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जर्मन चुनाव

सेन की पैरवी को तैयार जेठमलानी

नामी वकील और बीजेपी सांसद राम जेठमलानी ने नागरिक अधिकार कार्यकर्ता डॉ बिनायक सेन की पैरवी करने की पेशकश की है. जेठमलानी के मुताबिक बिनायक सेन को सजा देना सही नहीं है. विवादास्पद केस लड़ने के लिए जाने जाते हैं जेठमलानी.

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नागरिक अधिकार कार्यकर्ता डॉ बिनायक सेन को रायपुर की एक अदालत ने राजद्रोह का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है. डॉ सेन को सजा सुनाए जाने की कई हलकों में कड़ी प्रतिक्रिया हुई है और अब राम जेठमलानी उनके बचाव के लिए आगे आए हैं.

जेठमलानी का कहना है कि बिनायक सेन के लिए पैरवी करने से भारतीय जनता पार्टी के साथ उनके हितों का टकराव नहीं होगा. "किसी भी पार्टी की नीति यह नहीं कहती कि कुछ लोगों का केस उन्हें नहीं लड़ना चाहिए."

जेठमलानी ने कहा है कि अगर बिनायक सेन उनसे मदद मांगते हैं तो वह उनके लिए पैरवी करेंगे. ऐसा करने पर उन्हें बेहद खुशी होगी. लेकिन जेठमलानी का यह फैसला भारतीय जनता पार्टी के लिए परेशानी खड़ा कर सकता है क्योंकि पार्टी नक्सलियों और उनके लिए सहानुभूति रखने वालों के प्रति कड़ा रुख अपनाती रही है जबकि जेठमलानी डॉ बिनायक सेन की मदद करने के लिए तैयार दिख रहे हैं.

राम जेठमलानी का कहना है कि वह छत्तीसगढ़ अदालत के फैसले की आलोचना तो नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने फैसला नहीं देखा है लेकिन वह मानते हैं कि केस कमजोर है और बिनायक सेन को गलत सजा दी गई है.

जेठमलानी कई विवादास्पद मामलों में बचाव पक्ष की पैरवी कर चुके हैं. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हत्यारों, शेयर बाजार में घोटाला करने वाले हर्षद मेहता, जेसिका लाल मर्डर केस में मनु शर्मा, अफजल गुरू की अपील का बचाव किया है.

बिनायक सेन ने सीएमसी वेल्लोर के कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई की और लंबा समय गरीबों और पिछड़ों की मदद में बिताया. वह पीपल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टिज के महासचिव हैं. उन पर आरोप है कि वह कुछ लोगों के खत भूमिगत माओवादियों तक पहुंचा रहे हैं.

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एएम अहमदी ने भी कहा है कि वह इस फैसले से हैरान हैं. अहमदी के मुताबिक कुछ खतों को दूसरे व्यक्ति को सौंप देना दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त वजह नहीं होती. पूर्व चीफ जस्टिस वीएन खरे ने भी कहा है कि अगर सबूत पक्के और अकाट्य नहीं हुए तो फिर हाई कोर्ट को जवाब देना होगा.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: एन रंजन

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