फ गोल की वजह से अमेरिका अगले दौर में पहुंच गया और कोलंबिया की टीम घर लौट गई.

विश्व कप चल ही रहा था कि एस्कोबार की एक शराबखाने के बाहर हत्या कर दी गई. एक थ्योरी सामने आई कि सेल्फ गोल की वजह से सट्टेबाजों के सारे समीकरण उलट पुलट हो गए और उन्हें काफी नुकसान हुआ, जिसका बदला उन्होंने एस्कोबार को मार कर पूरा किया. इस इकलौते खुदकुश गोल से अलग एस्कोबार का फुटबॉल जीवन शानदार रहा था और कोलंबिया में उनका रुतबा सबसे बड़े फुटबॉलरों में था. उन्हें लोगों का प्यार मिला था और उनका एक बयान लोगों में बहुत लोकप्रिय था, "जिंदगी यहां खत्म नहीं होती." लेकिन एक गोल ने ही शायद उनकी जिंदगी ले ली.

Weltmeisterschaft Fußball Brasilien 2014 Brasilien vs Kroatien

नेमार ने दिखाया जलवा

ब्राजील दुनिया का इकलौता देश है, जिसने अब तक के सारे वर्ल्ड कप खेले हैं और गुरुवार को 84 साल के इतिहास में पहला मौका था, जब उसके किसी खिलाड़ी ने विश्व कप में अपने ही पाले में गोल किया हो. मेजबान टीम के सबसे अच्छे खिलाड़ियों और विश्व स्तरीय डिफेंडरों में गिने जाने वाले मार्सेलो ने 11वें मिनट में क्रोएशियाई आक्रमण को नाकाम करने के लिए जब टांग अड़ाई, तो गेंद ने कोई और ही दिशा ले ली. इसके बाद तो मानो पीली जर्सी वाली टीम और पूरा विश्व सन्न रह गया.

ट्विटर पर इसे ब्राजीली विश्व कप इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी त्रासदी बताया जाने लगा. "पहली त्रासदी" तब हुई थी, जब 1950 में अपने ही घर में ब्राजील फाइनल में उरुग्वे के हाथों हार गया था. वह तो भला हो नेमार का, जिन्होंने मार्सेलो के सेल्फ गोल के बाद एक खूबसूरत फील्ड गोल और विवादित पेनाल्टी को गोल में बदल दिया. इसके बाद मार्सेलो की गलती पीछे छूट गई. नेमार के दोहरे गोल और रेफरी के "गलत" फैसलों पर चर्चा होने लगी.

ब्राजील फुटबॉल का दीवाना देश है और इस बार उससे वर्ल्ड कप जीतने की उम्मीद की जा रही है. ऐसे में मार्सेलो के सेल्फ गोल के बाद, कुछ मिनटों तक ही सही, अजीब तरह की चर्चाएं होने लगी थीं. सोशल मीडिया भी एस्कोबार के वीडियो निकाल निकाल कर दिखाने लगा था. भले ही यह वर्ल्ड कप हो लेकिन है तो खेल ही. भले ही एक गोल मैच का नतीजा तय कर देता हो लेकिन इससे फुटबॉल तो नहीं थमता. फुटबॉल अगर खेल भावना में बना रहे, तो उससे बेहतर कुछ नहीं. और इस मौके पर एस्कोबार को उन्हीं के शब्दों में श्रद्धांजलि दी जा सकती है, "जिंदगी यहां खत्म नहीं होती".

ब्लॉगः अनवर जे अशरफ

संपादनः महेश झा